80 सीटों वाला रॉयल बॉक्स विम्बलडन का सबसे बड़ा सम्मान: सिर्फ निमंत्रण से एंट्री और सख्त ड्रेस कोड; चेयरमैन भेजते हैं मेहमानों को आमंत्रण

80 सीटों वाला रॉयल बॉक्स विम्बलडन का सबसे बड़ा सम्मान:  सिर्फ निमंत्रण से एंट्री और सख्त ड्रेस कोड; चेयरमैन भेजते हैं मेहमानों को आमंत्रण

अमेरिका के सुपर बाउल के लग्जरी सुइट, फॉर्मूला-1 के पेडॉक क्लब और ओलिंपिक के आईओसी फैमिली बॉक्सेस दुनिया के सबसे खास स्पोर्ट्स वीआईपी एरिया माने जाते हैं। यहां पहुंचने के लिए मोटी रकम, कॉर्पोरेट मेहमाननवाजी या विशेष पास की जरूरत होती है। लेकिन विम्बलडन का रॉयल बॉक्स इन सबसे अलग है। यहां प्रवेश न पैसे से मिलता है, न टिकट से। यह दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में है, जहां बैठना एक सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान माना जाता है। सेंटर कोर्ट के ठीक सामने बनी करीब 80 सीटों वाली यह दीर्घा 1922 से विम्बलडन की परंपरा का हिस्सा है। हर साल कैमरे जितनी बार कोर्ट पर टिकते हैं, उतनी ही बार रॉयल बॉक्स पर भी जाते हैं, क्योंकि यहां बैठे लोग भी मैच जितने ही चर्चा में रहते हैं। कभी ब्रिटिश शाही परिवार, कभी किसी देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री तो कभी ओलिंपिक चैम्पियन यहां बैठे नजर आ जाते हैं। रॉयल बॉक्स की सबसे बड़ी खासियत इसकी चयन प्रक्रिया है। यहां बिक्री के लिए कोई टिकट उपलब्ध नहीं होती। मेहमानों का चयन ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब के चेयरमैन करते हैं और उन्हें व्यक्तिगत निमंत्रण भेजा जाता है। यानी यहां पहुंचना सामाजिक प्रतिष्ठा, उपलब्धि और योगदान का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि कई खिलाड़ी ग्रैंड स्लैम जीतने के बाद भी रॉयल बॉक्स में आमंत्रित होने को अपने करियर का बड़ा सम्मान मानते हैं। इस सम्मान के साथ प्रोटोकॉल भी उतना ही सख्त है। पुरुषों के लिए सूट, टाई और फॉर्मल जूते अनिवार्य हैं, जबकि महिलाओं के लिए एलिगेंट डे-ड्रेस या स्मार्ट ट्राउजर सूट की अपेक्षा की जाती है। बड़ी टोपी पहनने से भी बचने की सलाह दी जाती है, ताकि पीछे बैठे दर्शकों को मैच देखने में असुविधा न हो। नियमों का पालन इतना सख्ती से होता है कि 2015 में 7 बार के एफ-1 चैम्पियन लुईस हैमिल्टन को निर्धारित ड्रेस कोड के बिना पहुंचने पर रॉयल बॉक्स में प्रवेश नहीं मिला था। 4 करोड़ में 5 साल तक रिजर्व हो सकती है मैच सीट – विम्बलडन में करीब 4 करोड़ रुपए से ज्यादा में 5 साल तक हर दिन की सेंटर कोर्ट सीट खरीदी जा सकती है। इसमें मैच शुरू होने से पहले महंगी शैंपेन, बेहतरीन खाना और आम दर्शकों से अलग खास लाउंज की व्यवस्था होती है। – सिंगल्स फाइनल का सेंटर कोर्ट का एक टिकट 29 लाख तक मिल सकता है। लग्जरी लाउंज के 6 लाख अलग से खर्चने होते हैं। वहीं, सेंटर कोर्ट के सबसे खास स्काईव्यू सुइट का एक दिन का किराया करीब 1 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकता है।



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