5 साल की देरी से टांडा रोड अंडरपास की लागत हुई दोगुनी, अब लागत 25 करोड़ – Jalandhar News
भास्कर न्यूज | जालंधर टांडा रोड रेलवे क्रासिंग रोजाना 116 बार बंद होती है। ये अमृतसर-जालंधर रेलवे ट्रैक पर बनी है। माई हीरां गेट से श्रीदेवी तालाब मंदिर की तरफ यहीं से लोग जाते है। रोजाना 3 लाख से अधिक लोग गुजरते हैं। पिछले 5 साल से यहां पर व्हीकल अंडरपास बनाने की योजना पर मंथन हो रही है। अब दूसरी बार यहां व्हीकल अंडरपास बनाने के लिए लोकनिर्माण विभाग ने लागत का एस्टीमेट बनाया है। इसमें 2021 की तुलना में लागत दोगुनी होकर 25 करोड़ पहुंच गई है। विभागीय लेटर में नई लागत दर्ज है। पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड ने 11 मई 2021 को इस प्रोजेक्ट के लिए 13.06 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी थी। इसमें रेलवे के हिस्से का काम 2.22 करोड़ रुपए का था। जून 2021 में लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव ने इस खर्च को 50:50 के अनुपात में साझा करने पर सहमति दी थी। लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। टांडा रोड, होशियारपुर रोड, किशनपुरा चौक, दोमोरिया पुल, लाडोवाली रोड के निवासी। . गुरु गोबिंद सिंह एवेन्यू और पास की कॉलोनियों के लोगों को माई हीरां गेट, अटारी बाजार, रेलवे स्टेशन आने में आसानी होगी। .अमृतसर और होशियारपुर की तरफ से आने वाला ट्रैफिक को जो बाईपास के बजाय शहर के बीच से गुजरता है, को राहत मिलेगी। . 11 मई 2021 : पीआईडीबी द्वारा प्रोजेक्ट के लिए 13.06 करोड़ की पहली प्रशासनिक मंजूरी मिली। . 23 जून 2021 : पंजाब पीडब्ल्यूडी के प्रधान सचिव ने रेलवे और राज्य सरकार के बीच 50:50 खर्च साझा करने को मंजूरी दी। 10 सितंबर 2025 : उत्तर रेलवे ने पीडब्ल्यूडी से रोड प्लान और नॉन-रिफंडेबल सर्वे चार्ज के रूप में 21.24 लाख जमा करने को कहा। . 26 नवंबर 2025 : उत्तर रेलवे ने वर्ष 2025-26 की वार्षिक सूची में अपने हिस्से के 10.65 करोड़ रुपये के एस्टीमेट को मंजूरी दी। सितंबर 2025 में उत्तर रेलवे ने रोड प्लान और सर्वे चार्ज के लिए 21,24,035 रुपये जमा करवाए और नवंबर 2025 में रेलवे ने अपने वार्षिक बजट में 10.65 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट पास किया। अब हालत यह है कि अंडरपास के दोनों तरफ बनने वाली एप्रोच रोड (पहुंच मार्ग) बनाने का काम जो लोक निर्माण विभाग को करना है, उसकी अनुमानित लागत ही बढ़कर 25.10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह लागत मूल रूप से पूरे प्रोजेक्ट के लिए मंजूर की गई कुल राशि से भी लगभग दोगुनी है। इसी वजह से विभाग ने अब सरकार से दोबारा मंजूरी मांगी है।
Source link

