₹400 तनख्वाह वालों ने NEET की सुरक्षा तोड़ी: 200 लड़कों को बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन में नौकरी दिलवाई, इन्हीं के जरिए सॉल्वर बैठाए – Bihar News
री-NEET एग्जाम में सॉल्वर बैठाने के लिए परीक्षा माफिया ने बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम क्रैक किया था। इसके लिए उन्होंने 200 लड़कों को इनोवेटिव व्यू कंपनी में नौकरी पर रखवा दिया था। एक महीने से ये लड़के कंपनी के अंदर सिस्टम की रेकी करते रहे। इन्हीं के
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पहले कैंडिडेट सॉल्वर के साथ सेंटर पर जाता था। इसके बाद कंपनी में बैठे लड़के ओरिजन कैंडिडेट की बायोमीट्रिक स्कैनिंग के बाद सॉल्वर को एग्जाम हॉल में भेज देते थे। ओरिजनल कैंडिडेट बाहर आ जाता था।
भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए और देखिए परीक्षा माफिया ने 20 साल पुरानी ट्रिक से कैसे डमी कैंडिडेट्स को एंट्री दिलवाई…
सॉल्वर सिंडिकेट चलाने वाले अर्पित सिंह, रविशंकर और रंजीत कुमार।
लीक के बजाय बायोमीट्रिक क्रैक का प्लान
NEET 2026 पेपर लीक के बाद सरकार पूरी तरह सख्त हो गई। केंद्र सरकार ने पेपर के सभी रूट को सेफ कर दिया। राज्य सरकारों को गाइडलाइन जारी कर दी गई।
केंद्र से लेकर राज्य सरकार का पूरा फोकस पेपर लीक पर था, परीक्षा माफिया भी इस तैयारी को भांप गए। उन्होंने पेपर लीक के बजाए बायोमीट्रिक सुरक्षा को ही तोड़ने का पूरा प्लान कर दिया।
हमारी टीम को राज्य सरकार की खुफिया जांच एजेंसी का इनपुट मिला। बताया गया कि जिस कंपनी को बायोमीट्रिक जांच की जिम्मेदारी दी, उसी कंपनी में परीक्षा माफिया ने अपने लड़कों को भर्ती करा दिया।
एजेंसी के इनपुट को जब टीम ने क्रॉस चेक किया तो एक बड़ी कड़ी सामने आई। लखीसराय पुलिस ने परीक्षा के दौरान 18 लड़कों को गिरफ्तार किया, जो नीट एग्जाम में बायोमीट्रिक कंपनी इनोवेटिव व्यू में भर्ती हुए थे।
मामले की जांच कर रही एजेंसी से जुड़े अधिकारियों की माने तो बिहार के अलग-अलग जिलों में ऐसे 200 से ज्यादा कर्मचारियों के भर्ती करने क इनपुट है।
NTA ने जिसे जांच का जिम्मा दिया उसी ने गेम किया
NTA ने जांच के लिए जिस एजेंसी को सिलेक्ट किया था उस एजेंसी ने भी कैंडिडेट्स की जांच के लिए दूसरी एजेंसी को लगा दिया और यहीं से पूरा खेल हो गया। पढ़िए गड़बड़ी की एक-एक कड़ी।
- 1. एजेंसी ने दूसरी एजेंसी को दे दिया काम: NEET एग्जाम कंडक्ट कराने वाली NTA ने कैंडिडेट्स की बायोमेट्रिक जांच का काम EDCIL (एजुकेशनल कंसलटेंट इंडिया लिमिटेड) को दिया था। EDCIL ने इसकी जिम्मेदारी एक प्राइवेट एजेंसी इनोवेटिव व्यू कंपनी को दे दी।
- 2. डेली वेजेस कर्मचारियों के रूप में माफिया :इनोवेटिव व्यू कंपनी ने एग्जाम के लिए 2 तरह की भर्तियां कीं। पहली स्थाई कर्मचारियों की और दूसरी परीक्षा के दिन अस्थाई या फील्ड स्टाफ की। जो अस्थायी कर्मचारी होते हैं उनको परीक्षा के दिन के लिए ही भर्ती किया जाता है। जिस शहर में परीक्षा होनी होती है, उसी इलाके के लड़कों को भर्ती कराया जाता है। उनको एक दिन की सैलरी दी जाती है।
- 3. एक दिन की नौकरी में बड़ी जिम्मेदारी: अस्थाई कर्मचारियों में सीसीटीवी ऑपरेटर, बायोमेट्रिक एग्जीक्यूटिव, फेस रिकॉग्निशन ऑपरेटर, डिवाइस हैंडलर और तकनीकी सहायक जैसे पद होते हैं। चूंकि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में एक ही दिन हजारों परीक्षा केंद्र संचालित होते हैं, इसलिए बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं की जरूरत पड़ती है।
- 4. डेली वेजेस कर्मचारी पर टेक्निकल की जिम्मेदारी: अस्थाई कर्मचारियों का काम परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक मशीनें संचालित करना, अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करना, सीसीटीवी सिस्टम संभालना, अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना और परीक्षा खत्म होने के बाद तकनीकी रिपोर्ट तैयार करना होता है।
- 5. 400 रुपए में डमी कैंडिडेट्स पकड़ने की जिम्मेदारी: इन पदों के लिए सामान्यतः 12वीं पास, स्नातक या बेसिक कंप्यूटर नॉलेज रखने वाले युवाओं की नियुक्ति की जाती है। कई मामलों में स्थानीय स्तर पर वेंडर्स या मैनपावर सप्लायर के जरिए भी अस्थाई कर्मचारी उपलब्ध कराए जाते हैं। चयन के बाद उन्हें बायोमेट्रिक उपकरणों, फेस रिकॉग्निशन सिस्टम और साइबर सुरक्षा से संबंधित ट्रेनिंग भी दी जाती है। इन्हें एक दिन के 400 रुपए मिलते हैं।
अफसर नहीं सेट हुए तो बना ली डमी कर्मचारियों की चेन
पड़ताल के दौरान इनपुट मिला कि इनोवेटिव व्यू कंपनी के बड़े अफसरों के स्तर से गड़बड़ी नहीं हुई। पूरा खेल स्टेट लेवल पर किया गया। परीक्षा माफिया का नेटवर्क देश के सभी राज्यों में फैला है।
इसलिए बिहार ही नहीं देश के अन्य राज्यों यूपी, झारखंड, बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान के परीक्षा माफियाओं ने केंद्र सरकार की सुरक्षा लेयर को तोड़ने के लिए जांच एजेंसी में अपने आदमी सेट करने की प्लानिंग कर रखी थी।
जांच में मिले इनपुट के मुताबिक सबसे पहले माफिया ने इनोवेटिव व्यू कंपनी में सेटिंग करनी चाही थी, लेकिन इनोवेटिव व्यू कंपनी से उनकी डील नहीं हो पाई। परीक्षा माफिया बड़े मामले पर डील करना चाहते थे, लेकिन ऊपरी स्तर से डील की कोई कड़ी सेट नहीं हो पाई।
इसके बाद सेटिंग के लिए माफिया ने नोएडा में बैठे कंपनी के कुछ अन्य बड़े अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वहां भी कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद प्लानिंग कंपनी में बायोमीट्रिक जांच के लिए लगाए जाने वाले कर्मचारियों की भर्ती की हुई।
परीक्षा माफिया ने कंपनी के स्टेट लेवल पर सेटिंग कर अपने हिसाब से लड़कों की भर्ती करा दी। इन्ही लड़कों ने 400 रुपए रोज की तनख्वाह में नीट परीक्षा में वेरिफिकेशन की सबसे मजबूत कड़ी को तोड़ दिया।

कंपनी में भर्ती का तरीका जिससे सुरक्षा बाईपास हुई
पड़ताल में सामने आया कि माफिया ने इसी भर्ती प्रक्रिया का फायदा उठाने की योजना बनाई। इसके लिए इनोवेटिव व्यू कंपनी को मैनपावर सप्लाई करने वाले अधिकारियों से साठगांठ कर ली।
सरगना ने अपने विश्वसनीय लोगों को इस कंपनी में अस्थाई कर्मचारियों के रूप में भर्ती कराने के लिए पूरा नेटवर्क तैयार किया, ताकि परीक्षा केंद्र के अंदर तकनीकी स्टाफ के रूप में माफियाओं के अपने लोग मौजूद रहें और असली परीक्षार्थी की जगह पर सॉल्वर एंट्री हो जाए।
इसका खुलासा लखीसराय पुलिस की जांच में हुआ। परीक्षा माफियाओं ने राज्य के अन्य जिलों की तरह लखीसराय में भी अपने लोगों की एक दिन की नौकरी लगवाई थी।
जांच के दौरान इनोवेटिव व्यू कंपनी में भर्ती ऐसे 18 लड़कों को पुलिस ने एग्जाम के दिन ही पकड़ा था, इसके बाद इनोवेटिव व्यू कंपनी में डेली वेजेज पर काम करने वाले कर्मियों को डिटेक्ट किया जा रहा है।
400 रुपए की नौकरी वालों के सहारे 60 लाख की डील
हमारी जांच में पता चला कि परीक्षा माफिया अपने लोगों की भर्ती कराने के बाद कैंडिडेट ढूंढने में जुट गए। लखीसराय में किसका एग्जाम सेंटर है, जिनका परीक्षा केंद्र संबंधित जिले में है। इसके लिए ऐसे परिवारों की तलाश की गई जो किसी भी कीमत पर मेडिकल कॉलेज में बच्चों का प्रवेश चाहते थे।
ऐसे अभ्यर्थियों के परिजनों से 40 लाख से 60 लाख रुपए तक की डील की गई। इसके लिए बिजनेस मैन और डॉक्टर को विशेष रूप से टारगेट पर लिया गया था।

अश्विनी कुमार उर्फ मयंक पटना के PMCH में मेडिकल का छात्र है।
मेडिकल स्टूडेंट्स को बनाया सॉल्वर
परीक्षा माफियाओं के लिए सबसे अहम था ऐसे सॉल्वर ढूंढना जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा आसानी से निकाल सकें। इसके लिए विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे मेधावी छात्रों से संपर्क किया। सरगना ने यह जिम्मेदारी पटना PMCH के स्टूडेंट अश्विनी कुमार को दी।
अश्विनी ने अपने साथ के उन लड़कों को सेट किया जो नीट का परीक्षा निकाल कर अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे थे। खासकर वैसे लड़कों से संपर्क किया जो आर्थिक रूप से कमजोर थे। उन्हें परीक्षा देने के बदले 15 से 20 लाख रुपए तक देने की डील की। इन सभी सॉल्वर को भरोसा दिलाया कि सारे सेंटर पर अपने लड़कों की ड्यूटी है। एंट्री के समय कोई परेशानी नहीं होगी। अपने लड़के आसानी से सेंटर के अंदर घुसा देंगे।
अश्विनी खुद PMCH का स्टूडेंट है। वह पटना में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की है। नीट की तैयारी के दौरान ही इसके साथ पटना में नीट की तैयारी करने वाले और लड़के संपर्क में थे। अश्विनी ने उन सभी से संपर्क किया। इसके साथ नीट की तैयारी करने वाले लड़के भारत के अलग-अलग मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे थे।
सरगना अश्विनी के अलावा खुद भी सॉल्वर से सेटिंग किया। अश्विनी बिहार के लड़के सेट किए जिसमें मधेपुरा का मंतोष कुमार, मुजफ्फरपुर का विवेक कुमार, सुपौल का हिमांश कुमार, मधुबनी का सौरभ ओझा और मधुबनी का रौशन कुमार के साथ और भी कई लड़के हैं।
साथ ही माफियाओं ने पलामू के चंचल कुमारी, गिरिडीह की पूनम कुमारी, दिल्ली का अमन अग्रवाल, राजस्थान के सवाई माधोपुर का जितेन्द्र कुमार से सेटिंग की। परीक्षा के लिए अश्विनी ने पटना PMCH के और भी स्टूडेंट को सेट किया जो लखीसराय के अलावा बिहार के अलग-अलग सेंटर पर परीक्षा में बैठने के लिए तैयार हुए।

मिशन के लिए सॉल्वर को एक जगह किया गया था ब्रीफ
परीक्षा के दो दिन पहले सारे सॉल्वर को पटना बुलाया गया। पटना के एक मकान में अलग-अलग कमरे में रखा गया और सभी सॉल्वर को ओरिजनल परीक्षार्थी से मिलवाया गया। यहां सभी को प्लान बताया गया कि परीक्षा के दिन सेंटर पर ओरिजनल परीक्षार्थी भी मौजूद रहेंगे।
सेंटर पर बायोमीट्रिक अटेंडेंस लेने वाले कर्मचारियों की भीड़ का फायदा उठाते हुए मुख्य परीक्षार्थी की बायोमीट्रिक अटेंडेंस ले लेंगे और उनकी जगह पर सॉल्वर को एंट्री दे दी जाएगी। सेंटर के अंदर इनविजिलेटर सॉल्वर को नहीं पकड़े इसलिए सभी को एडिटेड एडमिट कार्ड दिया गया।
ऐसे कराई गई डमी कैंडिडेट्स की एंट्री
रीक्षा वाले दिन असली अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के बाहर ही मौजूद रहे। एंट्री के दौरान उनका बायोमीट्रिक सत्यापन और फोटो सेंटर से 100 मीटर दूर किसी स्थान पर करा लिया गया। इसके बाद सॉल्वर को परीक्षा केंद्र के अंदर भेज दिया गया। अश्विनी खुद बायोमीट्रिक कर्मचारी बनकर एग्जाम सेंटर के अंदर गया था।
गिरोह के एक सदस्य ने खोला राज
पूरी कड़ी एक्सपोज करने के पीछे गैंग के ही एक सदस्य का बड़ा रोल रहा। परीक्षा माफिया गिरोह के ही एक युवक ने लखीसराय जिला प्रशासन को मेल कर जानकारी दी कि लखीसराय के केंद्रीय विद्यालय में मधुप्रिया की जगह पुनम परीक्षा दे रही है।
इसके बाद जिला प्रशासन तुरंत एक्टिव हुआ और एसपी ने सभी सेंटर को अलर्ट कर दिया। इसके बाद लखीसराय के सारे सेंटर पर बारीकी से परीक्षार्थियों की जांच कि गई तो 9 सॉल्वर पकड़े गए।

सरकार की सख्ती को क्रैक करने का मास्टर प्लान
सरकार पेपर लीक को लेकर काफी सख्त हो गई थी। केंद्र सरकार के साथ राज्यों की सरकारें भी पेपर लीक पर विशेष रूप से सख्त थी। इसलिए जांच वाले पॉइंट्स को क्रैक कर सॉल्वर बैठाने की प्लानिंग थी। सॉल्वर नहीं पकड़े जाए इसके लिए एंट्री के दौरान जांच करने के लिए जो कंपनी ठेका लेती है। उस कंपनी में माफियाओं ने अपने आदमी की भर्ती करा दिए।
परीक्षा सेंटर पर ही अपने आदमी घुसा दिए, ताकि पेपर की छपाई से लेकर उसके परिवहन, स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों तक वितरण और परीक्षा शुरू होने तक हर स्तर पर कड़ी निगरानी रखी गई।
इस बार ऐसी व्यवस्था की गई थी कि न तो प्रिंटिंग प्रेस से पेपर बाहर निकल सके और न ही परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने से पहले उसकी कॉपी किसी के हाथ लग सके। इसलिए माफियाओं ने सेंटर पर फिंगर प्रिंट लेने और फेस रिकॉग्निशन के लिए अपने आदमी की भर्ती करा दी।
माफिया ने सबसे पहले यह पता लगाया कि इस बार परीक्षा में बायोमीट्रिक सत्यापन का काम किस कंपनी को मिला है। इसके पीछे मंशा इस व्यवस्था में किसी स्तर पर सेंध लगा दी जाए तो असली अभ्यर्थी की जगह दूसरे सॉल्वर को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया जा सकता है।

अब सरकार की तैयारी जानिए
3 मई 2026 को हुए नीट-यूजी परीक्षा का पेपर किसी एग्जाम सेंटर से नहीं बल्कि प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था। इसके बाद केंद्र सरकार ने 21 जून की री-एग्जाम को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानते हुए री-एग्जाम के लिए पूरी रणनीति बदल दी। प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO की सीधी निगरानी में इस बार परीक्षा कराई गई।
PMO की सीधी मॉनिटरिंग और वॉर-रूम
इस बार पेपर सेटिंग से लेकर रिजल्ट तक हर स्टेज की मॉनिटरिंग PMO द्वारा किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोजाना अपडेट दिए गए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई हाई-लेवल मीटिंग में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और एयरफोर्स के अधिकारी शामिल हुए। NTA के री-एग्जाम को लेकर युद्ध स्तर पर तैयारी का आदेश दिया गया।
एयरफोर्स को सौंपी गई लॉजिस्टिक्स की कमान
अब तक नीट के पेपर डाक और सड़क के रास्ते भेजे जाते थे। यह काम विभाग के कर्मचारी करते थे। इस बार सरकार ने भारतीय वायुसेना यानी IAF को जिम्मेदारी दी। प्लान के मुताबिक क्वेश्चन पेपर को प्रिंटिंग प्रेस से सीधे देशभर के 18 एयरफोर्स स्टेशनों और एयरपोर्ट तक एयरलिफ्ट किया गया। एयरपोर्ट और एयरफोर्स स्टेशन से एग्जाम सेंटर तक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर क्वेश्चन पेपर पहुंचाए गए।
पेपर सेटर का लॉकडाउन
पेपर बनाने वाले एक्सपर्ट, ट्रांसलेटर और मॉडरेटर को 21 जून तक एक गुप्त जगह पर लॉकडाउन में रखा गया। उनके मोबाइल, लैपटॉप, इंटरनेट, स्मार्टवॉच सब जब्त कर लिए गए। न किसी से मिल सकते थे, न बाहर संपर्क कर सकते थे। प्रोसेस को कई हिस्सों में बांटा गया ताकि कोई एक व्यक्ति पूरी जानकारी न रख सके।

बिहार में कैसे पहुंचा पेपर
19 जून की रात IAF के विमान से सीलबंद बक्सों में पेपर बिहटा एयरफोर्स स्टेशन और पटना एयरबेस पर लाए गए। DM और SP की निगरानी में जिला स्ट्रॉन्ग रूम बनाए गए। पुलिस और सिविल स्टाफ की निगरानी में इन्हें स्ट्रॉन्ग रूम में शिफ्ट किया गया।
24×7 CCTV, डिजिटल लॉक और बायोमीट्रिक एंट्री की व्यवस्था की गई। पेपर की निगरानी के लिए CRPF की ड्यूटी लगाई गई। पटना से अन्य जिलों में पेपर पहुंचाने के लिए GPS ट्रैकिंग वाली गाड़ियों से पेपर भेजे गए। डाक विभाग को सिर्फ बैकअप में रखा गया।
पहले पेपर 3-4 दिन पहले सड़क के रास्ते से पेपर आता था। इस बार IAF ने 24 घंटे के अंदर डिलीवरी की। किसी भी इंसान के इंवॉल्वमेंट को सीमित कर दिया गया।

कंपनी से मांगा गया पक्ष – नहीं मिला जवाब
भास्कर ने इनोवेटिव कंपनी से बातकर उनका पक्ष जानना चाहा, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। हमने मेल भी किया, लेकिन किसी भी मेल का कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। कंपनी का पक्ष आते ही हम खबर में अपडेट करेंगे।
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री-नीट फर्जीवाड़े की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे एक ऐसे सॉल्वर सिंडिकेट का चेहरा सामने आ रहा है, जिसे MBBS के छात्र चला रहे थे। केंद्र सरकार ने सख्ती बरतकर पेपर लीक होने से तो रोक लिया, लेकिन बिहार में मेडिकल के छात्रों ने NTA की सुरक्षा में सेंध लगा दी। सॉल्वर सिंडिकेट का सरगना मुजफ्फरपुर का अर्पित यादव है। उसने कोटा में पढ़ाई के दौरान तीन दोस्तों के साथ मिलकर गिरोह बनाया था। पूरी खबर पढ़े…

