स्लोवाकिया में डूबे युवक का शव वतन लौटा: अमृतसर के अजनाला का गुरसेवक गरीबी दूर करने को 8 महीने पहले ही वर्क परमिट पर गया था – Amritsar News
बेहतर भविष्य के सपने संजोकर सात समंदर पार गए अमृतसर के अजनाला हलके के अंतर्गत आते गांव वंजावला के 23 वर्षीय युवक गुरसेवक सिंह का पार्थिव शरीर आज स्लोवाकिया से उसके पैतृक गांव पहुंचा। जैसे ही गुरसेवक का पार्थिव शरीर एम्बुलेंस से गांव की दहलीज पर उतरा, मां-बाप की चीखों और परिजनों के विलाप से पूरा माहौल गमगीन हो गया। इस दुखद घड़ी में पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में उमड़े ग्रामीणों ने नम आंखों से लाडले को अंतिम विदाई दी। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, होनहार युवक गुरसेवक सिंह करीब आठ महीने पहले ही अपने परिवार को आर्थिक तंगी से उबारने और अपने उज्ज्वल भविष्य की तलाश में वर्क परमिट पर यूरोपीय देश स्लोवाकिया गया था। लेकिन किसे पता था कि वतन छोड़ने के महज कुछ ही महीनों बाद वहां एक दर्दनाक हादसे में पानी में डूबने से उसकी असमय मौत हो जाएगी। सरकारों और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से लौटा पार्थिव शरीर गुरसेवक की मौत की खबर मिलने के बाद से ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। बेबस परिजनों ने भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई थी कि उनके बेटे का शव कम से कम आखिरी बार देखने के लिए वतन मंगवाया जाए। विभिन्न कूटनीतिक स्तरों और प्रयासों के बाद आखिरकार मौत के कई दिनों बाद गुरसेवक का पार्थिव शरीर आज उसके पैतृक गांव पहुंच सका। ढांढस बंधाने पहुंचे सांसद औजला, पंजाब के हालातों पर जताई चिंता इस अत्यंत दुखद मौके पर अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला भी विशेष रूप से गांव वंजावला पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को गले लगाकर ढांढस बंधाया और गहरी संवेदना व्यक्त की। शोक संतप्त परिवार से मुलाकात के बाद सांसद औजला ने कहा: “एक जवान बेटे का इस तरह असमय दुनिया से चले जाना केवल एक मां-बाप के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए कभी न पूरी होने वाली अपूरणीय क्षति है। आज पंजाब के हजारों नौजवान बेहतर रोजगार और अच्छे भविष्य की उम्मीद में अपनी जमीनों-घरों को दांव पर लगाकर विदेशों का रुख कर रहे हैं, लेकिन जब वहां से इस तरह के हादसों की खबरें आती हैं, तो पूरा पंजाब झकझोर जाता है।” परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा सांसद औजला ने दिवंगत गुरसेवक सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परमात्मा से परिवार को इस असहनीय और पहाड़ी जैसे दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की। उन्होंने पीड़ित परिवार को विश्वास दिलाया कि दुख की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं, सरकार, प्रशासन और वे खुद भविष्य में भी हरसंभव सहायता के लिए सदैव परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
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