सुखबीर बादल का दावा, महाराष्ट्र-सरकार नए कानून पर लगाएगी रोक: तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड विवाद पर शिअद अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की बात – Pathankot News

सुखबीर बादल का दावा, महाराष्ट्र-सरकार नए कानून पर लगाएगी रोक:  तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड विवाद पर शिअद अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से की बात – Pathankot News




तख्त श्री हजूर साहिब (नांदेड़) के प्रबंधन बोर्ड को लेकर महाराष्ट्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए कानून पर सिख समुदाय के भारी विरोध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। शिरोमणि अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बात कर उन्हें इस मुद्दे पर सिख समाज की गहरी चिंताओं और भावनाओं से अवगत कराया है।
सुखबीर बादल का दावा है कि बातचीत के बाद मुख्यमंत्री फड़णवीस ने आश्वासन दिया है कि इस मामले को फिलहाल यहीं रोक (पॉज़) दिया जाएगा। सरकार कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, विभिन्न सिख संगठनों और बुद्धिजीवियों का पक्ष सुनेगी।
इन सभी पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श और गहन चर्चा के बाद ही इस नए कानून के संबंध में आगे कोई कदम उठाया जाएगा। सुखबीर बादल ने इस पूरी बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ये दावा किया है। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल जल्द मिलेगा मुख्यमंत्री से
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार जताते हुए सुखबीर सिंह बादल ने सिख संगत को सूचित किया कि शिरोमणि अकाली दल ने हाल ही में इस विषय पर महाराष्ट्र सरकार को एक पत्र भी लिखा था। उन्होंने कहा कि सिख संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए अकाली दल का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल बहुत जल्द व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात करेगा और इस मामले पर विस्तार से चर्चा करेगा।
हरसिमरत ने लिखा था फडणवीस को पत्र
शिरोमणि अकाली दल की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फड़नवीस से अपील की थी कि वह तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड की स्वायत्ता को बनाए रखें। बादल ने इसे लेकर फड़नवीस को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था कि बोर्ड के स्वरूप में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे सिख समुदाय में रोष है। कांग्रेस के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी इस मामले में आपत्ति जताई थी। 70 साल पुराने कानून को बदलने से पनपा विवाद
तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड विवाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा सिख धर्म के पांच सर्वोच्च तख्तों में से एक, तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब (नांदेड़) के प्रबंधन से जुड़े लगभग 70 साल पुराने कानून को बदलने के फैसले से जुड़ा है। इस विवाद के मुख्य कारण और बिंदु निम्नलिखित हैं: 1. मुख्य विवाद: पुराने कानून को निरस्त करना
महाराष्ट्र सरकार ने ‘नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अचलनगर साहिब अधिनियम, 1956’ को निरस्त करके उसकी जगह एक नया कानून (तख्त श्री हजूर साहिब बिल-2026) लाने का मसौदा तैयार किया है। सिख संगठनों का आरोप है कि सरकार ने यह फैसला सिख संस्थाओं को भरोसे में लिए बिना जल्दबाजी में लिया है। 2. सरकारी नियंत्रण और स्वायत्तता का मुद्दा
सिख समुदाय और शिरोमणि अकाली दल का आरोप है कि नया कानून बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण को बढ़ाएगा। उनका मानना है कि नए प्रावधानों के तहत प्रबंधन बोर्ड में सिख संस्थाओं का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा और सरकार द्वारा नामित (Nominated) सदस्यों की संख्या बढ़ जाएगी, जो सीधे तौर पर गुरुद्वारा प्रबंधन की स्वायत्तता पर हमला है। 3. सिख संस्थाओं के प्रतिनिधित्व में कमी
विवाद का एक बड़ा कारण यह भी है कि नए कानून के लागू होने से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), चीफ खालसा दीवान और सिख सांसदों जैसे पारंपरिक और धार्मिक प्रतिनिधियों की भूमिका बोर्ड में बेहद सीमित हो जाएगी। सिख समुदाय का कहना है कि धार्मिक स्थलों का प्रबंधन पूरी तरह से सिख संगत और उनकी चुनी हुई संस्थाओं के हाथ में होना चाहिए, न कि सरकार के नियंत्रण में। 4. 2024 से जारी तनाव
तख्त हजूर साहिब बोर्ड को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले 2024 में भी महाराष्ट्र सरकार ने 1956 के अधिनियम में संशोधन की कोशिश की थी, जिसका चौतरफा विरोध हुआ था। वर्तमान विवाद तब गहराया जब सरकार ने पुराने अधिनियम को पूरी तरह से निरस्त करने का मन बना लिया, जिसके बाद तख्त के जत्थेदार और ‘पांच प्यारों’ ने इसके खिलाफ ‘गुरमता’ (धार्मिक आदेश) भी जारी किया। मौजूदा स्थिति: सिख समाज के भारी विरोध, एसजीपीसी की चेतावनियों और सुखबीर सिंह बादल की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर हुई बातचीत के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने फिलहाल इस कानून की प्रक्रिया को रोक दिया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि सिख विद्वानों और संस्थाओं से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा।



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