लुधियाना-पूर्व अकाली MLA शिवालिक ‘वारिस पंजाब दे’ में शामिल: कहा-पंथ की रक्षा के लिए जुड़ा; अयाली बोले-सुखबीर निजी हित छोड़ें तो एकजुटता संभव – Ludhiana News
पंजाब की सियासत में हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल को लुधियाना में एक बड़ा झटका लगा है। गिल हलके से पूर्व विधायक (MLA) दर्शन सिंह शिवालिक ने अब वारिस पंजाब दे का दामन थाम लिया है। रविवार को लुधियाना में हुए एक कार्यक्रम के दौरान अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और नेता मनप्रीत सिंह अयाली की मौजूदगी में शिवालिक को शामिल करवाया गया। इस दौरान मनप्रीत अयाली ने पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल पर बड़ा सियासी हमला बोला है। दो मुख्य नीतियों के साथ जुड़ाव: पूर्व विधायक दर्शन सिंह शिवालिक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्य रूप से दो बड़े लक्ष्यों को लेकर यह फैसला लिया है। पहला-पंजाब के नौजवानों को नशे की दलदल से बाहर निकालना और दूसरा- पंथ की रक्षा करना। अकाली दल पर गंभीर आरोप: शिवालिक ने अपनी पुरानी पार्टी अकाली दल पर जमकर भड़ास निकाली। उनके करीबियों का कहना है कि पार्टी में लंबे समय से उन्हें बनता सम्मान नहीं मिल रहा था, जिसके चलते उन्होंने अकाली दल छोड़ने का मन बनाया। शिवालिक ने यह भी आरोप लगाया कि अकाली दल के ही कई नेता ऐसे हैं जो नहीं चाहते कि पार्टी जिंदा रहे। अयाली का सुखबीर बादल को सीधा संदेश: कार्यक्रम में मौजूद मनप्रीत सिंह अयाली ने अकाली दल की अंदरूनी कलह पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा,अकाली दल आज भी एक ही है। अगर सुखबीर सिंह बादल अभी भी अपने निजी फायदों और स्वार्थ को छोड़ दें, तो हम सब दोबारा एक हो सकते हैं। अयाली का यह बयान अकाली दल (बादल) के नेतृत्व पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। सम्मान की कमी और पंथ का दर्द लंबे समय से गिल विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे दर्शन सिंह शिवालिक का पार्टी छोड़ना अकाली दल के लिए जमीनी स्तर पर एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। शिवालिक का कहना है कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना जीवन लगाया, वहां उनके समर्पण की कद्र नहीं हो रही थी। उन्होंने अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए कहा कि अब उनका एकमात्र उद्देश्य पंथ को बचाना और युवाओं को सही रास्ते पर लाना है। मनप्रीत अयाली के बयान के निकाले जा रहे सियासी मायने इस जॉइनिंग से ज्यादा चर्चा मनप्रीत सिंह अयाली के बयान की हो रही है। अयाली का इस कार्यक्रम में मौजूद रहना और सीधे तौर पर सुखबीर सिंह बादल को निशाने पर लेना यह साफ करता है कि अकाली दल के भीतर बागी सुर अब पूरी तरह से मुखर हो चुके हैं। अयाली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंथ और पार्टी को बचाने के लिए निजी स्वार्थों की बलि देनी ही होगी। उनके इस बयान को भविष्य में अकाली दल के धड़ों के एकजुट होने की एक शर्त के रूप में भी देखा जा रहा है। दिनों-दिन हमारा काफिला बड़ा होता जा रहा है। रोज़ ही जो लोग जुड़ रहे हैं, जो अच्छी छवि वाले नेता हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी में हों वे आज ‘अकाली दल वारिस पंजाब’ में शामिल हो रहे हैं। बहुत सारे ऐसे कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं जो पंथक सोच वाले थे, वे सभी निराश थे। पिछले समय से, क्योंकि पहले ये सभी अकाली दल के साथ ही जुड़े हुए थे। लेकिन पिछले समय में जो कुछ कारण बने और जो घटनाएं घटीं… पंथक मसलों को लेकर, किसानी मुद्दों को लेकर इस कारण हर वर्ग पार्टी से निराश हो गया था। इसी कारण आज जो लोग दूसरी पार्टियों में चले गए थे, लेकिन चाहते थे कि वे एक पंथक पक्ष के लिए काम करें, वे सभी अब ‘अकाली दल वारिस पंजाब’ के साथ जुड़ रहे हैं।” विधानसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर: सभी सीटों पर लड़ेंगे जी, अब हम 117 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। देखिए, यह जो पार्टी है यह हर सीट पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन जो कुछ पंथक जत्थेबंदियां (संगठन) हैं, जो पंथ को समर्पित हैं उनके साथ भी हमारी बातचीत चल रही है और उस आधार पर पंथक एकता भी हो सकती है। अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह बोले : जैसा कि आपको पता ही है कि अकाली दल (वारिस) को पंजाब में बहुत बड़ा समर्थन मिल रहा है। हर जगह पर जो टकसाली लीडर (पारंपरिक नेता) हैं, जो पंजाब और पंथ से प्यार करने वाले हैं, उनकी एक बहुत लंबी लाइन है जो अकाली दल वारिस पंजाब के साथ जुड़ना चाह रहे हैं। कल भी फरीदकोट या दोराहे के पास समराला में एक नौजवान जो बहुत बुलंद हौसले वाले हैं, वो अपने साथियों और बड़े जत्थे समेत हमारे साथ शामिल हुए हैं आज जो हमारे बहुत ही सीनियर अकाली नेता हैं, जिनका बहुत लंबा राजनीतिक सफर रहा है, जो दो बार विधायक (MLA) रह चुके हैं—दर्शन सिंह जी शिवालिक—वो आज हमारे साथ आ रहे हैं। इसका मतलब है कि पूरे पंजाब के लोग अब जान चुके हैं कि केवल एक ही क्षेत्रीय पार्टी है जो पंजाब और पंथ को बुलंदी (चढ़दी कला) की ओर ले जा सकती है। हम इनका भी तहे दिल से धन्यवाद करते हैं। ईयाली साहब का बहुत धन्यवाद करते हैं जिन्होंने सबसे पहले पहल की। आज बड़े स्तर पर हमारे पास इतनी बड़ी लिस्ट है कि हमारी पहुँच से बाहर हो रही है लोग हमसे समय मांग रहे हैं कि हमें शामिल होना है। इससे लगता है कि अब पंजाब के लोग जाग चुके हैं, और समझ चुके हैं कि एक क्षेत्रीय पार्टी के बिना हम पंजाब और पंथ को नहीं बचा सकते। राष्ट्रीय पार्टियों और पुरानी लीडरशिप पर निशाना: केंद्र से चलने वाली जितनी भी पार्टियां हैं, उन्होंने हमेशा पंजाब के साथ बड़े-बड़े धोखे किए हैं—चाहे वो पंजाब के अधिकारों की बात हो, पानी का मसला हो या राजधानी का। पंजाब के मसलों को सुलझाने के बजाय और उलझाकर हमारे हक छीने गए हैं। इसके अलावा जो हमारा पुराना अकाली दल था, जो हमेशा पंथ और पंजाब की बात करता था, वो भी अपने सिद्धांतों को काफी लंबे समय से छोड़ चुका था, जिसके कारण एक बहुत बड़ा खालीपन आ गया था।” दीप सिद्धू और अमृतपाल सिंह का ज़िक्र: जब दीप सिद्धू यहाँ आए, तो उन्होंने भी किसान आंदोलन के दौरान किसान नेताओं से कहा था कि यह लड़ाई सिर्फ फसलों की नहीं, बल्कि हमारी नस्लों और हमारे अस्तित्व (होंद) का मसला है, इसलिए हमें जागना चाहिए। जब सरकार द्वारा उन्हें शहीद कर दिया गया, तो उसके बाद अमृतपाल को यह ज़िम्मेदारी मिली। उन्होंने भी दुबई से आकर नौजवानों को साथ लेकर बड़े स्तर पर ‘खालसा वहीर’ शुरू की, नौजवानों को नशों से निकाला और उन्हें अपने इतिहास व विरासत से जोड़ा। नौजवानों ने उनकी बात मानी और नशा छोड़कर एक अच्छा गुरसिखी वाला जीवन अपनाया। लेकिन हमारी सरकारों को यह बात ठीक नहीं लगी। उन पर और उनके साथियों पर NSA लगाकर उन्हें डिब्रूगढ़ (असम) या पंजाब की जेलों में डाल दिया गया। पंजाब में दहशत और नफरत भरा माहौल पैदा करने की कोशिश की गई, ताकि कोई पंजाब की बात न कर सके। वरना उनकी गिरफ्तारी कोई बड़ी बात नहीं थी, उन्होंने खुद भी कहा था कि हम गिरफ्तारी चाहते हैं। कौम की वापसी और भाईचारे का संदेश: पर पंजाब के लोग बड़े हौसले वाले हैं। गुरु साहब ने हमेशा ज़ुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए खालसा पैदा किया है। लोकसभा चुनाव में सारी कौम ने इकट्ठे होकर उन्हें (अमृतपाल सिंह को) पंजाब से सबसे बड़ी लीड से जिताया। इससे साबित होता है कि पंजाब के लोगों ने अपना लीडर ढूंढ लिया है। आज हम सभी धर्मों और समुदायों को विश्वास दिलाते हैं कि हमारा मकसद गुरु साहब की सोच “सरबत दा भला” (सबका भला) है। ‘मानस की जात सबै एकै पहचानबो’ के सिद्धांत पर चलते हुए हम सभी धर्मों का सत्कार करते हैं। हमारी किसी से कोई नफरत नहीं है। पंजाब हम सबका है, और हम सब पंजाब के वारिस हैं। बहुत से बड़े लीडर हमारे संपर्क में हैं। नौजवान तो पहले से ही हमारे साथ थे, लेकिन कुछ भ्रांतियां फैलाई जा रही थीं। पर जब ईयाली साहब जैसे बड़े लीडर आ गए, तो लोगों की सारी शंकाएं दूर हो गईं और अब लोग बड़ी संख्या में इस पार्टी से जुड़ रहे हैं।
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