मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक: विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए, रिजिजू बोले- संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं

मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक:  विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए, रिजिजू बोले- संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं




मानूसन सत्र से एक दिन पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में हो रही है। मीटिंग में कांग्रेस, सपा, टीएमसी, DMK सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कर रहे हैं। सरकार मीटिंग में अपने एजेंडे की जानकारी देगी, जबकि विपक्ष NEET और राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला उठाएगा। मीटिंग से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा- हम सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि संसद के सुचारु संचालन में सहयोग करें। संसद सभी की है, हंगामे से किसी का फायदा नहीं। 25 दिन का मानसून सत्र, 19 बैठकें होंगी; 7 बिल आएंगे संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। मोदी सरकार इस दौरान 7 बिल पेश करने वाली है। इनमें वंदे मातरम, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से जुड़ा संशोधन विधेयक और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल शामिल है। 18वीं लोकसभा का 9वां संसदीय सत्र यानी मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा। 25 दिन के सेशन के दौरान लोकसभा-राज्यसभा में कुल 19 बैठकें होंगी। सत्र के पहले ही दिन से हंगामा होने के आसार हैं। विपक्ष NEET-UG पेपर लीक, SIR, महंगाई, राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। पहले जानते हैं उन 7 बिलों के बारे में, जो पेश होंगे विपक्ष एथेनॉल और पेपर लीक पर घेरने को तैयार कांग्रेस की संसदीय दल की 16 जुलाई की बैठक के बाद इसके संकेत मिले थे कि पार्टी मोदी सरकार को कई बड़े मुद्दों पर घेरेगी। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को कहा था कि कांग्रेस संसद में चढ़ावा चोरी, पेपर लीक, एथेनॉल मुद्दा, भ्रष्टाचार, महंगाई और विदेश नीति की नाकामियों पर सरकार से जवाब मांगेगी। सरकार परिसीमन बिल ला सकती है, लेकिन कुछ बिल अटके सरकार ने संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इनमें 30 दिन जेल में रहे तो PM-CM को हटाने वाला बिल, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, एक देश-एक चुनाव बिल, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान संशोधन बिल का जिक्र नहीं है। 1. 30 दिन जेल में रहे तो PM-CM को हटाने वाला बिल: मानसून सत्र में आना मुश्किल। वजह- यह अभी संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास विचाराधीन है। JPC ने 17 जुलाई को बैठक में अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट टाल दी। JPC ने पांच सिफारिशें दी हैं। समिति की अध्यक्ष बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी का कहना है कि इस पर और चर्चा की जरूरत है। 2. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक: इस बिल के भी मानसून सत्र में पेश होने की संभावना कम है। वजह- जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी इस पर विचार कर रही है। समिति ने 17 जुलाई को मीटिंग बिल से जुड़े तीन अहम कानूनों पर अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया। समिति का कहना है कि संबंधित पक्षों यानी स्टेकहोल्डर्स के साथ और बातचीत की जरूरत है। 3. एक देश-एक चुनाव बिल: इस बिल को भी संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है। अभी कई पक्षों से बातचीत करना बाकी है। इसलिए मानसून सत्र में इसे भी पेश किए जाने की संभावना कम है। 4. परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल: ये बिल सरकार कभी भी ला सकती है। सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत, लेकिन फिलहाल उसके पास बहुमत नहीं है। परिसीमन से जुड़ा बिल लाने सरकार नंबर जुटाने में लगी, समझें कैसे करेगी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार DMK और शरद पवार की पार्टी को साथ लाने की कोशिश कर रही है। DMK के साथ परिसीमन से जुड़े आश्वासनों को संविधान संशोधन विधेयक में लिखित रूप से शामिल करने पर सहमति बनाई है। बिलों को पास करवाने के लिए सदन की मौजूदा संख्या के आधार पर सरकार को दोनों सदनों में दो-तिहाई सासंदों यानी लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 161 सांसदों का समर्थन चाहिए। विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल और परिसीमन संशोधन संविधान 2026 बिल लोकसभा में रखा गया था। जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण ये बिल पारित नहीं हो सके थे। बिल पास कराने के लिए सरकार का गुणा-भाग लोकसभा: सरकार के पास 2 विकल्प 42 सांसद और जुटाने होंगे: विपक्ष के 42 सांसद टूट, विलय या समर्थन से एनडीए में शामिल हों या अलग गुट बनाकर समर्थन करें। विपक्ष के सांसद गैरहाजिर रहें: ऐसा करने से संसद में प्रभावी सदस्य संख्या घट जाएगी। फिर दो-तिहाई आंकड़ा 318 पर आ जाएगा। इसके लिए सपा (37), डीएमके (22), एनसीपी-शरद (8) और टीएमसी (8), यानी कुल 75 सांसदों में से 62 को गैरहाजिर कराना होगा। 7 निर्दलीय और छोटी पार्टियों के 10 सांसदों पर भी नजर है। जरूरत पड़ी तो कांग्रेस (98) के भी कुछ सांसदों को गैरहाजिर रखने का प्रयास हो सकता है। राज्यसभा: सरकार के पास 2 विकल्प 11 सदस्य और जुटाने होंगे: राज्यसभा में अभी प्रभावी सदस्य संख्या 244 (1 सीटें खाली) है। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 163 है। सरकार/एनडीए के पास 152 सदस्य हैं। ऐसे में उसे 11 और सदस्यों का समर्थन, दल-बदल या अन्य सहयोग के जरिए जुटाना होगा। विपक्ष के सदस्य गैरहाजिर रहें: अगर मतदान के दौरान विपक्ष या अन्य दलों के सदस्य गैरहाजिर रहते हैं तो प्रभावी सदस्य संख्या घट जाएगी और दो-तिहाई का आंकड़ा भी नीचे आ जाएगा। मौजूदा गणित के हिसाब से सरकार के 152 वोट पर्याप्त होने के लिए कम से कम 16 सदस्यों का गैरहाजिर रहना जरूरी होगा। TMC, AAP और UBT में टूट, लोकसभा-राज्यसभा में सीटिंग बदलेगी मानसून सत्र में सीटिंग अरेंजमेंट पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी, क्योंकि हाल के महीनों में TMC , AAP और उद्धव की शिवसेना में टूट से समीकरण बदले हैं। सीटिंग अरेंजमेंट लोकसभा-राज्यसभा सचिवालय सेशन शुरू होने के पहले करता है। लोकसभा में एनडीए के 2 साल में 19 सांसद बढ़े राज्यसभा में एनडीए के 40 सांसद बढ़े



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