पठानकोट में वकीलों की हड़ताल से 2200 केस अटके: एडवोकेट पर दर्ज केस पर बार एसोसिएशन उग्र; सोमवार को भी ‘नो वर्क डे’ – Pathankot News

पठानकोट में वकीलों की हड़ताल से 2200 केस अटके:  एडवोकेट पर दर्ज केस पर बार एसोसिएशन उग्र; सोमवार को भी ‘नो वर्क डे’ – Pathankot News




एडवोकेट पर केस दर्ज किए जाने के विरोध में जिला बार एसोसिएशन के आह्वान पर वकील अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। लगातार तीसरे दिन वकीलों ने शनिवार को भी कोर्ट में ‘नो वर्क’ कर अदालती कामकाज को पूरी तरह ठप्प रखा। बार एसोसिएशन ने ऐलान किया कि फिल्हाल सोमवार को भी अदालत में कामकाज नहीं होगा। बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष दर्शन सिंह सहित अन्य वकीलों का कहना है कि एडवोकेट ज्योतिपाल भीम के खिलाफ पुलिस ने बिना किसी ठोस सबूत और उचित जांच के एफआईआर दर्ज की है, जो कि बिल्कुल गलत है। केस की पैरवी करने वाले वकीलों को पुलिस ने टारगेट करना शुरू कर दिया है, जो पूरी तरह अनुचित है। इस केस में वकील की कोई गलती नहीं है। एसोसिएशन का कहना है कि वरिष्ठ वकीलों का डेलिगेशन जल्द ही एसएसपी पठानकोट से मिलकर उन्हें मांगपत्र सौंपेगा। मामले की जानकारी पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल के चेयरमैन को भी भेज दी गई है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने सहयोग नहीं किया और झूठी एफआईआर रद्द नहीं की गई, तो राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। 3 दिन में 2200 केस प्रभावित
जानकारी के मुताबिक वकीलों ने लगातार तीसरे दिन भी कामकाज ठप रखा। जिससे पठानकोट की जिला एवं सेशन डिवीजन में 14 कोर्ट के कामकाज पूरी तरह बंद रहा। इस हड़ताल के चलते 3 दिन में लगभग 22 सौ से ज्यादा केसों में अगली तारीख दे दी गई है। जिससे तेज गर्मी में दूर-दराज से तारीख पर आए लोगों को बैरंग वापिस लौटना पड़ा। वहीं, वकीलों का साफ कहना है कि यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक पुलिस इस झूठी एफआईआर को रद्द करने की मांग पूरी नहीं करती। इस संबंध में सोमवार को होने वाली बैठक में आगामी रणनीति और अगली कार्रवाई पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। ऐसी कार्रवाई से अपराधियों के खिलाफ केस नहीं लड़ सकेंगे वकील
एडवोकेट ज्योति पाल भीम ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस केस में उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है। उसमें एक युवक ने आत्महत्या की है। उक्त युवक पर किसी महिला से अश्लील हरकतें करने का आरोप था। उसे अदालत ने जमानत नहीं दी तो उसने आत्महत्या कर ली और उलटा पीड़ित पक्ष के साथ उन पर भी प्रताड़ित करने के झूठे आरोप लगा दिए। वहीं, पुलिस ने मामले की तह तक जाने की बताए उनपर मामला दर्ज कर दिया। ज्योतिपाल ने कहा कि जब अपराधियों के खिलाफ केस लड़ने पर वकीलों को ही संगीन केसों में फंसा दिया जाएगा, तो कोई भी वकील स्वतंत्र ढंग से अपना काम नहीं कर सकेगा। उन्होंने मांग की कि पुलिस इस मामले में दोबारा से निष्पक्ष जांच करे और दर्ज केस को तुरंत वापस लिया जाए। हड़ताल में काम करने वाले वकीलों पर होगी कार्रवाई
एसोसिएशन में साफ किया है कि यदि जिला बार एसोसिएशन का कोई भी सदस्य हड़ताल के नियमों का उल्लंघन कर अदालत में पेश होता है, तो उस पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। नियम तोड़ने वाले वकील के बार एसोसिएशन में वोट देने के अधिकार को भी हमेशा के लिए रद्द (सस्पेंड) किया जा सकता है। हड़ताल को सुचारू रूप से चलाने के लिए विभिन्न अदालतों के लिए एक ‘प्रॉक्सी काउंसिल’ की सूची जारी की गई है, जिसकी कमान एडवोकेट विक्रमजीत राय को सौंपी गई है।



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