पठानकोट में बिजली-पानी को लेकर धरना-प्रदर्शन: महिलाएं बोलीं- हमें ₹1 हजार नहीं चाहिए, मूल जरूरतें पूरी हो; बूंद-बूंद को तरसे – Pathankot News

पठानकोट में बिजली-पानी को लेकर धरना-प्रदर्शन:  महिलाएं बोलीं- हमें ₹1 हजार नहीं चाहिए, मूल जरूरतें पूरी हो; बूंद-बूंद को तरसे – Pathankot News




पठानकोट में शाहपुरकंडी के गांव थड़ा उपरला में पानी और बिजली की किल्लत को लेकर आज पूरा गांव सड़कों पर उतर आया। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान ग्रामीणों का सब्र आखिरकार टूट गया। महिलाओं और बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में लोगों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान महिलाओं ने बिजली विभाग, जलापूर्ति विभाग के एसडीओ और एक्सईएन के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने धरना समाप्त कराने के लिए महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने पर अड़ी रहीं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। महिलाएं पानी के लिए मीलों भटकने को मजबूर धरने पर बैठीं धार ब्लॉक की बीडीसी मेंबर लक्ष्मी देवी ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिन-ब-दिन गर्मी बढ़ती जा रही है और महिलाएं पानी के लिए मीलों भटकने को मजबूर हैं। जेई और एसडीओ समेत संबंधित विभागों को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकारें बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन लोगों की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। हमें हजार-हजार रुपए के चुनावी लाभ नहीं चाहिए, बल्कि हमारी मूल जरूरतें पानी और बिजली हले पूरी की जानी चाहिए। वादे हजार पर बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पिछले आठ-दस वर्षों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। स्थिति यह है कि लोगों को हर 5 से 7 दिन के अंतराल पर ही जलापूर्ति मिल पाती है। इस भीषण गर्मी में पीने के पानी के साथ-साथ दैनिक जरूरतों के लिए भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। विभाग का कहना है कि गांव के लिए 25 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं, जो पहले आंकड़ा विभाग और अब वित्त विभाग के पास लंबित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, एक महीने से फाइल केवल टेबल से टेबल तक घूम रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ है। बिजली गुल, पानी गायब… दोहरी मार झेल रहा गांव ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि गांव में दोहरी मार पड़ रही है। रातभर बिजली कट लगने के कारण लोग सो नहीं पा रहे हैं, जबकि दिन में जब कभी पानी आने की उम्मीद होती है, तो बिजली गुल हो जाती है। पिछले एक हफ्ते से बिजली और पानी की स्थिति और भी खराब हो गई है। ग्रामीणों ने अपने पैसों से साफ कराया कुआं स्थानीय निवासी दीप सिंह ने बताया कि गांव में करीब 30-40 साल पुराना एक कुआं है, जिसमें प्राकृतिक और साफ पानी उपलब्ध है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाने के बाद थक-हारकर अपनी जेब से 40-50 हजार रुपए जुटाकर उस कुएं की सफाई करवाई। हालांकि, अब बिजली विभाग उसकी मोटर के कनेक्शन के लिए एक लाख रुपए की सिक्योरिटी राशि मांग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब लोग इतनी बड़ी रकम का इंतजाम कहां से करें। ग्रामीणों की मुख्य मांगें: ग्रामीणों का अल्टीमेटम प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कहा है कि वे अब खोखले आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं। जब तक प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर आकर जिम्मेदारी नहीं लेता और वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत शुरू नहीं करता, तब तक गांव का यह धरना-प्रदर्शन रात-दिन जारी रहेगा।



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