पंजाब रोडवेज कर्मचारी मानसून सत्र में करेंगे भूख हड़ताल: मुख्यमंत्री आवास पर भी प्रदर्शन, 4 साल से लंबित मांगें, 70 बैठकों के बाद भी नतीजा शून्य – Batala News

पंजाब रोडवेज कर्मचारी मानसून सत्र में करेंगे भूख हड़ताल:  मुख्यमंत्री आवास पर भी प्रदर्शन, 4 साल से लंबित मांगें, 70 बैठकों के बाद भी नतीजा शून्य – Batala News




पंजाब रोडवेज़ पनबस/PRTC कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब ने सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष को और तेज़ करने का ऐलान किया है। यूनियन ने आगामी मानसून सत्र के दौरान भूख हड़ताल करने और मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर धरना देने की घोषणा की है। यह जानकारी यूनियन के स्टेट एडवाइज़र प्रदीप पंडित ने 27 जुलाई को बटाला डिपो के मुख्य गेट पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। प्रदीप पंडित ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए बताया कि मांगों को लेकर अब तक सरकार के साथ 70 बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के तुरंत बाद एक कैबिनेट सब-कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह कमेटी किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकी है और कर्मचारियों की मुख्य मांगें लंबित हैं। 800 बसें बंद, प्राइवेट कंपनियों को रूट देने और टाइम-टेबल घोटाले का आरोप यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पंजाब रोडवेज़ की लगभग 800 बसें बंद हो चुकी हैं और विभाग को एक भी नई बस उपलब्ध नहीं कराई गई है (केवल 696 बसें देने के वादे किए जा रहे हैं)। उन्होंने कहा कि सरकारी बसों के रूट एक-एक करके प्राइवेट कंपनियों को सौंपे जा रहे हैं और टाइम-टेबल में बड़े स्तर पर घोटाले किए जा रहे हैं, जिससे विभाग को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। पक्का करने पर नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ, आउटसोर्स भर्ती में भ्रष्टाचार का दावा स्टेट एडवाइज़र ने स्पष्ट किया कि कच्चे/अनुबंध कर्मचारियों को पक्का करने से सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा, फिर भी इस मांग को पूरा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने रिश्वत लेकर आउटसोर्स आधार पर भर्तियां करने का गंभीर आरोप लगाया और कहा कि पनबस के वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के पक्के सबूत होने के बावजूद सरकार ने कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। प्राइवेट किलोमीटर बसों को बढ़ावा और कर्मचारियों पर दर्ज मामले यूनियन ने कहा कि किलोमीटर स्कीम की बसों से होने वाले घाटे के प्रति सरकार को पहले ही आगाह किया गया था, लेकिन आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया। कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए उन पर गैर-कानूनी तरीके से 8 मामले दर्ज कर उन्हें जेलों में डाला गया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े कॉर्पोरेट घराने की प्राइवेट किलोमीटर बसें लाई गईं। वर्तमान में अधिकारियों की मिलीभगत से विभाग की लगभग 400 कॉमन ओनरशिप वाली बसों और 35 वोल्वो बसों के स्पेयर पार्ट्स, टायर और बैटरियां निकालकर प्राइवेट बसों को चलाकर फायदा पहुँचाया जा रहा है। राज्य बना हड़तालों का अखाड़ा यूनियन ने सरकार के उन दावों की हवा निकाली जिसमें हर वर्ग को खुशहाल बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि आज पूरा पंजाब हड़तालों और प्रदर्शनों का अखाड़ा बन चुका है। यदि सरकार ने समय रहते कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं किया, तो आगामी मानसून सत्र में उग्र आंदोलन किया जाएगा।



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