नूरमहल में आवारा कुत्तों से दहशत, कई को काट चुके: शहरवासियों ने नगर कौंसिल और पंजाब सरकार से समाधान की मांग की – Nakodar News
जालंधर के ऐतिहासिक शहर नूरमहल और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी जी का जंजाल बन चुकी है। शहर के मुख्य बाजारों, रिहायशी कॉलोनियों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर सुबह से लेकर रात तक आवारा कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड डेरा जमाए रहते हैं, जिससे स्थानीय लोगों का सड़कों पर निकलना दुश्वार हो गया है। इन आवारा और हिंसक हो रहे कुत्तों के कारण सबसे ज्यादा डर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में देखा जा रहा है। राहगीरों पर अचानक हमला करने और उन्हें काटने की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। रात के समय स्थिति और भी भयानक हो जाती है, जब ये कुत्ते मुख्य सड़कों से गुजरने वाले साइकिल और दोपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ पड़ते हैं। कुत्तों से खुद को बचाने के चक्कर में कई वाहन चालक अपना संतुलन खो बैठते हैं और गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। गंदगी और बीमारियों का बढ़ रहा खतरा आवारा कुत्तों की इस समस्या ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी पूरी तरह चरमरा दिया है। ये जानवर सड़कों और चौकों पर बिखरे कूड़े-कचरे के ढेरों को खंगालकर पूरी सड़क पर फैला देते हैं, जिससे चारों तरफ गंदगी का माहौल बना रहता है। सड़कों पर कुत्तों की गंदगी (मल-मूत्र) के कारण पैदल चलने वाले राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों को डर है कि इस गंदगी के कारण शहर में कोई भयंकर संक्रामक बीमारी पैर न पसार ले। नगर कौंसिल और सरकार के खिलाफ रोष, जल्द कार्रवाई की मांग प्रशासन की इस ढुलमुल कार्यप्रणाली को लेकर शहरवासियों में नगर कौंसिल और पंजाब सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश और विरोध देखा जा रहा है। स्थानीय समाजसेवियों और नागरिकों ने सरकार से इस गंभीर समस्या का तत्काल और स्थायी हल निकालने की पुरजोर मांग की है। शहर के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी (Sterilization) करवाई जाए, ताकि इनकी बढ़ती आबादी पर रोक लग सके।इन कुत्तों को रिहायशी इलाकों से हटाकर किसी सुरक्षित स्थान या डॉग शेल्टर में स्थानांतरित करने की मुकम्मल व्यवस्था की जाए। निवासियों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे आने वाले दिनों में उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। जब तक प्रशासन कोई कदम नहीं उठाता, तब तक विशेषकर रात के समय दोपहिया वाहन चलाते वक्त सतर्क रहें और बच्चों को गलियों में अकेले न छोड़ें।
Source link

