दावा- राहुल की स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ खर्च: कांग्रेस बोली- रिजिजू बदनामी फैलाने वाले मंत्री बने; ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से ध्यान भटकाना चाहते हैं

दावा- राहुल की स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ खर्च:  कांग्रेस बोली- रिजिजू बदनामी फैलाने वाले मंत्री बने; ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से ध्यान भटकाना चाहते हैं


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2 मिनट पहले

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किरेन रिजिजू विकसित भारत संकल्प सम्मेलन में शामिल होने अंडमान गए थे।

कांग्रेस और भाजपा के बीच ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर चल रही राजनीतिक जंग अब राहुल गांधी की स्कूबा डाइविंग तक पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दावा किया कि राहुल गांधी की अंडमान में की गई स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ खर्च किए गए थे।

इस बयान के बाद कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोमवार को रिजिजू पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अब “मानहानि मंत्री” की भूमिका अपना ली है।

टैगोर ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री का बयान तथ्यों से परे है। उनका मकसद अंडमान-निकोबार में पर्यटन को हतोत्साहित करना है। या फिर वे ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवालों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं।

किरेन रिजिजू और राहुल गांधी की स्कूबा डाइविंग की 2 तस्वीरें…

5 जून को राहुल गांधी ने 16 मिनट का स्कूबा डाइविंग का वीडियो शेयर किया था।

5 जून को राहुल गांधी ने 16 मिनट का स्कूबा डाइविंग का वीडियो शेयर किया था।

20 जून को किरेन रिजिजू ने अपनी स्कूबा डाइविंग का वीडियो शेयर किया। वे स्वराज द्वीप पर गए थे।

20 जून को किरेन रिजिजू ने अपनी स्कूबा डाइविंग का वीडियो शेयर किया। वे स्वराज द्वीप पर गए थे।

तारीखों में देखें विवाद कैसे बढ़ा…

  • 5 जून: राहुल का आरोप- सरकारी नक्शों से कोरल रीफ हटा दी गईराहुल गांधी ने 16 मिनट का एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि वे भारत के सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा पॉइंट पर गए। दुनिया की सबसे शानदार कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) के बीच गोता लगाया। राहुल ने आरोप लगाया आदिवासी समुदाय की जमीन ‘वन अधिकार अधिनियम’ का उल्लंघन करके छीनी जा रही है। 1.5 करोड़ पेड़ काटे जा रहे हैं। सरकारी नक्शों से कोरल रीफ को हटा दिया गया है। जिस इलाके की बात हो रही है, वह नई दिल्ली से लगभग 4 गुना बड़ा है।
  • 20 जून: किरेन रिजिजू का दावा- राहुल की स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ खर्च हुएअंडमान में एक इवेंट में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि उस एक स्कूबा डाइविंग के पीछे 26 करोड़ रुपए खर्च किए गए। पूरे इकोसिस्टम ने उस खबर को फैलाया, उस स्कूबा डाइविंग को समुद्री जीवन और पर्यावरण से जोड़ा। इस तरह का प्रोपेगैंडा फैलाया गया। लेकिन अब लोग सब कुछ जानते हैं। आप सत्ता में नहीं आ सकते, तो आप देश की तरक्की, संपत्ति और हमारे भविष्य को क्यों बर्बाद करना चाहते हैं?
  • 22 जून: कांग्रेस ने पूछा- केंद्रीय मंत्री गलत जानकारी क्यों फैला रहेकांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने X पर एक पोस्ट में लिखा- रिजिजू ने शायद एक नया पोर्टफोलियो संभाल लिया है, जो ‘बदनामी फैलाने वाले मंत्री’ का है। उनका दावा कि राहुल गांधी की स्कूबा डाइविंग पर 26 करोड़ खर्च हुए, बेतुका है। क्या अब हमें यह मान लेना चाहिए कि अंडमान में डाइविंग करने वाला हर पर्यटक करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है? एक केंद्रीय मंत्री ऐसी गलत जानकारी क्यों फैला रहे हैं?

क्या है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट

भारत सरकार के मुताबिक यह लगभग ₹90,000 करोड़ की बहुउद्देश्यीय परियोजना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और एक नया टाउनशिप बनाने की योजना है। सरकार का कहना है कि यह भारत की समुद्री सुरक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति के लिए जरूरी है।

सरकार इसे महत्वपूर्ण मानती है क्योंकि ग्रेट निकोबार दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक मलक्का स्ट्रेट में एंट्री एरिया के बेहद करीब है। यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण रूट है।

भारत का बड़ा हिस्सा कंटेनर ट्रांसशिपमेंट अभी भी विदेशी बंदरगाहों जैसे सिंगापुर, कोलंबो और पोर्ट क्लांग से होकर गुजरता है। सरकार चाहती है कि यह कारोबार भारत में आए।

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