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- PSIEC Plot Scam Raid | ED Statement On Former Minister Sunder Sham Arora
पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के घर सहित 14 ठिकानों पर कार्रवाई के पश्चात ईडी ने एक वक्तव्य जारी किया है। ईडी ने आरोप लगाते हुए बताया कि मार्च 2017 से सितंबर 2021 तक पंजाब के उद्योग और वाणिज्य मंत्री रहने के बीच सुंदर शाम अरोड़ा ने पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज
ईडी ने बताया कि आय से ज्यादा संपत्ति और स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन के महंगे इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन में धांधली की छानबीन करते हुए बड़ी कार्रवाई की है।
जालंधर जोनल ऑफिस की ईडी टीम ने 2 और 3 नवंबर 2026 को पंजाब और चंडीगढ़ में 14 ठिकानों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत छापेमारी की थी।
पूर्व मंत्री के घर 42 घंटे तक चली छापेमारी
ईडी ने जानकारी दी कि होशियारपुर स्थित पूर्व उद्योग मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुंदर शाम अरोड़ा के रिहाइशी आवास पर ईडी का सर्च ऑपरेशन लगातार 42 घंटे तक चला। इसके साथ ही उनके बेटे प्रतीक अरोड़ा, सहयोगियों के ठिकानों, होशियारपुर स्थित शिवम हॉस्पिटल और चंडीगढ़-मोहाली में SRG बिल्डर्स, GRG डेवलपर्स व गुलमोहर टाउनशिप से जुड़ी कंपनियों के दफ्तरों पर भी कार्रवाई की गई।
सुंदर शाम अरोड़ा पर 2 बड़े मामले
मोहाली में इंडस्ट्रियल प्लॉट ट्रांसफर का प्रकरण
पहला प्रकरण पंजाब स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन (PSIEC) के एक औद्योगिक प्लॉट को रियल एस्टेट फर्म को ट्रांसफर करने से जुड़ा था। इल्जाम था कि औद्योगिक जमीन को 12 प्लॉट से बांटकर 125 प्लॉट में बदलने की मंजूरी दी गई। विजिलेंस ने जनवरी 2023 में सुंदर शाम अरोड़ा, एक IAS अफसर और अन्य अधिकारियों सहित कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने दिसंबर 2024 में इस प्रकरण की FIR रद्द कर दी थी।
50 लाख रुपए रिश्वत देने का प्रकरण
अक्टूबर 2022 में विजिलेंस ब्यूरो ने अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। इल्जाम था कि उन्होंने अपने खिलाफ चल रही पड़ताल में राहत दिलाने हेतु विजिलेंस के AIG मनमोहन कुमार को एक करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी। इसमें से 50 लाख रुपए की पहली किस्त देते समय उन्हें गिरफ्तार किया गया था।बाद में पंजाब तथा हरियाणा हाईकोर्ट ने इस प्रकरण की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
बेटे के नाम पर कंपनियों में 35% शेयरहोल्डिंग
ईडी अधिकारियों के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड की छानबीन से साफ हुआ है कि पूर्व मंत्री ने अपने बेटे प्रतीक अरोड़ा के जरिए इस प्लॉट की खरीद में निवेश करवाया था।
PSIEC और RERA से अंतिम मंजूरी व कब्जा मिलने से पहले ही प्लॉट को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर तीसरी पार्टियों को बेच दिया गया। इससे औद्योगिक विकास का मूल उद्देश्य खत्म हो गया और अवैध कमाई जनरेट की गई।
सितंबर 2020 में प्रतीक अरोड़ा ने M/s SRG Builders and Promoters Pvt Ltd में 35% हिस्सेदारी हासिल की। इसके अतिरिक्त वे M/s Aggarwal Buildtech, M/s SS Developers और M/s Land Developers में भी पार्टनर बने।
27.5 करोड़ की एडवांस पेमेंट
M/s Gulmohar Township India Pvt Ltd ने सेल एग्रीमेंट 23.10.2020 और PSIEC से NOC मिलने से पहले ही अगस्त 2020 में M/s Signify Innovations को 27.5 करोड़ रुपए का भुगतान करना शुरू कर दिया था।
बैंक खातों की जांच से पता चला कि प्लॉट और स्टाम्प ड्यूटी की फंडिंग निदेशक के करीबी संजीव कुमार जुनेजा ने की थी, जिन्होंने अगस्त 2020 से फरवरी 2021 के बीच 28.65 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे।
बैंक लॉकर्स फ्रीज, फॉरेंसिक पड़ताल में जुटे ED के एक्सपर्ट्स
42 घंटे चले इस बड़े सर्च ऑपरेशन के बीच ईडी ने मोबाइल फोन, अनेक संदिग्ध व आपत्तिजनक दस्तावेज, प्रॉपर्टी के ओरिजिनल कागजात, PSIEC प्लॉट से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और कई डिजिटल डिवाइस जब्त कर लिए हैं।
साथ ही, कई संदिग्ध बैंक खातों और बैंक लॉकर्स को फ्रीज कर दिया गया है। ईडी सूत्रों के अनुसार जब्त डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक छानबीन जारी है और जल्द ही इस मामले में कुछ और लोगों को पूछताछ हेतु समन भेजा जा सकता है।







