दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण हेतु पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराए जाने पर चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर कहा कि हर बार प्रदूषण हेतु पंजाब के किसानों को बलि का बकर

चंडीगढ़ का AQI 72, फिर दिल्ली में प्रदूषण क्यों?

मनीष तिवारी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा के बीच स्थित है। इसके बावजूद छोटी दिवाली के दिन यहां का AQI मात्र 72 दर्ज किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पंजाब में पराली जलाने से ही दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है, तो चंडीगढ़ की हवा की गुणवत्ता बेहतर कैसे रही?

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उन्होंने पछुवा हवाओं के पैटर्न का जिक्र करते हुए तंज कसा कि पराली का धुआं चंडीगढ़ को बाईपास करके सीधे दिल्ली पहुंच जाता है, इसकी व्याख्या देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि दिल्ली के प्रदूषण का पूरा दोष पंजाब के किसानों पर डालना उचित नहीं है।

पंजाब में 85% धान की कटाई पूरी होने का दिया हवाला

सांसद ने कहा कि अक्टूबर 2026 के अंत तक पंजाब में धान की लगभग 85 प्रतिशत कटाई पूरी हो चुकी थी। उन्होंने दिल्ली में हर वर्ष नवंबर-दिसंबर के बीच गंभीर होने वाले प्रदूषण को एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट जानकारी दी।

तिवारी के अनुसार, दिल्ली में पिछले एक दशक से अधिक समय से हर साल प्रदूषण की समस्या सामने आ रही है। ऐसे में केंद्र और दिल्ली सरकार को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार कर स्थायी समाधान निकालना चाहिए। किसानों पर दोष डालकर सरकारें अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकतीं।

स्थानीय प्रदूषण के कारणों पर भी चर्चा की जरूरत

मनीष तिवारी की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है, जब दिल्ली के प्रदूषण को लेकर पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर बहस जारी है। उन्होंने अपने वक्तव्य के जरिए इस मुद्दे पर एकतरफा इल्जाम लगाने के बजाय दिल्ली में प्रदूषण के अन्य कारणों और स्थानीय स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा करने की जरूरत बताई है।

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