संगरूर इंसाफ रैली में पंजाब कांग्रेस के सीनियर नेता एक मंच पर दिखे और पार्टी में ऑल इज वेल का मैसेज दिया, परंतु पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं की नाराजगी यहां भी देखने को मिली। जिससे स्पष्ट है कि पंजाब कांग्रेस में अभी ऑल इज वेल नहीं है।

राहुल गांधी की एंट्री से पहले पूर्व कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत व भारत भूषण आशु मंच से उतरे और उसके पश्चात दोबारा मंच पर नहीं दिखे। पार्टी सूत्रों के अनुसार भारत भूषण आशु और राणा गुरजीत के लिए मंच पर फ्रंट लाइन में कुर्सी नहीं लगाई गई, जिससे खफा होकर वो मंच से उतर गए।

संगरूर में मंच पर क्या क्या हुआ जानिए...

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  • मंच पर सीट ढूंढते रहे आशु: भारत भूषण आशु मंच पर आए और फ्रंट पर लगी कुर्सियों पर अपने नाम की चिट देखते रहे। आरंभ से लेकर आखिर तक कुल 25 कुर्सियां थी परंतु उन पर आशु काे अपने नाम की चिट नहीं मिली।
  • कुछ देर बैठे तो राणा गुरजीत आए: भारत भूषण आशु को पहली लाइन में सीट नहीं मिली तो वो दूसरी लाइन पर जाकर बैठ गए। जहां वो बैठे उसके ठीक आगे की कुर्सी राजा वड़िंग के लिए लगाई गई थी। आशु के बैठते ही पूर्व मंत्री व विधायक राणा गुरजीत पहुंचे। आशु के साथ उन्होंने कुछ देर बात की और बैठ गए।
  • राहुल गांधी के पीछे की सीट से उठाया: भारत भूषण आशु फिर उठे और सुंदर शाम अरोड़ा के साथ फ्रंट रो पर कुर्सियां देखने आए। जब फ्रंट लाइन पर अपनी कुर्सी नहीं दिखी तो फिर वो राहुल गांधी हेतु लगी सीट के ठीक पीछे वाली कुर्सी पर बैठ गए। आशु वहां पर बैठे ही थे कि तभी एक नेता आए और उन्होंने आशु को वहां से उठने हेतु कह दिया।
  • सुंदर शाम अरोड़ा के साथ मंच से नीचे उतरे: राहुल गांधी की सीट के पीछे से उठाए जाने के पश्चात आशु सुंदर शाम अरोड़ा के साथ मंच से नीचे उतर गए। उनसे पहले राणा गुरजीत भी मंच से उतर चुके थे। कुछ देर दोनों मंच के नीचे बनी डी में खड़े रहे किंतु उसके बाद वहां से निकल गए।
  • दोबारा मंच पर नहीं दिखे: भारत भूषण आशु और राणा गुरजीत राहुल गांधी के आने से पहले ही पंडाल से बाहर निकल चुके थे। राहुल गांधी के मंच पर आने के पश्चात दोनों नेता न तो मंच पर दिखे और न ही आसपास।
  • सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की रैली की फोटोज: भारत भूषण आशु व राणा गुरजीत रैली की तैयारियों को लेकर लगातार कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग कर रहे थे। आशु और राणा गुरजीत ने लुधियाना के सर्किट हाउस में समस्त हलका इंचार्जों के साथ रैली को लेकर मीटिंग की थी। इसके बावजूद राणा गुरजीत व भारत भूषण आशु ने रैली की एक भी तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं की। जिससे सियासी हलकों में नई चर्चाएं छिड़ गई हैं।

परगट सिंह के प्रधान बनने पर फ्रंट पर थे राणा-आशु

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ चन्नी गुट में राणा गुरजीत व भारत भूषण आशु दो प्रखर नेता था। दोनों नेताओं की परगट सिंह से भी नजदीकियां हैं। परगट सिंह के प्रधान बनते ही भारत भूषण आशु और राणा गुरजीत कांग्रेस पार्टी में फ्रंट रोल में आए गए थे। रैली को सफल बनाने हेतु परगट सिंह ने आशु व राणा गुरजीत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बावजूद दोनों राहुल गांधी के आने पर भी मंच पर नहीं दिखे।

खड़गे बोले-बड़ी लड़ाई है, छोटी बातें छोडे़ें

पंजाब कांग्रेस में चली आ रही गुटबाजी पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिक्कार्जुन खड़गे ने नेताओं को साफ संदेश दिया है कि पंजाब में सरकार बनाने हेतु पार्टी को बड़ी लड़ाई लड़ने की जरूरत है। नेता अपनी फोटो दिखाने हेतु काम न करें बल्कि अधिक से अधिक सीटें जीतने पर फोकस करें। उन्होंने यह भी कहा कि आपस में अगर कोई छोटी बातें हैं तो उन्हें छोड़ दें।

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Source: Dianik Bhaskar