पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कपूरथला की स्थायी लोक कोर्ट की तत्कालीन चेयरपर्सन मंजू राणा को पद से हटाने का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने बताया कि विभागीय छानबीन के बीच उन्हें अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज हासिल करने का उचित मौका नहीं दिया गया।

जस्टिस संदीप मौदगिल की अदालत ने 31 अक्टूबर को सुनाए निर्णय में 11 जून 2018 को बचाव का अवसर बंद करने और 12 जून 2018 को पद से हटाने के आदेश रद्द कर दिए।

मंजू राणा पर लगे थे अनेक आरोप

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मंजू राणा को 25 अप्रैल 2017 को 5 साल के लिए चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। उनके खिलाफ बिना कोरम आदेश देने, अतिक्रमण हटाने के मौखिक निर्देश देने और लाडोवाल टोल बैरियर पर एनएचएआई को टोल वसूली से रोकने जैसे इल्जाम लगे थे। जांच के दौरान उन्होंने गवाहों के बयान और संबंधित दस्तावेज मांगे थे।

रिकॉर्ड के मुताबिक, कुछ गवाहों के बयान दर्ज नहीं हुए थे। इसके बावजूद 15 दिन का अतिरिक्त वक्त देने और दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग खारिज कर उनका बचाव बंद कर दिया गया। अगले ही दिन उन्हें पद से हटा दिया गया।

दोबारा नियुक्ति का आदेश नहीं

हाईकोर्ट ने बताया कि किसी पर गंभीर इल्जाम होने से उसे बिना उचित सुनवाई के पद से नहीं हटाया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने आरोपों की सच्चाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। मंजू राणा का 5 साल का कार्यकाल 10 मई 2022 को समाप्त हो चुका है, अतः दोबारा नियुक्ति का आदेश नहीं दिया गया। कोर्ट ने उन्हें सेवा और वित्तीय लाभों के दावे पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचार करवाने का अधिकार दिया है।

मंजू राणा ने फैसले पर खुशी जताते हुए बताया कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि यदि कोर्ट दोबारा सेवा का मौका देता है तो वह पूरी निष्ठा से जिम्मेदारी निभाएंगी।

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Source: Dianik Bhaskar