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- Parvinder Jhota Murder Case | PGI Chandigarh Postmortem & Family Deal
मानसा सिविल चिकित्सालय की मोर्चरी से रात गुरुवार 12 बजे परविंदर झोटा के पार्थिव शरीर को PGI चंडीगढ़ रवाना किया गया।
मानसा के नशा विरोधी एक्टिविस्ट परविंदर झोटा का आज (6 नवंबर) PGI चंडीगढ़ में पोस्टमॉर्टम होगा। मानसा सिविल अस्पताल की मोर्चरी से रात गुरुवार 12 बजे परविंदर झोटा के पार्थिव शरीर को PGI चंडीगढ़ रवाना किया गया।
‘सतनाम वाहेगुरु’ का जाप करते हुए झोटा के पार्थिव शव को मोर्चरी से बाहर निकाला गया। इसके पश्चात आधुनिक सुविधाओं से लैस आईसीयू, वेंटिलेटर और फ्रीजर वाली एंबुलेंस में पार्थिव शरीर को रखकर चंडीगढ़ भेजा गया।
इससे पहले बुधवार रात को झोटा के पिता भीम सिंह व इंसाफ कमेटी का सरकार से समझौता हो गया। सरकार ने उन्हें झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर को सरकारी नौकरी और 2 करोड़ का मुआवजा देने का भरोसा दिया।
समझौते को लेकर अनेक सवाल उठे कि उन्होंने CM भगवंत मान और DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग क्यों छोड़ दी?। क्या सरकारी नौकरी और 2 करोड़ लेकर समझौता कर दिया?। सोशल मीडिया पर इसको लेकर बहस छिड़ी है।
हालांकि इसके उलट झोटा की हत्या में इंसाफ का एक बड़ा कानूनी पहलू भी है, जिसमें दोषियों को सजा दिलाने में पोस्टमॉर्टम को लेकर हो रही देरी मुश्किल बन सकती थी।
दैनिक भास्कर ने इस बारे में पड़ताल की तो पता चला कि तो पता चला कि परिवार को लीगल एक्सपर्ट्स से इनपुट मिला था कि पोस्टमॉर्टम में देरी हुई तो सबूत कमजोर हो सकते हैं। CBI भी परिवार से पोस्टमॉर्टम हेतु कह रही थी।
1. मृत्यु की असली वजह साबित करना पोस्टमार्टम से यह पता लगाया जा सकता है कि गोली शरीर के किस हिस्से में लगी और क्या उसी चोट की वजह से मौत हुई। साथ ही यह भी पता चलता कि गोली से कौन-से आवश्यक अंग और खून की नलियां क्षतिग्रस्त हुईं।
2. गोली लगने और चोटों के सबूत जुटाना पोस्टमार्टम से गोली के प्रवेश और बाहर निकलने के निशानों की पड़ताल की जा सकती थी। इससे शरीर के अंदर गोली का रास्ता, हड्डियों में फ्रैक्चर और अंदरूनी चोटों का पता चल सकता था।
3. गोली चलने की दूरी और दिशा का पता लगाना घाव के आसपास बारूद के कण, जलने के निशान और अन्य संकेतों से गोली कितनी दूरी से चलाई गई थी, इसका अनुमान लगाने में मदद मिल सकती थी। गोली के रास्ते से उसकी दिशा का भी पता लगाया जा सकता था।
4. गोली और हथियार की पहचान में सहायता अगर गोली या उसका कोई हिस्सा शरीर के अंदर मिला होता, तो उसे निकालकर फॉरेंसिक जांच हेतु भेजा जा सकता था। इससे हथियार और बरामद गोली के बीच रिश्ते की जांच में मदद मिल सकती थी।
5. कोर्ट में इल्जाम साबित करने की चुनौती पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट सीबीआई को चिकित्सकीय और वैज्ञानिक सबूत दे सकती थी। इससे यह समझने में मदद मिलती कि गोली लगने की घटना और मौत के बीच क्या रिश्ते था। इन सबूतों को दूसरे साक्ष्यों के साथ कोर्ट में पेश किया जा सकता था।
6. गवाहों-चश्मदीदों के बयानों की पुष्टि पोस्टमार्टम से मिले सबूतों की तुलना चश्मदीदों के बयानों से की जा सकती थी। इससे यह जांचने में सहायता मिलती कि गोली चलने की बताई गई दिशा, दूरी और घटना की परिस्थितियां गवाहों के बयानों से मेल खाती हैं या नहीं। अगर बयानों में विरोधाभास होता, तो उसकी छानबीन की जा सकती थी।
समझौते में सरकार ने क्या-क्या मांगें मानीं
- झोटा की पत्नी को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी और परिवार को 2 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
- झोटा के पिता भीम सिंह और एंटी ड्रग टास्क फोर्स के सदस्यों पर दर्ज प्रकरण रद्द किए जाएंगे।
- पंजाब में फ्लेक्स फाड़ने को लेकर दर्ज प्रकरण वापस होंगे। मानसा में झोटा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
- झोटा के पैतृक ग्राम ख्याला में उनके नाम पर ट्रॉमा सेंटर बनाया जाएगा। एक सप्ताह में मंजूरी दी जाएगी।
- गोलीबारी में घायल चार लोगों को पांच-पांच लाख रुपए मुआवजा और इलाज का पूरा खर्च सरकार देगी।
- प्रिगाबालिन कैप्सूल की बिक्री और मिसयूज पर नियंत्रण हेतु एक सप्ताह में नोटिफिकेशन जारी होगा।
- लुधियाना में विरोध प्रदर्शन के बीच जान गंवाने वाले युवक के परिवार को भी मुआवजा देने पर सहमति बनी।
- महिला कार्यकर्ता अरविंदर कौर के साथ कथित दुर्व्यवहार पर स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने माफी मांगी।
- झोटा के पिता भीम सिंह और अन्य सहयोगियों के मामलों में कोर्ट में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल करने का भरोसा दिया गया।
13 अक्टूबर से 5 नवंबर तक, झोटा हत्याकांड में क्या-क्या हुआ
13 अक्टूबर: मानसा के एक मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर दुकानदार अश्वनी कुमार से बहस के बीच परविंदर झोटा को गोली मार दी गई। घटना का फेसबुक लाइव वीडियो भी सामने आया। झोटा की मृत्यु हो गई, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए।
14 अक्टूबर: घटना के पश्चात मानसा में आक्रोश फैल गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी की दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी की। प्रशासन ने अभियुक्त के मकान के कुछ हिस्से भी गिराए। मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया गया। परिवार ने अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया और सीबीआई पड़ताल की मांग उठाई।
15 अक्टूबर: झोटा हत्याकांड के विरोध में पंजाब बंद का आह्वान किया गया। सुबह 6 से शाम 5 बजे तक अनेक जिलों में बाजार, शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जगह-जगह सड़कें जाम की गईं। मानसा में भी बंद का व्यापक असर दिखाई दिया।
16 अक्टूबर: एक्शन कमेटी ने मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे, घायलों को 10-10 लाख रुपये मुआवजे और झोटा के नाम पर स्मारक या ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग उठाई। 19 अक्टूबर को आप विधायकों और मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन का ऐलान हुआ। अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ने झोटा को शहीद का दर्जा दिया।
17 अक्टूबर: एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने झोटा के पिता भीम सिंह से मुलाकात की। उन्होंने स्वर्ण मंदिर परिसर स्थित केंद्रीय सिख संग्रहालय में झोटा की तस्वीर लगाने और चारों घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की।
18 अक्टूबर: परिवार और प्रशासन के बीच पोस्टमार्टम को लेकर सहमति नहीं बनी। धरना जारी रहा। परिवार ने स्पष्ट किया कि इंसाफ की मांग पूरी होने से पहले अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
19 अक्टूबर: एक्शन कमेटी के घोषित आयोजन के तहत आप नेताओं के खिलाफ विरोध की रणनीति जारी रही। मुख्यमंत्री और डीजीपी के इस्तीफे की मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा बनी रही।
20 अक्टूबर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा में झोटा के परिवार से मुलाकात की। पंजाब सरकार ने प्रकरण की पड़ताल सीबीआई को सौंपने के लिए अधिसूचना जारी की।
21 अक्टूबर: सीबीआई की टीम मानसा पहुंची। एजेंसी ने केस की फाइलें अपने कब्जे में लीं और पड़ताल शुरू की। पीजीआई में पोस्टमार्टम करवाने की तैयारी के बीच परिवार और निहंग सिंहों ने सहमति के बिना शव ले जाने का विरोध किया। सरकार की ओर से गठित तीन महिला आईएएस अधिकारियों की कमेटी के साथ मीटिंग भी बेनतीजा रही।
22 अक्टूबर: सीबीआई ने औपचारिक रूप से FIR दर्ज कर पड़ताल अपने हाथ में ली। परिवार ने मांगें पूरी होने तक पोस्टमार्टम की अनुमति देने से इनकार किया। इसी दिन चारों घायलों को एसजीपीसी की ओर से पांच-पांच लाख रुपये के चेक भी दिए गए।
23 अक्टूबर: पोस्टमार्टम को लेकर गतिरोध जारी रहा। परिवार की ओर से सीबीआई पड़ताल और अन्य मांगों पर सहमति बनने तक अंतिम संस्कार नहीं करने का रुख कायम रहा।
24 अक्टूबर: सीबीआई ने मानसा के मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी शुरू की। रामबाग रोड स्थित मेडिकल हॉल सहित अन्य दुकानों में कथित नशीली दवाओं की बिक्री से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई।
25 अक्टूबर: सीबीआई ने तीन मेडिकल स्टोरों की पड़ताल कर दवाओं की सप्लाई चेन और कथित अवैध बिक्री के पहलुओं को खंगाला। झोटा के पिता ने मानसा के एसएसपी के तबादले की मांग भी उठाई।
26 अक्टूबर: हत्या के 14 दिन पश्चात भी परिवार, प्रशासन और इंसाफ कमेटी के बीच पोस्टमार्टम को लेकर सहमति नहीं बन सकी। धरना जारी रहा।
27 अक्टूबर: भम्मे कलां में युवक जीतू की नशे की ओवरडोज से मौत के बाद परिवार ने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। झोटा के पिता भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा एवं पुलिस ने लाठीचार्ज कर शव अपने कब्जे में ले लिया।
28 अक्टूबर: एक्शन कमेटी ने 30 अक्टूबर को संगठनों की मीटिंग और 31 अक्टूबर को मंत्रियों तथा विधायकों के आवास के बाहर 24 घंटे के धरने का ऐलान किया।
29 अक्टूबर: गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई और दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग पर आंदोलन जारी रहा।
30 अक्टूबर: किसान, मजदूर, मुलाजिम, विद्यार्थी और अन्य संगठनों की बैठक में आंदोलन को व्यापक बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
31 अक्टूबर: 100 से ज्यादा संगठनों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के संगरूर स्थित आवास के 5 नवंबर को घेराव का ऐलान किया। पहले घोषित आप नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन का कार्यक्रम वापस ले लिया गया।
1 नवंबर: गिरफ्तार नेताओं की रिहाई, नशे के खिलाफ कार्रवाई और मुख्यमंत्री व डीजीपी के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहा।
2 नवंबर: परिवार और एक्शन कमेटी ने पोस्टमार्टम तथा अंतिम संस्कार को लेकर अपनी शर्तों पर कायम रहते हुए सरकार पर मांगें पूरी करने का दबाव बनाए रखा।
3 नवंबर: गतिरोध बरकरार रहा। गिरफ्तार साथियों की रिहाई और मुकदमे वापस लेने की मांग आंदोलन के केंद्र में रही।
4 नवंबर: सरकार और एक्शन कमेटी के बीच करीब पांच घंटे की मीटिंग हुई। विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में अधिकांश मांगों पर सहमति बनी। परिवार पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार हेतु राजी हो गया।
5 नवंबर: समझौते की सूचना सार्वजनिक हुई। मुख्यमंत्री आवास के प्रस्तावित घेराव को स्थगित कर दिया गया और 6 नवंबर को पीजीआई में पोस्टमार्टम कराने का रास्ता साफ हो गया।
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Source: Dianik Bhaskar







