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- Improving Conduct Is The Real Religion, Paint The Mind In The Color Of God: Saint
फोरएस चौक स्थित निर्मल वेदांत आश्रम में चल रहे 76वें निर्मल वेदांत सम्मेलन में अनेक संत-महापुरुष पहुंचे। संतों ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आचरण को सुधारना ही वास्तविक धर्म है। जब तक आचरण नहीं सुधरेगा, तब तक मनुष्य का कल्याण संभव नहीं है। यदि हम अपने आचरण को सुधार लें, तो सभी पाप अपने आप खत्म हो जाएंगे। संतों ने बताया कि इंसान जो भी काम करे, उसे ईमानदारी से ईश्वर को समर्पित करते जाना चाहिए।
यदि कर्मों को भगवान को समर्पित नहीं किया जाता, तो वही कर्म इंसान हेतु बंधन बन जाते हैं। इस कारण जीवन को सार्थक बनाने के लिए शास्त्रों में बताए मार्ग पर चलना होगा। मन की स्थिति पर बात करते हुए संतों ने समझाया कि जिस प्रकार पानी का अपना कोई फिक्स शेप नहीं होता, उसी प्रकार मन का भी कोई रूप नहीं होता। यह जिसके साथ जुड़ता है, उसी का रूप ले लेता है।
इसलिए मन को साधुओं की संगति में लगाना चाहिए, ताकि मन पर परमात्मा का रंग चढ़ सके और हर जीव में ईश्वर नजर आने लगे। जब इंसान को हर जीव में राम दिखने लगेंगे, तो वह किसी से झूठ या कपट नहीं करेगा। अंत में संतों ने संदेश दिया कि इस जीभ को दुनिया की तारीफ में न लगाकर परमात्मा के नाम में लगाएं। सम्मेलन के अंत में भंडारा बांटा गया।







