चंडीगढ़ डंपिंग ग्राउंड पर हाईकोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में खुलासा: गेट पर परफ्यूम से छिपाई बदबू, अंदर मिला 20 मीटर ऊंचा कचरे का पहाड़ – Chandigarh News
चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड की जमीनी हकीकत को उजागर करती हाईकोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट ने नगर निगम और प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष कमिश्नर एडवोकेट तनू बेदी ने मौके का निरीक्षण करने के बाद अदालत में पांच पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की है, जिसमें डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों की हालत को नरकीय बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य प्रवेश द्वार पर सफाई और बदबू नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए थे, लेकिन जैसे ही निरीक्षण टीम डंपिंग ग्राउंड के अंदर पहुंची, वहां की वास्तविक स्थिति सामने आ गई। कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यहां रहने वाले लोग पूरे शहर के कचरे का बोझ उठाने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत और सम्मानजनक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। गेट पर सब ठीक, अंदर पहुंचते ही सामने आई सच्चाई हाईकोर्ट कमिश्नर ने निरीक्षण को तीन चरणों में बांटा था। डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने के रास्ते, मुख्य गेट और कचरे के बीच वाले हिस्से का अलग-अलग निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य गेट के आसपास का क्षेत्र अपेक्षाकृत साफ दिखाई दिया। यहां कर्मचारियों द्वारा पानी और एयर मिस्ट का छिड़काव किया जा रहा था ताकि धूल और दुर्गंध को कम किया जा सके। ताजा मिट्टी भी डाली गई थी, जिससे पहली नजर में स्थिति सामान्य लगे। लेकिन अंदर प्रवेश करते ही तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जमीन पर हर तरफ प्लास्टिक, कपड़े, पॉलीथिन बैग, जूते-चप्पल और अन्य ठोस कचरा बिखरा मिला। निरीक्षण टीम को कई स्थानों पर कचरा मिट्टी के नीचे दबा हुआ भी दिखाई दिया। घरों के पीछे खड़ा है 20 मीटर ऊंचा कचरे का पहाड़ रिपोर्ट में सबसे गंभीर खुलासा डंपिंग ग्राउंड के आकार और ऊंचाई को लेकर हुआ है। कमिश्नर ने आसपास की कॉलोनी के एक मकान की छत से तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए। वहां से स्पष्ट दिखाई दिया कि रिहायशी इलाके के बिल्कुल साथ कचरे के ढेर खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार डंपिंग ग्राउंड का स्तर आसपास की गलियों की दीवारों की ऊंचाई तक पहुंच चुका है और कई स्थानों पर कचरे का ढेर करीब 20 मीटर ऊंचा हो गया है। कमिश्नर ने लिखा कि डंपिंग ग्राउंड के मध्य भाग में पहुंचते ही इतनी तेज दुर्गंध महसूस हुई कि गेट पर किए गए सभी प्रबंध बेअसर साबित हो गए। मक्खियों के झुंड के बीच गुजर रही लोगों की जिंदगी रिपोर्ट में आसपास रहने वाले लोगों की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है। कमिश्नर के अनुसार डंपिंग ग्राउंड की सीमा से सटे घरों के आसपास मक्खियों के बड़े-बड़े झुंड लगातार मंडरा रहे थे। स्थिति इतनी खराब थी कि वहां सामान्य रूप से खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था। इसके बावजूद लोग उसी माहौल में खाना बना रहे थे और परिवार के साथ भोजन कर रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ पर्यावरण प्रदूषण का मामला नहीं बल्कि लोगों के सम्मानजनक जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि नगर निगम द्वारा कई स्थानों पर कचरे के ऊपर सामान्य मिट्टी की परत डाली जा रही है। ड्रोन फुटेज ने खोली असलियत निरीक्षण के दौरान यूटी प्रशासन की ओर से ड्रोन की व्यवस्था भी की गई थी। ड्रोन से रिकॉर्ड किए गए हवाई वीडियो में डंपिंग ग्राउंड की पूरी तस्वीर सामने आई। फुटेज में दिखाई दिया कि सामने का हिस्सा अपेक्षाकृत व्यवस्थित और उपचारित नजर आता है, जबकि पीछे का बड़ा क्षेत्र अब भी कचरे के विशाल ढेरों से भरा हुआ है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि केवल सामने के हिस्से को व्यवस्थित दिखाकर पूरे डंपिंग ग्राउंड की वास्तविक स्थिति को नहीं समझा जा सकता। अब 16 जुलाई को होगी सुनवाई दादूमाजरा डंपिंग ग्राउंड से जुड़े इस मामले पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट अब 16 जुलाई को अगली सुनवाई करेगा। अदालत में पेश की गई इस रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन और नगर निगम से जवाब भी मांगा जा सकता है।
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