करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी में पंजाब के उद्योगपति को सजा: मोहाली सीबीआई कोर्ट ने सुनाया फैसला; 15 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया – Chandigarh News
पंजाब की मोहाली स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में एक फैसला सुनाया है। अदालत ने मैसर्स जीडी. इस्पात उद्योग मंडी गोबिंदगढ़ के पार्टनर समीर दुआ को दोषी करार देते हुए 3 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सीबीआई के अनुसार यह मामला इंडियन ओवरसीज बैंक की मंडी गोबिंदगढ़ शाखा से धोखाधड़ी कर 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट हासिल करने से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंक में झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेज जमा कराए थे। एक पार्टनर की हो चुकी मौत इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत करवा ली गई, जिससे इंडियन ओवरसीज बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। मामले की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने समीर दुआ को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। मामले में फर्म के एक अन्य पार्टनर दलीप दुआ भी आरोपी थे। हालांकि, उनके निधन के बाद उनके खिलाफ चल रही अदालती कार्यवाही समाप्त कर दी गई। 2018 में कपनी ने की धोखाधड़ी मैसर्स जी.डी. इस्पात उद्योगके मंडी गोबिंदगढ़ स्थित एक स्टील कारोबार से जुड़ी फर्म थी, जो लोहे और इस्पात उत्पादों के निर्माण एवं व्यापार का काम करती थी। इस मामले की शुरुआत 29 जून 2017 को हुई, जब इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के लुधियाना स्थित मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक ने सीबीआई को लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्म और उसके साझेदारों ने बैंक से धोखाधड़ी की है। 2018 में किया था मामला दर्ज शिकायत के आधार पर सीबीआई ने वर्ष 2018 में नियमित मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान एजेंसी ने समीर दुआ और उनके पिता दलीप कुमार दुआ (अब दिवंगत) के खन्ना स्थित फ्रेंड्स कॉलोनी के आवासों तथा मंडी गोबिंदगढ़ में कंपनी के परिसरों पर छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान कई दस्तावेज और अन्य सबूत जुटाए गए, जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट की हासिल सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने इंडियन ओवरसीज बैंक की मंडी गोबिंदगढ़ शाखा में कथित तौर पर फर्जी और भ्रामक दस्तावेज जमा कर 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट हासिल की थी, जिससे बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने आरोप पत्र दाखिल किया और मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने समीर दुआ को दोषी करार दिया।
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