पंजाब कांग्रेस विवाद से हिमाचल में लटका कैबिनेट विस्तार: PAC मीटिंग स्थगित; वेणुगोपाल नहीं आएंगे, राजनीतिक नियुक्तियों में देरी – Shimla News
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में चल रहा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कैबिनेट का विस्तार एक बार फिर टल सकता है। कांग्रेस की ओर से 16 और 17 जुलाई को धर्मशाला में प्रस्तावित पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की बैठक स्थगित कर दी गई है। बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की उपलब्धता न होने के कारण यह बैठक फिलहाल नहीं हो सकेगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंजाब कांग्रेस में चल रहे संगठनात्मक विवाद के समाधान के बाद PAC की नई बैठक बुलाई जाएगी। इसी बैठक में हिमाचल कैबिनेट विस्तार, मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और एक मंत्री को हटाने जैसे अहम मुद्दों पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। सीएम समेत 12 मंत्री बनाए जाने का प्रावधान हिमाचल में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 12 मंत्री हो सकते हैं। सुक्खू कैबिनेट में सीएम समेत 11 मंत्री हैं। एक मंत्री पद अभी खाली है। माना जा रहा है कि इस पद पर कुल्लू सदर से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की ताजपोशी लगभग तय है। मुख्यमंत्री सुक्खू भी सार्वजनिक मंचों से सुंदर सिंह ठाकुर को जल्द मंत्री बनाए जाने के संकेत दे चुके हैं। मंत्री को ड्रॉप करने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में एक मंत्री को कैबिनेट से ड्रॉप करने की चर्चा है। यदि ऐसा होता है तो ज्वालाजी के विधायक संजय रत्न, पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल और अर्की के विधायक एवं सीएम सुक्खू के करीबी संजय अवस्थी में से किसी एक की ताजपोशी तय है। इसी तरह, डिप्टी स्पीकर का पद भी खाली पड़ा है। विधानसभा के मानसून सत्र से पहले इसे भी भरा जाना है। मगर यह नियुक्तियां PAC में चर्चा के बाद ही संभव है। PAC टलने से राजनीतिक नियुक्तियां लटकी प्रस्तावित PAC बैठक का मुख्य एजेंडा भी यही था कि विधानसभा के मानसून सत्र से पहले कैबिनेट विस्तार, विभागों के फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों पर सहमति बनाई जाए। मगर बैठक टलने से यह पूरा मामला फिलहाल आगे खिसक गया है। कुछ बोर्ड-निगमों में ताजपोशी को लेकर भी चर्चा होनी थी। कैबिनेट विस्तार की लंबे समय से चर्चाएं हिमाचल में पिछले लगभग एक वर्ष से कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं लगातार चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। सरकार का कार्यकाल भी अब लगभग डेढ़ वर्ष ही शेष रह गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो चुनावी गतिविधियां शुरू होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं और सीमित हो जाएंगी।
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