जगन्नाथ पुरी के राजा का राष्ट्रपति और पीएम को लेटर: कहा- ISKCON का अलग समय पर रथयात्रा आयोजित करना गलत; परंपरा की रक्षा करने की अपील
भुवनेश्वर17 मिनट पहले
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ओडिशा के पुरी शहर में 16 जुलाई को रथयात्रा का मुख्य आयोजन किया जाएगा।
ओडिशा के पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को लेटर लिखकर जगन्नाथ मंदिर की प्राचीन परंपरा की रक्षा की मांग की है। 8 जुलाई को लिखे लेटर में गजपति ने ISKCON की तरफ से अलग समय पर रथयात्रा और स्नान यात्रा आयोजित करने की आलोचना की।
गजपति महाराज दिब्यसिंह देब श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष भी हैं। उनका कहना है कि ISKCON रथयात्रा का आयोजन ऐसी तारीखों पर कर रहा है, जो शास्त्रों के अनुसार नहीं हैं। इससे भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं।

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित रथयात्राओं पर भी जताई आपत्ति
गजपति महाराज ने उज्जैन स्थित ISKCON मंदिर की ओर से 16 से 25 जुलाई के बीच मध्य प्रदेश के 66 स्थानों पर रथयात्रा आयोजित करने की योजना पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वाला 9 दिवसीय उत्सव है।
उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास रचित स्कंद पुराण में भी भगवान जगन्नाथ ने स्वयं स्नान यात्रा और रथयात्रा की निर्धारित तिथि बताई हैं। ऐसे में मनमानी तिथियों पर आयोजित करना प्राचीन परंपराओं और शास्त्रों के विपरीत है।
मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को, ISKCON ने विदेशों में पहले मनाया उत्सव
दरअसल, ISKCON ने 21 जून को लंदन, 14 जून को न्यूयॉर्क सिटी और 5 जुलाई को सिडनी में रथयात्रा निकाली थी। लेकिन इस साल, स्नान पूर्णिमा 29 जून को थी और पुरी में मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को होगी।
ISKCON का कहना है कि भगवान जगन्नाथ पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के हैं। विदेशों में मौसम, स्थानीय परिस्थितियों और भक्तों की सुविधा को देखते हुए रथयात्रा की तारीखें अलग-अलग होती हैं ताकि ज्यादा लोग उत्सव में शामिल हों और जगन्नाथ संस्कृति का वैश्विक प्रसार हो।
ISKCON का तर्क- विदेशों में हर जगह एक ही दिन आयोजन संभव नहीं
पुरी मंदिर की पिछली आपत्तियों का जवाब देते हुए ISKCON ने कहा कि हर देश में जलवायु परिस्थितियों, सरकारी नियमों और स्थानीय सांस्कृतिक कारकों बड़ा असर डालते हैं। इसके कारण शास्त्रों में बताई गई तारीख पर रथयात्रा आयोजित करना हमेशा संभव नहीं होता है।
ISKCON ने पुरी मंदिर को बताया था- रूस में वहां का मौसम, सरकार और स्थानीय संस्कृति अक्सर शास्त्रों में बताई गई तारीखों पर रथयात्रा निकालने के अनुकूल नहीं होती है।
भास्कर नॉलेज…
रथयात्रा को लेकर विवाद नया नहीं है। 2024 और 2025 में भी पुरी के गजपति महाराजा ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी पुरी के धार्मिक पंचांग के अनुसार रथयात्रा आयोजित की जाए। 2026 में यह विवाद इसलिए ज्यादा चर्चा में आया क्योंकि कई देशों में रथयात्रा पुरी की तिथि से कई हफ्ते पहले आयोजित की गई, जिसके बाद औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई।

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