चंडीगढ़ में इमारत ढहने से दो पाटर्नर की मौत: 15 दिन पहले ही किराए पर ली, रेनोवेशन का काम चल रहा था, मेरठ के थे – Chandigarh News

चंडीगढ़ में इमारत ढहने से दो पाटर्नर की मौत:  15 दिन पहले ही किराए पर ली, रेनोवेशन का काम चल रहा था, मेरठ के थे – Chandigarh News




चंडीगढ़ में शनिवार को 54 साल पुरानी करीब दो मंजिला बिल्डिंग गिरने से दो लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। दोनों को बचाने के लिए पांच घंटे तक रेसक्यू ऑपरेशन चला। इसमें भारतीय सेना, एनडीआरएफ व चंडीगढ़ प्रशसान की टीमें जुटी रही है। मृतकों की पहचान मेरठ निवास तरूण जैन (45) और तरूण कौशिश (48) के रूप में हुई है। दोनों मेरठ के रहने वाले थे। मलबे से निकाले कुलदीप सिंह, कुलबीर सिंह, उमेश, राहुल, व अजीत का इलाज चल रहा है। आज इस्टेट आफिस व सीएफएसएल की टीमें मौके का मुआयना करेगी।वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन ने अब इस तरह के हादसों को रोकने के लिए असुरक्षित इमारतों का सर्वे करने का फैसला लिया है। अब हादसे की सारी कहानी प्वाइंटों में जानिए 1. अचानक इमारत गिरी चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 में ‘होटल द फर्न’ के पास एक पुरानी 2-मंजिला इमारत भरभराकर गिरने का बड़ा हादसा हुआ। इसका इस्तेमाल स्क्रैप (कबाड़) के गोदाम के रूप में किया जा रहा था। 15 दिन पहले ही यह जगह किराए पर ली गई थी। इमारत की रेनोवेशन का चल रहा था। काम दूसरे दिन में पहुंचा था। जिस समय हादसा उस समय वहां पर मजदूर व मुलाजिम काम कर रहे थे। मुलाजिमों का कहना है कि करीब 4:20 बजे जोरदार आवाज के साथ भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ और 54 साल पुरानी यह इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। 2. मलबे में दबना और चीख-पुकार
इमारत के अचानक गिरने से काम कर रहे कई मजदूर अंदर ही मलबे में दब गए। आसपास भारी अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। इसके बाद फायर ब्रिगेड व प्रशसान को सूचित किया। तुरंत मौके पर टीमें पहुंच गई। लेकिन लोगों को निकालने में काफी मुश्किल आ रही थी। क्योंकि लैंटर बिल्कुल नीचे था। उसके ठीक लोग थे। इसके बाद जेबीबी और बड़ी क्रेन बुलाकर मलबा हटाया गया। 3. चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया बचाव दल ने सबसे पहले एक्सकेवेटर की मदद से मलबे (लेंटर) को थोड़ा उठाया ताकि अंदर दबे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंच सके। इस त्वरित कार्रवाई के दौरान मलबे से सुरक्षित 4 लोगों को बाहर निकाल लिया गया। पहले चरण में करीब पांच लोगों को निकालने में सफलता मिल गई। लेकिन कंपनी के मालिक अंदर फंस गए थे। क्योंकि जिस समय हादसा हुआ तो वह फर्स्ट फ्लोर पर थे। ऐसे में उन्हें निकालने में काफी दिक्कत आ रही थी। 4. एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा रात में रेस्क्यू में तेजी लाने के लिए दो घंटे बाद एनडीआरएफ (NDRF) की टीम और भारतीय सेना को बुला लिया गया। इसके बाद टीमों ने पूरी स्ट्रेटजी से प्रोसेस शुरू किया। कुछ ही समय के प्रयास के बाद घायल भी दिखा। जो अंदर फंसा हुआ था। कोशिश कर एक घायल को बाहर निकाल लिया। लेकिन वह बेसुध हो गया था। ऐसे में उसे निकाले के बाद तुरंत अस्पताल भेज दिया गया। इसी तरह रात को दूसरे को भी निकाल लिया गया। उसकी हालत भी खराब थी। उसे भी अस्पताल भेज दिया। पता चला है कि दोनों को रात मृत घोषित कर दिया गया। साढ़े 5 घंटे लंबे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे में दबे सभी लोगों को बाहर निकाल लिया गया。आखिर में निकाले गए दो लोगों को एंबुलेंस के जरिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया।



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