इंस्टाग्राम को बाल यौन शोषण वाले विज्ञापन पर नोटिस: केंद्र सरकार ने META से पूछा- ऐसे विज्ञापन कैसे चले, इन्हें कैसे रोका जाएगा

इंस्टाग्राम को बाल यौन शोषण वाले विज्ञापन पर नोटिस:  केंद्र सरकार ने META से पूछा- ऐसे विज्ञापन कैसे चले, इन्हें कैसे रोका जाएगा


नई दिल्ली2 मिनट पहले

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को समन जारी किया है।

मंत्रालय मेटा से इस पूरे मामले पर जवाब मांगेगा। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों की निगरानी और रोकथाम के लिए कंपनी की क्या नीतियां और सुरक्षा व्यवस्था हैं।

केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की आपत्तिजनक या अवैध सामग्री को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार इस बात की जांच करेगी कि इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन कैसे प्रसारित हुए और उन्हें रोकने के लिए प्लेटफॉर्म की ओर से क्या कदम उठाए गए।

केंद्र सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर अवैध, आपत्तिजनक और बच्चों के खिलाफ अपराध से जुड़ी सामग्री को तुरंत हटाएं और ऐसे मामलों को रोकने के लिए कदम उठाएं।

बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन

ऐसे विज्ञापन या प्रमोशनल पोस्ट जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से बच्चों के यौन शोषण, उनके अश्लील चित्रों, वीडियो या ऐसे अवैध कंटेंट को देखने, खरीदने, शेयर करने या उससे जुड़ी वेबसाइटों और ग्रुप्स तक पहुंचने के लिए लोगों को आकर्षित करते हैं।

यह सामग्री पूरी तरह अवैध है और भारत में इसके खिलाफ कड़े कानून हैं। इसके निर्माण, प्रसारण, देखने, डाउनलोड करने या साझा करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

  • बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो या वीडियो का प्रचार।
  • ऐसे टेलीग्राम चैनल, वेबसाइट या ग्रुप के लिंक देना, जहां इस तरह की सामग्री उपलब्ध हो।
  • भ्रामक विज्ञापन, जिनमें बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट का लालच देकर लोगों को किसी वेबसाइट या ऐप पर भेजा जाता है।
  • बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री बेचने, डाउनलोड करने या साझा करने का प्रचार।

भारत में इससे जुड़े प्रमुख कानून-

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की कई धाराएं। पॉक्सो अधिनियम, 2012, जो बच्चों के यौन शोषण और उससे जुड़े अपराधों पर सख्त सजा का प्रावधान करता है।

25 फरवरी: सरकार ने श्लील कंटेंट दिखाने पर 5 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया था

इससे पहले सरकार ने 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को ब्लॉक किया था। इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था। जिन प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हुई, उनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल हैं।

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