रावी नदी में जलस्तर बढ़ा, अस्थायी पुल बहा: गुरदासपुर के 7 गांवों का संपर्क कटा, प्रशासन द्वारा इंतजाम करने से रोष, आंदोलन की तैयारी – Batala News

रावी नदी में जलस्तर बढ़ा, अस्थायी पुल बहा:  गुरदासपुर के 7 गांवों का संपर्क कटा, प्रशासन द्वारा इंतजाम करने से रोष, आंदोलन की तैयारी – Batala News




पंजाब के सीमावर्ती जिले गुरदासपुर में रावी नदी के पार बसे सात गांवों के लोगों की मुश्किलें एक बार फिर बेहद बढ़ गई हैं। बीती रात रावी नदी में अचानक पानी का जलस्तर बढ़ने के कारण मकरा पत्तन पर बना अस्थायी पंटून पुल (पीपों का पुल) का एक बड़ा हिस्सा बह गया। इस हादसे के बाद इन गांवों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया है। अब ग्रामीणों के पास आवागमन के लिए सिर्फ नाव (किश्ती) ही एकमात्र सहारा बची है। रावी नदी के पार बसे ये गांव हर साल पानी की तबाही के शिकार होते हैं। सरकार इनके लिए हर साल अस्थाई व्यवस्था का दावा करती है, लेकिन सही इंतजाम न होने से यहां के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता। सुरक्षा और आपातकालीन मदद सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन ग्रामीणों की सुध कब लेता है। हर साल बरसात में ‘नजरबंद’ होने को मजबूर हैं ग्रामीण भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे रावी पार के तूर, भरियाल, मम्मियां, चिब्ब, चक्करंगा, लसियाण, कजले और चूंबर ​आदि गांव हर साल मॉनसून के मौसम में इसी तरह की नारकीय स्थिति का सामना करते हैं। पुल बह जाने के कारण इन गांवों में जिंदगी ठहर सी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क टूटने से न तो कोई मरीज समय पर अस्पताल पहुंच पाता है, न बच्चे स्कूल-कॉलेज जा पा रहे हैं और न ही कामकाजी लोग अपने रोजगार स्थलों तक पहुंच पा रहे हैं। आजादी के 78 साल बाद भी उपेक्षा का दंश, पक्का पुल सिर्फ कागजों में स्थानीय निवासियों अमरीक सिंह, बलवान सिंह, रिंकू सैनी, बबिता, कुलवंत कौर और दिलबाग सिंह ने सरकारों और प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के 78 साल बीत जाने के बाद भी किसी सरकार ने सीमांत क्षेत्र के इन नागरिकों की सुध नहीं ली। 2018 में इस स्थान पर एक स्थायी (पक्का) पुल बनाने की मंजूरी भी मिली थी, लेकिन प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण आज तक जमीनी स्तर पर इसका निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। बड़े आंदोलन की तैयारी में सीमावर्ती ग्रामीण बरसात के दिनों में खुद को देश से कटा हुआ और पूरी तरह उपेक्षित महसूस कर रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। मूलभूत सुविधाओं से महरूम इन सात गांवों के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे अपनी मांगों को लेकर एक बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।



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