हाईकोर्ट ने वैज्ञानिक की अपील खारिज की: परियोजना खत्म होते ही संविदा सेवा भी समाप्त, 2011 में हुई संविदा पर नियुक्ति – Chandigarh News
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी में संविदा पर कार्यरत वैज्ञानिक दिव्या कौशिक को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि जिस परियोजना के तहत उनकी नियुक्ति हुई थी, वह 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उनकी संविदा सेवा जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता। यह फैसला जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने दिव्या कौशिक की अपील खारिज करते हुए कहा कि मामला अभी एकल पीठ के समक्ष लंबित है और अपील केवल अंतरिम आदेशों के खिलाफ दायर की गई थी। इसलिए इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। 2011 में हुई थी संविदा पर नियुक्ति याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2011 में पंजाब स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के पेटेंट इंफॉर्मेशन सेंटर (पीआईसी) में वैज्ञानिक के पद पर संविदा आधार पर हुई थी। इसके बाद समय-समय पर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा। बाद में परिषद ने उनका पद समाप्त कर दिया, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान एकल पीठ ने 16 जुलाई 2024 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, जिससे उनकी सेवा अस्थायी रूप से जारी रही। परियोजना बढ़ी तो मिलेगा लाभ बाद में परिषद की ओर से दायर आवेदन पर एकल पीठ ने 23 मार्च 2026 को अपने आदेश में संशोधन किया। अदालत ने कहा कि यदि परियोजना 31 मार्च 2026 के बाद भी जारी रहती है तो यथास्थिति का आदेश भी लागू रहेगा। लेकिन यदि परियोजना समाप्त हो जाती है, तो परिषद उस आदेश से बंधी नहीं होगी। दिव्या कौशिक ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की थी, लेकिन 6 अप्रैल 2026 को एकल पीठ ने उनकी यह मांग भी खारिज कर दी। पांच साल की थी परियोजना सुनवाई के दौरान परिषद ने अदालत को बताया कि पेटेंट इंफॉर्मेशन सेंटर की परियोजना पांच साल के लिए मंजूर की गई थी और इसकी अवधि 31 मार्च 2026 को पूरी हो गई। परियोजना समाप्त होने के साथ ही उससे जुड़ी संविदा नियुक्तियां भी स्वतः समाप्त हो गईं। परिषद ने यह भी कहा कि नियुक्ति पत्र में पहले से साफ लिखा था कि परियोजना समाप्त होने पर अनुबंध भी अपने आप खत्म माना जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि एकल पीठ के आदेश में कोई कानूनी गलती या त्रुटि नहीं है। चूंकि परियोजना का विस्तार नहीं हुआ और उसकी अवधि पूरी हो चुकी है, इसलिए संविदा कर्मचारी की सेवा जारी रखने का कोई आधार नहीं बचता।
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