52000 करोड़ की डिफेंस डील को मिली मंजूरी: आकाश तरंग, कामिकाजे ड्रोन समेत कई हाईटेक हथियार आर्मी के जखीरे में होंगे शामिल

52000 करोड़ की डिफेंस डील को मिली मंजूरी:  आकाश तरंग, कामिकाजे ड्रोन समेत कई हाईटेक हथियार आर्मी के जखीरे में होंगे शामिल


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नई दिल्ली11 मिनट पहले

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 52,000 करोड़ रुपये की खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, शुक्रवार को स्वीकृतक इन प्रस्तावों में सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए कई अत्याधुनिक हथियार और प्रणालियां शामिल हैं।

भारतीय सेना के लिए आकाश तरंग एंटी-ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM), मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM), वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS), टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम की खरीद को मंजूरी मिली है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, आकाश तरंग सेना की विभिन्न फॉर्मेशन को ड्रोन हमलों से प्रभावी सुरक्षा देगा। MPATGM दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों से मुकाबले में पैदल सेना की क्षमता बढ़ाएगी। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि V-SHORADS मल्टी-स्पेक्ट्रल सेंसर के जरिए कम दूरी की वायु रक्षा को और मजबूत बनाएगा।

एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम टैंकों की सुरक्षा और उनकी जीवित रहने की क्षमता बढ़ाएगा। वहीं जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता के साथ अधिक मारक और किफायती साबित होंगे।

भारतीय नौसेना के लिए मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM), नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम खरीदने की मंजूरी दी गई है। मंत्रालय के मुताबिक, MIGM दुश्मन की समुद्री गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद करेगा, जबकि NSUAS उन्नत सेंसर के जरिए नौसेना की निगरानी क्षमता बढ़ाएगा।

भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग बेस्ड हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) समेत अन्य प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली लंबी अवधि तक इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगी।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन खरीद प्रस्तावों का उद्देश्य तीनों सेनाओं की युद्ध तैयारी को और मजबूत करना तथा आधुनिक तकनीकों से लैस रक्षा प्रणाली विकसित करना है।



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