हाईकोर्ट का फैसला-आसाराम को करना होगा सरेंडर, सजा बरकरार: नाबालिग से यौन उत्पीड़न केस में 2 आरोपी बरी, करीब एक महीने बाद सुनाया डिसीजन – Jodhpur News

हाईकोर्ट का फैसला-आसाराम को करना होगा सरेंडर, सजा बरकरार:  नाबालिग से यौन उत्पीड़न केस में 2 आरोपी बरी, करीब एक महीने बाद सुनाया डिसीजन – Jodhpur News




राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने बुधवार (27 मई) सुबह आसाराम की सजा पर फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के केस में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस अरूण मोंगा व जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। केस में सह आरोपी शिल्पी व शरतचंद को बरी किया गया है। आसाराम फिलहाल अंतरिम जमानत पर है, लेकिन उसे अब सरेंडर करना होगा। सबसे पहले जानिए- क्या है पूरा मामला? अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ रेप केस के आरोप में आसाराम को गिरफ्तार किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को उन्हें दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। करीब 3 महीने की सुनवाई के बाद डिसीजन हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक चली डे-टू-डे सुनवाई हुई थी। खंडपीठ ने 20 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके 27 मई को सुनाया गया। सुनवाई के दौरान क्या रहे दोनों पक्षों के तर्क… बचाव पक्ष का तर्क: आसाराम के वकीलों ने इसे मनगढ़ंत मामला बताते हुए कहा कि पीड़िता के माता-पिता के बयानों में भारी विरोधाभास है। घटना की रात आसाराम और पीड़िता के बीच कोई कॉल रिकॉर्ड नहीं मिला। बचाव पक्ष ने ‘समानता के सिद्धांत’ का हवाला देते हुए कहा कि जब इसी साक्ष्य के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने सह-आरोपी शरद और प्रकाश को बरी कर दिया, तो आसाराम को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है। अभियोजन पक्ष का तर्क: पीड़िता के अधिवक्ता पी.सी. सोलंकी और सरकारी वकीलों ने दलील दी कि पॉक्सो मामलों में पीड़िता का एकल बयान ही सजा के लिए पर्याप्त साक्ष्य होता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्थापित किया है। अभियोजन ने कहा कि गवाहों की सिलसिलेवार हत्याएं और हमले इस बात का खुला प्रमाण हैं कि आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की साजिश रची, जो उसके अपराध को साबित करता है। एक और केस मिली चुकी है आजीवन कैद की सजा इसके अलावा जनवरी 2023 में गुजरात के गांधीनगर आश्रम में एक महिला अनुयायी के साथ दुष्कर्म के मामले में भी आसाराम को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। 86 वर्षीय आसाराम बढ़ती उम्र और बीमारियों के चलते लगातार जमानत का प्रयास कर रहा था। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम जमानत दी थी। जिसकी टाइम को कोर्ट ने कई बार बढ़ाया है। …. ये खबर भी पढ़िए… आसाराम की 7 जुलाई तक बढ़ी अंतरिम जमानत:मेडिकल आधार पर बढ़ाई अवधि; हाईकोर्ट ने सजा स्थगन मामले पर 20 अप्रैल से फैसला रखा रिजर्व राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने रेप केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को फिर राहत दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने मेडिकल ग्राउंड पर मिली अंतरिम जमानत की अवधि को 7 जुलाई तक बढ़ा दिया है। (पढ़िए पूरी खबर)



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