हड़ताल की वजह से आम जनता की सुविधाएं बंद – Jalandhar News
भास्कर न्यूज | जालंधर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ अफसरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जिले के 198 आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद हैं। पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उदासीन रवैये से नाराज सीएचओ ने 22 जून से काम बंद कर दिया है, जिससे मरीजों को बिना इलाज और दवाओं के ही मजबूरन वापस लौटना पड़ रहा है।मंगलवार को भी इन सभी केंद्रों की ओपीडी पूरी तरह बंद रहेगी। अपनी आगे की रणनीति तय करने के लिए आज सीएचओ की एक अहम मीटिंग बुलाई गई है। कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो 2 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। सीएचओ डा. पंखुड़ी और अन्य कर्मचारियों का कहना है कि वे कोविड महामारी, टीबी मुक्त पंजाब, एनसीडी स्क्रीनिंग और राष्ट्रीय टीकाकरण जैसे बड़े कार्यक्रमों में दिन-रात योगदान दे रहे हैं, फिर भी सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। टेलीमेडिसिन व दवाएं : मरीजों का ऑनलाइन डॉक्टरों से परामर्श और मुफ्त मिलने वाली दवाइयां बंद हैं। मातृ-शिशु देखभाल : गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और बच्चों का टीकाकरण ठप है। गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग : शुगर, बीपी, कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग और आयुर्वेदिक सेवाएं बंद हैं। रेफरल सेवा : गंभीर रूप से बीमार मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की सुविधा भी प्रभावित हुई है। मरीज की जुबानी : गढ़ा के रहने वाले मरीज अमित ने बताया कि वे आयुष्मान आरोग्य केंद्र से चर्म रोग का आयुर्वेदिक इलाज करवा रहे थे। केंद्र बंद होने के कारण अब उन्हें मजबूरी में बहुत दूर स्थित सिविल अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। नियमितीकरण : एनएचएम में कार्यरत सभी कर्मचारियों को तुरंत पक्का (स्थायी) किया जाए। समान काम, समान वेतन : इक्वल वर्क, इक्वल पे की नीति को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। भत्ते व वित्तीय लाभ : बंद पड़े लॉयल्टी बोनस को दोबारा बहाल किया जाए और वेतन में उचित बढ़ोतरी हो। सेवा सुरक्षा व तरक्की : सभी कर्मचारियों को जॉब सिक्योरिटी और प्रमोशन के उचित अवसर दिए जाएं।
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