सरकार बोली- एथेनॉल फ्यूल में चीटियां लगने का वीडियो फेक: पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने की बात गलत; इंजन खराब होने की कोई रिपोर्ट नहीं

सरकार बोली- एथेनॉल फ्यूल में चीटियां लगने का वीडियो फेक:  पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने की बात गलत; इंजन खराब होने की कोई रिपोर्ट नहीं


नई दिल्ली5 मिनट पहले

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सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो है, जिसमें एथेनॉल की वजह से फ्यूल टैंक के पास चींटियां लगने का दावा किया गया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एथेनॉल फ्यूल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम सांइटिफिक रूप से प्रमाणित है और इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।

हाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वाहन के फ्यूल टैंक के पास चींटियां दिखाई गई थीं। इस पर भारत पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल में कोई शर्करा (चीनी) नहीं होती।

मंत्रालय के अनुसार, कुछ लोग पुराने वीडियो और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर दोबारा शेयर कर जनता में भ्रम फैला रहे हैं। सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल डालने के बाद इंजन खराब होने की कोई रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है।

E20 पेट्रोल से वाहन बीमा पर कोई असर नहीं

केंद्र सरकार ने यह भी साफ किया है कि E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल फ्लेक्स ईंधन) के इस्तेमाल से वाहन बीमा (इंश्योरेंस) की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। सरकार ने कहा कि इस तरह की आशंकाएं गलत हैं और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद इन्हें खारिज कर दिया गया है।

सरकार के अनुसार, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। ब्राजील में तो E27 लंबे समय से ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

एथेनॉल के इस्तेमाल से सरकार ने 3 फायदे गिनाए

  • 1.4 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची: सरकार ने बताया कि एथेनॉल प्रोग्राम की वजह से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। जिससे देश को अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है।
  • किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा: सरकार ने कहा कि एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली कृषि उपज की मांग बढ़ने से किसानों की आय को समर्थन मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और पॉल्यूशन कंट्रोल में मदद: बयान के मुताबिक, एथेनॉल फ्यूल देश की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर रहा है और कार्बन उत्सर्जन कम कर रहा है।

क्या होता है एथेनॉल?

एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस से होता है, लेकिन स्टार्च कॉन्टेनिंग मटेरियल्स जैसे मक्का, सड़े आलू, कसावा और सड़ी सब्जियों से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है।

फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठा ज्वार और मक्का से बनाया जाता है।

सेकेंड जनरेशन एथेनॉल : सेकेंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे- चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है।

थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल : थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल को एलगी से बनाया जाएगा। अभी इस पर काम चल रहा है।

15 दिन पहले लॉन्च हुआ था E85 फ्यूल, बायोफ्यूल पर सरकार का फोकस

15 दिन पहले सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन पेश किया था। दिल्ली में E85 फ्यूल की कीमत ₹82.12 प्रति लीटर तय की गई। यह दिल्ली में बिक रहे रेगुलर E20 पेट्रोल से पूरे ₹20 कम है।

यह ईंधन एक ऐसा मिश्रण है जिसमें 85% तक इथेनॉल और 15% पेट्रोल मिलाया जाता है। अब 100% इथेनॉल को मंजूरी मिलने से देश में ग्रीन एनर्जी और बायोफ्यूल के सेक्टर में एक नया चैप्टर शुरू हो गया है। अभी बाजार में 4 तरह के फ्लेक्स-फ्यूल बिक रहे हैं।

सिर्फ इन चुनिंदा गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकेगा

E85 फ्यूल को सामान्य पेट्रोल गाड़ियों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसके लिए गाड़ियों का इंजन खास तौर पर ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ तकनीक पर आधारित होना चाहिए।

  • मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल: यह भारत की पहली पैसेंजर कार है, जिसे E100 (100% एथेनॉल) तक के ब्लेंड पर चलने के लिए तैयार किया गया है, जो E85 के लिए पूरी तरह सही है।
  • हीरो स्प्लेंडर+ और HF डीलक्स: हीरो मोटोकॉर्प ने देश के मास-मार्केट 100cc सेगमेंट में पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल पेश की है। ये बाइक्स E20 से लेकर E85 तक के फ्यूल पर चल सकती हैं और दिल्ली और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में जुलाई 2026 से इनकी बिक्री शुरू होगी।
  • सुजुकी जिक्सर SF: यह बाइक भी इस सूची में शामिल है जो हाई-एथेनॉल फ्यूल को सपोर्ट करती है।

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