मणिपुर में नया मोर्चा- 5 महीने में 25 मारे गए: हिंसा अब नगा और कुकी समुदायों के बीच शिफ्ट; असम राइफल्स बनी निशाना

मणिपुर में नया मोर्चा- 5 महीने में 25 मारे गए:  हिंसा अब नगा और कुकी समुदायों के बीच शिफ्ट; असम राइफल्स बनी निशाना


इम्फाल2 घंटे पहलेलेखक: डी. कुमार

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नगा ग्रामीणों का आरोप है कि असम राइफल्स भारत-म्यांमार की 398 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित रखने में नाकाम रही है।

मणिपुर में मई 2023 से जारी मैतेई-कुकी जातीय हिंसा के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है। राज्य में जारी हिंसा अब नगा और कुकी समुदायों के बीच शिफ्ट हो गई है। उखरुल इसका हॉटस्पॉट बन गया है। बीते फरवरी से शुरू हुए इस ताजा संघर्ष में अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है।

भारत-म्यांमार सीमा की निगरानी करने वाली असम राइफल्स के काफिले पर सोमवार को हुआ हमला भी इसी का नतीजा बताया जा रहा है। इस हमले में उत्तराखंड के दो जवान शहीद हो गए थे।

दरअसल, नगा ग्रामीणों का आरोप है कि असम राइफल्स भारत-म्यांमार की 398 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित रखने में नाकाम रही है। नगा समुदाय के लोग असम राइफल्स पर कुकी समुदाय को लेकर नरमी का आरोप लगाते रहे हैं।

उनका कहना है कि म्यांमार की तरफ से हथियारबंद गुट ‘कुकी नेशनल आर्मी (बर्मा)’ लगातार सीमा पार कर नगा गांवों पर हमले कर रही है। यह नाराजगी छह अगवा नगा लोगों के क्षत-विक्षत शव 10 जून को मिलने और कामजोंग जिले में नगा गांवों को जलाए जाने के बाद और बढ़ गई।

उखरुल में उग्रवादियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते असम राइफल्स के जवान।

उखरुल में उग्रवादियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते असम राइफल्स के जवान।

पिछले 14 दिनों में हुई सख्त कार्रवाई से हताशा में उग्रवादी

असम राइफल्स ने काफिले पर हमले को उग्रवादी समूहों की हताशा बताया। दरअसल, असम राइफल्स लगातार आक्रामक रुख बनाए हुए है। चार दिन पहले ही थोयी और जालेनबुंग गांवों में उग्रवादियों के दो बड़े बंकरों को नष्ट किया था।

वहीं, 28 जून से 4 जुलाई तक संयुक्त अभियान में सेना ने भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया था और तीन उग्रवादियों को गिरफ्तार किया था। स्थिति को संभालने के लिए कई बफर जोन बनाए गए हैं।

34 साल से जारी संघर्ष

1992-1998 का नगा-कुकी जातीय संघर्ष जमीन पर वर्चस्व और उग्रवादी गुटों की जबरन वसूली को लेकर शुरू हुआ था। इस संघर्ष का सबसे काला दिन 13 सितंबर 1993 था, जब ‘जौपी हत्याकांड’ में संदिग्ध नगा उग्रवादियों ने 115 कुकी नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी थी।

कुकी समुदाय आज भी इसे ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाता है। बीते छह साल में दोनों पक्षों के 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।

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