पाकिस्तान में ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब को गिराने पर रोष: संत सीचेवाल ने PM मोदी, विदेश मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की – Kapurthala News
पाकिस्तान के लाहौर से महज 70 किलोमीटर दूर फारूकाबाद में स्थित 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब को बुल्डोजर के जमींदोज करने से लेकर भारत में आक्रोष है। इस घटना को लेकर राज्यसभा सदस्य और पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने गहरा दुख और कड़ा रोष व्यक्त किया है। टउन्होंने इस मामले को वैश्विक सिख समुदाय की आस्था से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा बताते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को आपातकालीन पत्र लिखकर तत्काल राजनयिक हस्तक्षेप ( की मांग की है।संत सीचेवाल ने उम्मीद जताई है कि भारत सरकार इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाएगी। प्रभावशाली कारोबारी और औकाफ बोर्ड की मिलीभगत का आरोप मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय इनपुट के अनुसार, इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को ढहाने के पीछे पाकिस्तान के एक रसूखदार और प्रभावशाली कारोबारी का हाथ बताया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार ‘इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ (औकाफ बोर्ड) ने सब कुछ जानते हुए भी इस मामले में भू-माफिया को रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे वहां के सिखों में भारी आक्रोश है। “यह इमारत गिराना नहीं, सिख विरासत पर सीधा हमला है” प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री को भेजे अपने आधिकारिक पत्र में संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने इस कायरतापूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने लिखा कि गुरु घर को पहुंचाया गया यह नुकसान केवल एक ऐतिहासिक इमारत को गिराना नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में बसे करोड़ों सिखों की धार्मिक भावनाओं, उनके स्वाभिमान और गौरवमयी सिख विरासत पर एक सीधा और गंभीर हमला है। इस अमानवीय घटना से वैश्विक सिख समुदाय के हिरदे छलनी हो गए हैं और उनमें गहरा रोष व्याप्त है।” ‘ननकाना साहिब के साके’ का दिया हवाला सिख इतिहास का उल्लेख करते हुए संत सीचेवाल ने पत्र में याद दिलाया कि सिख कौम ने अपने गुरुधामों की सेवा-संभाल, मर्यादा और रक्षा के लिए हमेशा बड़ी से बड़ी कुर्बानियां दी हैं। इतिहास गवाह है कि ‘श्री ननकाना साहिब के साके’ के दौरान सिखों ने गुरु घरों की गरिमा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। ऐसे में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के साथ ऐसी बर्बरता बर्दाश्त से बाहर है। भारत सरकार से संत सीचेवाल ने की ये मुख्य मांगें:
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