पठानकोट में 200 परिवारों पर मंडराया बाढ़ का खतरा: चक्की दरिया में डी-सिल्टिंग के पक्ष में आए लोग; कहा- राजनीति की भेंट चढ़ा सुरक्षा काम – Pathankot News
पठानकोट के वार्ड-12 से सटे चक्की दरिया में डी-सिल्टिंग के नाम पर अवैध माइनिंग के आरोपों के बीच कुछ परिवार हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका के विरोध में उतर आए हैं। मंगलवार को कई परिवारों ने डी-सिल्टिंग का काम बंद किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि डी-सिल्टिंग का काम रुकने से चक्की दरिया के किनारे बसे करीब 200 परिवारों पर एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। उनका दावा है कि दरिया के पानी का रुख मोड़ने और सुरक्षा के लिए कंक्रीट क्रेट लगाने का लगभग 70 से 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन कुछ स्थानीय लोगों के विरोध और राजनीतिक रंजिश के चलते इसे बीच में ही रोक दिया गया। काम रुकने के बाद से स्थानीय निवासियों में रोष और चिंता का माहौल है। प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नेताओं ने जिला प्रशासन तथा पंजाब सरकार से डी-सिल्टिंग का काम जल्द दोबारा शुरू कराने की मांग की है। लोगों का दावा, खतरे में 200 से अधिक परिवार प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चक्की दरिया के बिल्कुल किनारे बसे परिवार हर बारिश के मौसम में भय के साये में जीते हैं। उनके अनुसार, रात में भी वे चैन से सो नहीं पाते क्योंकि जान-माल पर हर समय खतरा बना रहता है। लोगों ने बताया कि पंजाब सरकार और कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क के प्रयासों से सुरक्षा के लिए कंक्रीट क्रेट लगाने और मिट्टी हटाकर दरिया के पानी का रुख मोड़ने का काम अंतिम चरण में पहुंच चुका था, लेकिन इसे बीच में ही रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यदि यह काम जल्द पूरा नहीं हुआ तो करीब 200 घरों पर बाढ़ का खतरा मंडराएगा। साथ ही, प्रसिद्ध पंच अंबी मंदिर और नेशनल हाईवे को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। रात-रात भर जागकर काटने पड़ते हैं दिन दरिया किनारे रहने वाली महिला मधुबाला ने रोष जताते हुए कहा कि पिछले 25-30 वर्षों में किसी भी सरकार या जनप्रतिनिधि ने उनके वार्ड की सुध नहीं ली। उनके अनुसार, स्थानीय आप नेता सचिन के प्रयासों और पंजाब सरकार के सहयोग से यहां सुरक्षा संबंधी काम शुरू हुआ था, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध कर काम रुकवा दिया। मधुबाला ने कहा कि जिन लोगों ने काम रुकवाया है, उनके घर सुरक्षित स्थान पर हैं। उन्हें हमारे दर्द का अहसास नहीं है। बारिश के दौरान जब दरिया का जलस्तर बढ़ता है, तो हमें डर के कारण रातों-रात अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि दरिया के पानी का निकास दूसरी ओर करने के लिए मिट्टी हटाने का काम जल्द से जल्द दोबारा शुरू कराया जाए। बहाव ना मोड़ा तो तबाह हो जाएंगे घर बुजुर्ग मक्खन चंद का कहना है कि दरिया के बिल्कुल नजदीक करीब 200 घर हैं। बरसात के दिनों में पानी का बहाव इतना तेज होता है कि रात को हमारी आंखों से नींद गायब हो जाती है। अगर पानी का रुख मोड़ने के लिए दरिया को और गहरा कर के काम पूरा नहीं किया गया, तो हमारे सारे घर तबाह हो जाएंगे। प्रशासन को तुरंत इस तरफ ध्यान देना चाहिए। राजनीति चमकाने के लिए बंद करवाया गया काम: आप वार्ड नंबर 12 से आम आदमी पार्टी के नेता सचिन कुमार ने कहा कि पंजाब सरकार और कैबिनेट मंत्री लालचंद कटारूचक्क के सहयोग से समस्या का हल निकाला जा रहा था। सचिन ने बताया कि विभाग की तरफ से 2 मुख्य जगहों पर सुरक्षा क्रेट लगाए गए हैं। एक जगह 1500 फीट और दूसरी जगह 630 फीट लंबा क्रेट लगाया गया है। सचिन ने बताया कि दरिया में पिछले 50-60 सालों से जमा मिट्टी के कारण पानी का रुख आबादी की तरफ हो गया था और दरिया लोगों के घरों के महज 50 फीट पास तक पहुंच गया था। माइनिंग विभाग के SDO और JE की देखरेख में मिट्टी हटाकर पानी का रुख दूसरी तरफ मोड़ने का काम 80% तक पूरा कर लिया गया था। सचिन ने आरोप लगाया कि जो लोग आज इस जनहित के काम के खिलाफ पिटीशन डाल रहे हैं, वे कभी खुद एमसी रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल में जनता को बचाने के लिए एक उंगली तक नहीं उठाई। आज केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए इस काम को बंद करवा दिया गया है। डीसी और पंजाब सरकार से गुहार लगाई लोगों और जनप्रतिनिधियों ने डीसी और पंजाब सरकार से गुहार लगाई है कि राजनीति से ऊपर उठकर इंसानी जिंदगियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और चक्की दरिया पर बंद पड़े इस सुरक्षा कार्य को तुरंत प्रभाव से दोबारा बहाल कराया जाए।
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