पठानकोट में मानसून से पहले बाढ़ का खतरा: पिछले साल की तबाही को याद कर सहमे लोग; कहा-प्रशासन मजबूत सुरक्षा बांध बनाए – Pathankot News

पठानकोट में मानसून से पहले बाढ़ का खतरा:  पिछले साल की तबाही को याद कर सहमे लोग; कहा-प्रशासन मजबूत सुरक्षा बांध बनाए – Pathankot News




पठानकोट में मानसून जुलाई के पहले सप्ताह दस्तक देने जा रहा है। इसके साथ ही पठानकोट और इसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों के निवासियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। पिछले साल मूसलाधार बारिश के कारण रावी दरिया में आए उफान और उससे मची भारी तबाही की भयावह यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। बरसात शुरू होते ही रावी दरिया के किनारे बसे गांवों, विशेषकर कोहलियां गांव के निवासियों में चिंता, डर और गहरी आशंका का माहौल देखा जा रहा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि इस बार भी भारी वर्षा हुई तो पिछले साल जैसी विनाशकारी बाढ़ फिर से आ सकती है, जिससे उनका बचा-कुचा आशियाना भी छिन जाएगा। पिछले साल रावी के उफान ने मचाई थी भयंकर तबाही गौरतलब है कि पिछले वर्ष मॉनसून के दौरान पठानकोट और उससे सटे इलाकों में प्रकृति का ऐसा कहर टूटा था जिसे लोग आज तक नहीं भूल पाए हैं। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद रावी दरिया का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया था। इस उफान के कारण दर्जनों परिवारों के पक्के और कच्चे घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। कई ग्रामीणों का एकमात्र सहारा उनका पशुधन पानी के तेज बहाव में बह गया था। फसलों और घरेलू सामान के नष्ट होने से सैकड़ों परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था, जिससे वे आज तक उबर नहीं पाए हैं। इनमें से कोहलियां गांव सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था, जहाँ पानी का बहाव इतना तेज था कि रातों-रात लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी। अपर्याप्त और कमजोर तटबंधों पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा कोहलियां गांव और आसपास के प्रभावित इलाकों के निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने पिछले साल की तबाही से कोई बड़ा सबक नहीं लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में बने सुरक्षा बंध और तटबंध (धुस्सी बांध) इतने कमजोर और अपर्याप्त हैं कि वे पानी के भारी दबाव को झेलने में पूरी तरह अक्षम हैं।
हर साल बरसात के दिनों में इन बांधों के टूटने या दरार आने का खतरा बना रहता है, जिसके कारण पूरा इलाका हमेशा मौत के साये में जीता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ कागजी तैयारियों और खानापूर्ति से जमीनी स्तर पर बाढ़ को नहीं रोका जा सकता। ग्रामीणों की सरकार से गुहार और गंभीर चेतावनी बढ़ते खतरे को देखते हुए कोहलियां और आसपास के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पंजाब सरकार से बेहद संवेदनशील रुख अपनाने की मांग की है। ग्रामीणों की मुख्य मांगें और चेतावनी निम्नलिखित हैं:
तत्काल सुदृढ़ीकरण: बाढ़ संभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बंधों तथा तटबंधों को जल्द से जल्द पत्थरों व पुख्ता निर्माण से मजबूत किया जाए।
अग्रिम सुरक्षा: बरसात के दौरान पानी के तेज बहाव को गांवों में घुसने से रोकने के लिए अग्रिम सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं ताकि जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
आंदोलन की चेतावनी: ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने उचित और ठोस कदम नहीं उठाए, तो इस बार भी हालात बेकाबू और गंभीर हो सकते हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति या जान-माल के नुकसान की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर शासन और संबंधित विभाग की होगी।
अब देखना यह होगा कि मानसून की इस दस्तक के बीच प्रशासन कितनी फुर्ती दिखाता है और इन डरे हुए ग्रामीणों को तबाही से बचाने के लिए क्या जमीनी कदम उठाता है।



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