पठानकोट के भट्ठा मजदूरों की जीत: संघर्ष के बाद नए मजदूरी रेट लागू, 1 मई के बाद बढ़ी दरों से भुगतान – Pathankot News

पठानकोट के भट्ठा मजदूरों की जीत:  संघर्ष के बाद नए मजदूरी रेट लागू, 1 मई के बाद बढ़ी दरों से भुगतान – Pathankot News




पठानकोट में भट्ठा मजदूरों को लंबे संघर्ष के बाद नए मजदूरी रेट लागू कराने में सफलता मिली है। 2 जून को भट्ठा मालिक एसोसिएशन और लाल झंडा पंजाब भट्ठा लेबर यूनियन के बीच हुए समझौते को लागू करने में कुछ मालिकों द्वारा अड़चनें पैदा की जा रही थीं। इसके विरोध में सैकड़ों मजदूर जिला मुख्यालय मलिकपुर, पठानकोट में लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। मजदूरों को समझौते के अनुसार पूरी मजदूरी दिलाने के लिए सहायक श्रम आयुक्त (एएलसी) पठानकोट कुंवर डावर ने हस्तक्षेप किया। उनके निर्देश पर भट्ठा मालिकों को श्रम विभाग कार्यालय बुलाया गया। लेबर यूनियन नेताओं और भट्ठा मालिकों के बीच हुई बैठक के बाद पूर्व में हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने पर पुनः सहमति बनी। 1 मई के बाद किए कार्यों के ज्यादा मिलेंगे पैसे समझौते के अनुसार, 30 अप्रैल तक के कार्य के लिए मजदूरों को 987 रुपये प्रति हजार ईंट और 1 मई के बाद किए गए कार्य के लिए 1138 रुपये प्रति हजार ईंट की दर से भुगतान किया जाएगा। एक अन्य विवादित मुद्दे का समाधान करते हुए यह भी तय हुआ कि जिन भट्ठों पर मालिक स्वयं गारा (मिट्टी) तैयार करके देंगे, वहां मजदूरों को 918 रुपये प्रति हजार ईंट की दर से भुगतान मिलेगा। मजदूरी का हिसाब-किताब तुरंत किया जाएगा और सर्दी सीजन का बकाया भुगतान भी प्राथमिकता के आधार पर होगा। असिस्टेंट लेबर कमिश्नर कुंवर डावर ने यूनियन नेताओं को आश्वासन दिया कि वे स्वयं भट्ठों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि मजदूरों को आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यकता पड़ने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर उपस्थित महिला एवं पुरुष भट्ठा मजदूरों को संबोधित करते हुए मजदूर नेता कामरेड शिव कुमार, किसान नेता कामरेड बलवंत सिंह घोह, और मजदूर नेता मनहरन तथा देव राज सैली कुलियां ने कहा कि मजदूरों की एकजुटता के कारण ही पहले समझौता संभव हो पाया था। इसी एकता की बदौलत अब समझौते को लागू करवाना भी सुनिश्चित हुआ है। बैठक और वार्ता के दौरान रामदयाल तथा प्रशोत्तम भी उपस्थित रहे। यूनियन नेताओं ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें उनका पूरा मेहनताना दिलाने के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।



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