गुरदासपुर में शिअद हलका इंचार्ज ने AAP की जॉइन: कादियां में गुरइकबाल का मजबूत आधार; CM मान ने पार्टी में करवाया शामिल – Pathankot News

गुरदासपुर में शिअद हलका इंचार्ज ने AAP की जॉइन:  कादियां में गुरइकबाल का मजबूत आधार; CM मान ने पार्टी में करवाया शामिल – Pathankot News




पंजाब की राजनीति में वीरवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब कादियां हलके में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख चेहरे और हलका इंचार्ज गुरइकबाल सिंह माहल ने पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। उनके इस फैसले को कादियां क्षेत्र में अकाली दल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। गुरइकबाल सिंह माहल को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की मौजूदगी में चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी में शामिल कराया गया। पार्टी में शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और कादियां क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई अटकलें लगाई जा रही हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कादियां नगर परिषद चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने गुरइकबाल सिंह माहल की अगुआई में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। चुनाव परिणामों को अकाली दल के लिए बड़ी सफलता माना गया था। ऐसे में चुनाव के तुरंत बाद माहल का पार्टी छोड़ना अकाली नेतृत्व के लिए अप्रत्याशित घटनाक्रम माना जा रहा है। लंबे समय से कादियां में सक्रिय हैं गुरइकबाल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गुरइकबाल सिंह माहल लंबे समय से कादियां क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और उनका स्थानीय स्तर पर अच्छा जनाधार माना जाता है। ऐसे में उनके आम आदमी पार्टी में शामिल होने से क्षेत्र में पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है। माहल के पार्टी बदलने के बाद कादियां की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। विपक्षी दलों के नेता भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, आम आदमी पार्टी इसे अपने संगठन के विस्तार और मजबूती की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। गुरइकबाल ने अभी तक स्पष्ट नहीं किए कारण
गुरइकबाल सिंह माहल ने पार्टी बदलने के पीछे के कारणों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे आगामी चुनावी रणनीति और बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। कादियां क्षेत्र में माहल की राजनीतिक पकड़ को देखते हुए आने वाले दिनों में इस फैसले का असर स्थानीय राजनीति पर दिखाई दे सकता है। फिलहाल उनका आम आदमी पार्टी में शामिल होना पंजाब की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और इससे क्षेत्रीय सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है।



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