पठानकोट में एमबी लिंक नहर के खिसक रहे किनारे: बरसात से पहले नहीं की गई मरम्मत, लोगों ने विभाग के खिलाफ जताई नाराजगी – Pathankot News

पठानकोट में एमबी लिंक नहर के खिसक रहे किनारे:  बरसात से पहले नहीं की गई मरम्मत, लोगों ने विभाग के खिलाफ जताई नाराजगी – Pathankot News




पठानकोट में माधोपुर से मलिकपुर तक बहने वाली मुख्य माधोपुर-ब्यास लिंक नहर के किनारे लगातार खिसकने और कई स्थानों पर हो रहे मिट्टी के कटाव के कारण स्थानीय निवासियों में भारी चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन और नहरी विभाग से गुहार लगाई है कि बरसात का मौसम शुरू होने से पहले नहर के इन क्षतिग्रस्त किनारों की मरम्मत का काम पूरा किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे या जान-माल के नुकसान को समय रहते टाला जा सके। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, नहर के किनारों में आई गहरी दरारों और लगातार हो रहे कटाव के कारण नहर का पानी कई लिंक रोड (संपर्क मार्गों) तक पहुंच चुका है। लोगों को सबसे बड़ी आशंका यह है कि आगामी मानसून के दौरान जब नहर में पानी का बहाव बढ़ेगा, तो यह कटाव और विकराल रूप ले सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो पानी पंजाब और जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाले मुख्य नेशनल हाईवे (National Highway) तक पहुंच सकता है। इससे न केवल दोनों राज्यों के बीच का यातायात पूरी तरह बाधित होगा, बल्कि क्षेत्र को भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। पिछली त्रासदी से भी नहीं लिया सबक; लोगों में भारी रोष ग्रामीणों ने पिछले साल हुए दर्दनाक हादसे को याद करते हुए बताया कि उस समय भी नहर के किनारे टूटने से कई इलाकों में तबाही मची थी। उस हादसे में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसके अलावा, दर्जनों घर ढह गए थे और सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई थी। कुल मिलाकर प्रभावित परिवारों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।
लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी त्रासदी और भारी नुकसान के बावजूद नहरी विभाग ने इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला है। स्थानीय निवासियों ने विभाग के सुस्त रवैये पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन अक्सर किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार करता है और उसके बाद ही जागता है। अधिकारियों को प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार प्रशासनिक मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। विभागीय स्वीकृति मिलते ही प्रभावित स्थानों पर मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, जल्द ही समाधान किया जाएगा। -राजीव कुमार, एसडीओ (नहरी विभाग)



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