पठानकोट पहुंचे श्वेत मलिक ने सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा किया: बाढ़ प्रभावित इलाकों का लिया जायजा, लोगों की सुनी मुश्किलें, पंजाब सरकार पर साधा निशाना – Pathankot News

पठानकोट पहुंचे श्वेत मलिक ने सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा किया:  बाढ़ प्रभावित इलाकों का लिया जायजा, लोगों की सुनी मुश्किलें, पंजाब सरकार पर साधा निशाना – Pathankot News




भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक ने भारत-पाक सीमा से सटे पठानकोट के बमियाल और नरोट जैमल सिंह का दौरा कर बाढ़ के संभावित खतरे का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बात कर उनकी मुश्किलें सुनी और पंजाब सरकार पर तीखे शब्दी प्रहार किए। उनके साथ पार्टी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। श्वेत मलिक ने अपने दौरे की शुरुआत नरोट जैमल सिंह के कोहलियां गांव से की। गौरतलब है कि पिछले साल रावी नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण इस गांव को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। ग्रामीणों ने पूर्व सांसद को अपनी समस्याओं से करवाया अवगत स्थानीय लोगों ने पूर्व सांसद को बताया कि रावी नदी के किनारे एक सुरक्षा बांध बनाया जाना प्रस्तावित था। इस सुरक्षा बांध के बनने से क्षेत्र के लगभग 90 गांवों को बाढ़ के प्रकोप से बचाया जा सकता था। आपदा को पूरा एक साल बीत जाने के बावजूद पंजाब सरकार ने अभी तक इस बांध का निर्माण शुरू नहीं कराया है, जिससे इस मानसून में भी दर्जनों गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। 1400 करोड़ की आपदा निधि पर पंजाब सरकार को घेरा बाढ़ रोकथाम के इंतज़ामों का निरीक्षण करने के बाद श्वेत मलिक ने पंजाब सरकार पर कड़ा प्रहार किया। श्वेत मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब में आपदा प्रबंधन और बाढ़ रोकथाम के लिए 1400 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी, लेकिन राज्य सरकार ने ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सरकार केवल विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पिछले साल की बाढ़ के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग फिर से बाढ़ के साये में जीने को मजबूर हैं। उज्ज और जलालिया दरिया का भी लिया जायजा नरोट जैमल सिंह के बाद श्वेत मलिक ने बमियाल क्षेत्र का रुख किया। वहां उन्होंने उज्ज और जलालिया दरिया के तटीय इलाकों का दौरा किया तथा जलस्तर व सुरक्षा इंतज़ामों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते पुख्ता इंतज़ाम नहीं किए गए, तो सीमावर्ती इलाकों को एक बार फिर भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *