पंजाब के गांवों में होगी दिलजीत की ‘सतलुज’ की सक्रीनिंग: गुरदासपुर से शुरूआत, गुरुघरों के प्रबंधकों और किसान संगठन आए आगे, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का मिला साथ – Pathankot News
मशहूर पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की विवादों में रही फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पंजाब में एक नया मोड़ सामने आया है। ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद इस फिल्म को लेकर लोगों में उत्सुकता बेहद बढ़ गई है। मंगलवार देर शाम गुरदासपुर के गांव मांनचोपड़ा में रात को गांव के लोगों को सतलुज दिखाई गई और यह फिल्म गांव के लोगों को दिखाने के लिए गुरुद्वारा साहिब में पहले अनाउंसमेंट भी की गई।
इसी के मद्देनजर पठानकोट शहर के 2 प्रमुख गुरुद्वारों ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आज और कल इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग करने की बात कही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, फिल्म ‘सतलुज’ का प्रदर्शन पठानकोट के दो प्रमुख गुरुद्वारों में आज और कल देर शाम 8 बजे किया जाएगा।
गुरुद्वारा प्रबंधकों का कहना है कि फिल्म को देखने के लिए संगत और खासकर युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है,जिसे देखते हुए बड़े पर्दे पर इसकी स्क्रीनिंग की पूरी तैयारी कर ली गई है। पठानकोट शहर के गुरुद्वारा सिंहसभा मॉडल टाउन में आज यानि बुधवार रात 8 बजे और वीरवार को गुरुद्वारा सिंह सभा सेंट्रल (रानीपुर) में देर शाम 8 बजे दिखाई जाएगी।
भारतीय किसान यूनियन चढूनी के पंजाब यूथ अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह बैंस का कहना है कि ये शुरूआत फिल्हाल गुरदासपुर से की गई है। लोगों को काफी उत्सुकता है। पूरे पंजाब में इस फिल्म को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। प्रबंधकों का आरोप: इतिहास को दबाने की हो रही साजिश
इस मामले पर गुरुद्वारा प्रबंधकों ने कहा कि इस फिल्म में पंजाब के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय को दर्शाया गया है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। इसी इतिहास को जनता के सामने आने से रोकने और दबाने के लिए फिल्म को जानबूझकर ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाया गया है। लेकिन हम युवा पीढ़ी को हमारे इतिहास से दूर नहीं होने देंगे। गुरुघरों में इस फिल्म को दिखाकर युवाओं को भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके बलिदान के बारे में जागरूक किया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों की राय: “स्क्रीनिंग में कोई कानूनी उल्लंघन नहीं”
फिल्म के गुरुघरों में दिखाए पर पठानकोट के वरिष्ठ अधिवक्ता विशाल कोहली का कहना है कि इसमें किसी भी प्रकार के कानून का उल्लंघन जैसी कोई बात नहीं है। यह फिल्म सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब पर भी स्वतंत्र रूप से देखी जा रही है। ऐसे में गुरुद्वारा परिसरों में संगत के लिए इसका प्रदर्शन करना कानूनी रूप से गलत नहीं है। दिलजीत की फिल्म को DSGMC का साथ, कमेटी बोली फिल्म पर रोक गलत
दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) ने फिल्म पर लगी रोक पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे सोशल एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा की कहानी को दबाने की कोशिश बताया है। कमेटी ने यह भी घोषणा की है कि वे फिल्म को लोगों तक पहुंचाने के लिए पब्लिक स्क्रीनिंग और एजुकेशनल सेमिनार करेंगे। हनी त्रेहान के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म 1990 के दशक में पंजाब के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में से एक, खालरा के जीवन और मृत्यु पर आधारित है।
‘सतलुज’ पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी का बयान
मंगलवार 7 जुलाई को DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित यह फिल्म पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने के एक्टिविस्ट के प्रयासों को दिखाती है और इसे दर्शकों तक पहुंचने से नहीं रोका जाना चाहिए।
कालका ने कहा, क्योंकि यह फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है, इसलिए इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक सोशल एक्टिविस्ट ने लोगों के सामने सच्चाई खोली। उन्होंने 25,000 शवों के सबूत उजागर किए जिनका अंतिम संस्कार ‘लावारिस’ के तौर पर किया गया था और पंजाब की गंभीर स्थिति को उजागर करते हुए इस मुद्दे को न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया।
इस कहानी को दबाना और उस काले दौर की घटनाओं को जनता तक पहुंचने से रोकना है जो कि बहुत गलत है, और इससे सिख समुदाय में भारी आक्रोश पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि कमेटी ने फिल्म की पब्लिक स्क्रीनिंग करने और खालड़ा के जीवन और काम पर एजुकेशनल संस्थानों में सेमिनार करने का फैसला किया है।
उन्होंने आगे कहा, हमने सभी गुरुद्वारा कमेटी सदस्यों से कहा है कि वे अपने-अपने इलाकों में फिल्म डाउनलोड करें और उसकी स्क्रीनिंग करें ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। इसके अलावा, हम जल्द ही अपने स्कूलों और कॉलेजों के चेयरमैन के साथ बैठक करेंगे। हर कॉलेज में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और विरासत पर चर्चा करने के लिए सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। हम चाहते हैं कि लोग समझें कि समाज पर एक सोशल एक्टिविस्ट का क्या असर हो सकता है। रिलीज के 2 दिन बाद ही हटाई गई फिल्म
पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म को अचानक OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। खालड़ा ने आतंकवाद के दौर में पंजाब में फेक एनकाउंटर में 25 हजार युवाओं को मारने का दावा किया था। यह फिल्म 3 साल की रोक के बाद नाम बदलकर रिलीज की गई थी। पहले इसका नाम ‘पंजाब 95’ था, जिसे ‘सतलुज’ नाम से OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था। लेकिन, रिलीज के 2 दिन बाद ही इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफार्म से हटा दिया गया।
दिलजीत का छलका दर्द
फिल्म हटाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने लाइव होकर कहा कि एक इंसानियत होती है, वह इंसानियत मर गई। मुझे इस बात का दुख नहीं है कि फिल्म इंटरनेट से हटा दी गई, क्योंकि फिल्म लोगों तक पहुंच चुकी है। एक बार जो चीज इंटरनेट पर आ गई, उसे हटाना आसान नहीं है। इनके सलाहकार ठीक नहीं हैं। इस फिल्म के साथ वही हुआ, जो खालड़ा जी के साथ हुआ था। उन्होंने उन लोगों से फिल्म को दूसरों के साथ शेयर करने की अपील की, जिन्होंने इसे पहले ही डाउनलोड कर लिया था। फिल्म हटाने पर पंजाबी कलाकारों ने गुस्सा जताया है।
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