केरल की युवती से कनाडा भेजने के नाम पर ठगी: फर्जी वर्क परमिट-नकली ऑफर से ठगे 1.87 लाख; बचने के लिए 12 फोन नंबर बदले – Mohali News

केरल की युवती से कनाडा भेजने के नाम पर ठगी:  फर्जी वर्क परमिट-नकली ऑफर से ठगे 1.87 लाख; बचने के लिए 12 फोन नंबर बदले – Mohali News



मोहाली में विदेश भेजने के ना पर ठगी हुई।

मोहाली में केरल की एक युवती से कनाडा भेजने के नाम पर ठगी हुई है। ठगों ने वर्क परमिट दिलाने के नाम पर 1.87 लाख रुपये की ठगी की। पहले वे टालमटोल करते रहे। बाद में उसे फर्जी ऑफर लेटर थमा दिया। इसके बाद पीड़िता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ठगी

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अब सारे मामले को 4 प्वाइंटों में जानिए

कनाडा के लिए संपर्क किया

केरल के पालक्काड की रहने वाली प्रतीक्षा अरुणकुमार ने कनाडा में नौकरी पाने के लिए वर्ष 2024 में मोहाली के फेज-11 स्थित एक निजी कंपनी से संपर्क किया। एजेंसी ने उसे कनाडा का वर्क परमिट दिलाने का भरोसा दिया। एजेंसी ने प्रतीक्षा को कनाडा का ऑफर लेटर, एलएमआईए (LMIA) और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए।

वीजा प्रक्रिया के नाम पर करीब एक साल तक उसे भरोसे में रखा गया। एजेंसी ने उसे बताया कि वर्क वीजा की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन वास्तव में उसका बायोमेट्रिक टेंपरेरी रेजिडेंट (टूरिस्ट/विजिटर) वीजा के लिए करवाया गया। इसकी जानकारी पीड़िता को नहीं दी गई।

वीजा रद्द होने पर पता चला

आरोपियों ने एलएमआईए वर्क परमिट की सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर बैंक ट्रांसफर के जरिए 1.50 लाख रुपये जमा करवा लिए। एग्रीमेंट में कहा गया कि कनाडा पहुंचने के छह महीने के भीतर यह राशि वापस कर दी जाएगी। कुल मिलाकर पीड़िता से 1 लाख 87 हजार 500 रुपये लिए गए।

वीजा आवेदन खारिज होने के बाद प्रतीक्षा को पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है। जांच में सामने आया कि उसे वर्क वीजा के बजाय विजिटर वीजा की प्रक्रिया में भेजा गया था। साथ ही एजेंसी द्वारा दिया गया ऑफर लेटर भी कथित तौर पर फर्जी निकला।

पैसे मांगने पर फोन किया बद

पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। बाद में उन्होंने फोन उठाने भी बंद कर दिए। प्रतीक्षा ने इंटरनेट और फेसबुक पर एजेंसी के बारे में जानकारी जुटाई। वहां उसे पता चला कि एजेंसी पर पहले भी कई लोगों से ठगी के आरोप लग चुके हैं। उसने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की,

लेकिन वे हर कुछ महीनों में मोबाइल नंबर बदलते रहे। पिछले दो वर्षों में करीब 13 अलग-अलग मोबाइल नंबर इस्तेमाल किए गए, जो बाद में बंद मिले। इसके बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत पंजाब पुलिस की एनआरआई विंग से की। शुरुआती जांच में बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोप सही पाए गए।

एनआरआई विंग में दी शिकायत

पीड़िता की जब कोई सुनवाई शुरू नहीं हुई तो उन्होंने एडीजीपी एनआरआई विंग से संपर्क किया। इसके बाद अफसरों के आर्डर पर मोहाली के एनआरआई थाने में अर्जुन सिंह और गुरदित्ता सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(2), 318(4) तथा इमिग्रेशन एक्ट 1983 की धारा 24 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।



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