नूरमहल बाईपास चौक पर पुली धंसी: व्यस्ततम मार्ग पर गड्ढों से हादसे की आशंका. 6-7 माह से लापरवाही, टिप्परों के लोड से टाइल्स टूटी – Nakodar News
नूरमहल नकोदर बाईपास पर स्थित पुली चौक पर पिछले 6-7 महीनों से मुख्य पुली धंसी हुई है, जो अब एक बड़े और बेहद खतरनाक गड्ढे का रूप ले चुकी है। व्यस्त जालंधर बाईपास मार्ग पर स्थित यह चौक किसी भी समय एक बड़े और भयानक हादसे का सबब बन सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह एक वीआईपी रूट है, जहां से अक्सर विधायक, प्रशासनिक अधिकारी और सरकार के अन्य आला अफसर गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। यह चौक बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त इलाका है। इसके ठीक सामने सब-तहसील कार्यालय, ऐतिहासिक राम मंदिर और पंजाब सरकार का मोहल्ला क्लीनिक स्थित है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज और आम लोग आते हैं। इसके अलावा आसपास कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होने के कारण यहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही रहती है। इसी मार्ग पर जालंधर और नकोदर जाने वाली सवारियां भी हर समय बस व अन्य वाहनों के इंतजार में खड़ी रहती हैं। खानापूर्ति के लिए लगाईं टाइलें, भारी वाहनों ने खोली पोल स्थानीय लोगों के अनुसार, शुरुआत में यह गड्ढा काफी छोटा था और समय रहते इसकी मामूली मरम्मत की जा सकती थी, लेकिन संबंधित विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। लगभग दो महीने पहले, जब गड्ढे ने विकराल और खतरनाक रूप ले लिया, तो विभाग ने केवल खानापूर्ति करते हुए इसमें इंटरलॉक टाइलें लगा दीं। इस व्यस्त मार्ग पर भारी वाहनों, विशेषकर रेत-बजरी से ओवरलोडेड टिप्परों का अत्यधिक दबाव रहता है, जिसके कारण ये टाइलें भी टिक नहीं पाईं और पुली अब पूरी तरह से नीचे धंस चुकी है। रोजाना गिर रहे हैं दोपहिया वाहन चालक, लोगों में भारी रोष टी-पॉइंट होने के कारण यह समस्या और भी गंभीर है। इस गड्ढे की वजह से रोजाना दोपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सीवरेज का पानी जमा होने और रात के समय रोशनी की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह गड्ढा वाहन चालकों को दिखाई नहीं देता, जिससे मरीजों और राहगीरों की जान हर वक्त जोखिम में रहती है। प्रशासन की इस ढीली कारगुजारी और लापरवाही को लेकर स्थानीय निवासियों और दुकानदारों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय, इस गंभीर मुद्दे का तुरंत संज्ञान लिया जाए और पुली का ठोस व स्थायी समाधान किया जाए।
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