नितिन नवीन बोले-पंजाब में गठबंधन के लिए जल्दबाजी नहीं: ‌BJP के राष्ट्रीय प्रधान ने SAD से अलांयस पर दिया बयान; कहा-संगठन को मजबूत करना लक्ष्य – Pathankot News

नितिन नवीन बोले-पंजाब में गठबंधन के लिए जल्दबाजी नहीं:  ‌BJP के राष्ट्रीय प्रधान ने SAD से अलांयस पर दिया बयान; कहा-संगठन को मजबूत करना लक्ष्य – Pathankot News




पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) में गठबंधन को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बड़ा बयान दिया है। भाजपा अध्यक्ष ने कहा है कि पंजाब में शिअद या किसी अन्य अकाली गुट के साथ गठबंधन करने का निर्णय समय आने पर लिया जाएगा। हाल ही में पंजाब दौरे के दौरान जालंधर में आयोजित एक मीडिया सम्मेलन में एक सवाल का जवाब देते हुए नवीन ने कहा कि समय आने पर कुछ मुद्दों का समाधान किया जाएगा। नवीन ने दोहराया कि वर्तमान समय में और मौजूदा स्थिति में भाजपा पंजाब के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अपने संगठन को मजबूत करना चाहती है। फिलहाल हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चुनाव नजदीक आने पर हम आकलन करेंगे और फैसला लेंगे। आज हम न तो गठबंधन के पक्ष में हैं और न ही इसके विरोध में हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने फिलहाल अपने दम पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। अपनी ताकत के बल पर आगे बढ़ना चाहती है भाजपा
नितिन ने कहा कि हम अपनी ताकत के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। समय के साथ कुछ बातें स्पष्ट हो जाएंगी। समय आने पर हम उनका समाधान करेंगे। अगले 6 महीनों में हम अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखेंगे और हर क्षेत्र के हर मुद्दे को उठाएंगे और जनता से मिलेंगे। गठबंधन की बात करें तो अभी काफी समय है। उन्होंने कहा कि अगले 6 महीनों तक भाजपा पंजाब में नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में अपनी योजनाओं और रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी। गठबंधन करना है या नहीं, इसका फैसला भविष्य में किया जाएगा। हम देखेंगे कि जनता से क्या प्रतिक्रिया मिलती है। छह महीने बाद हम इस पर फैसला लेंगे। जिससे यह संकेत मिलता है कि गठबंधन का अध्याय अभी समाप्त नहीं हुआ है। पंजाब की राजनीति में इस बयान के बड़े मायने
नितिन नवीन के इस बयान के राजनीतिक मायने पंजाब की राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं। उनके बयान का सीधा संकेत यह है कि भाजपा ने अभी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन के दरवाजे बंद नहीं किए हैं, लेकिन फिलहाल वह अपनी अलग राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मुख्य राजनीतिक संकेत:
भाजपा का “वेट एंड वॉच” रुख : न गठबंधन के पक्ष में, न विरोध में वाला बयान बताता है कि भाजपा अभी कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती। पार्टी पहले पंजाब में अपना संगठन, बूथ नेटवर्क और विधानसभा स्तर पर पकड़ मजबूत करना चाहती है।
अकाली दल पर दबाव की रणनीति : भाजपा यह संदेश दे रही है कि वह केवल अकाली दल के सहारे चुनाव नहीं लड़ेगी। इससे अकाली नेतृत्व पर दबाव बनता है कि अगर गठबंधन चाहिए तो भाजपा की शर्तों और बदली हुई राजनीतिक ताकत को स्वीकार करना होगा।
2019 से बदली स्थिति : पहले भाजपा और सुखबीर सिंह बादल की पार्टी लंबे समय तक सहयोगी रहे, लेकिन कृषि कानून विरोध आंदोलन के बाद दोनों का गठबंधन टूट गया था। अब भाजपा पंजाब में अकेले चुनाव लड़कर अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
सिख वोट बैंक और ग्रामीण पंजाब की चुनौती : भाजपा की पारंपरिक ताकत शहरी क्षेत्रों में ज्यादा रही है, जबकि पंजाब में ग्रामीण और किसान राजनीति का बड़ा प्रभाव है। अकाली दल के साथ गठबंधन से भाजपा को ग्रामीण पहुंच मिल सकती है, लेकिन अकेले लड़ने से उसे अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का मौका भी मिलता है।
छह महीने वाला संकेत : नवीन का छह महीने बाद फैसला वाला बयान बताता है कि भाजपा पहले जनता की प्रतिक्रिया, संगठन की स्थिति और राजनीतिक माहौल को देखना चाहती है। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि चुनावी समीकरण बदलने पर गठबंधन की संभावना फिर सक्रिय हो सकती है।
अपनी ताकत आजमाना चाहती है भाजपा : राजनीतिक जानकारों के मुताबिक नितिन का संदेश यह है कि भाजपा पंजाब में अब छोटे सहयोगी भूमिका से बाहर निकलकर अपनी ताकत आजमाना चाहती है। लेकिन वह अकाली दल के साथ भविष्य में संभावित समझौते का विकल्प खुला रख रही है। यह एक तरह की बातचीत में बढ़त बनाने वाली राजनीतिक रणनीति भी मानी जा सकती है।



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