जंतर-मंतर पर CJP प्रोटेस्ट में सिंगर काका की हुंकार:: मंच से सिस्टम-मीडिया पर कसा तंज, बोले- ‘सफेद और खाकी रंग से बचकर चलता हूं, ये बंदा खा जाते हैं – Ludhiana News

जंतर-मंतर पर CJP प्रोटेस्ट में सिंगर काका की हुंकार::  मंच से सिस्टम-मीडिया पर कसा तंज, बोले- ‘सफेद और खाकी रंग से बचकर चलता हूं, ये बंदा खा जाते हैं – Ludhiana News


देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक,परीक्षा में धांधली और बेरोजगारी के खिलाफ युवाओं का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। ‘CJP प्रोटेस्ट’ (कॉकरोच जनता पार्टी) के नाम से चल रहे इस आंदोलन को अब मनोरंजन जगत का भी खुला साथ मिलने लगा है।

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युवाओं की आवाज बुलंद करने मशहूर पंजाबी सिंगर काका (Kaka) जंतर-मंतर पहुंचे। मंच से उन्होंने न सिर्फ युवाओं का हौसला बढ़ाया, बल्कि अपने खास अंदाज़ में एक कविता/गाना गाकर वर्तमान सिस्टम, गिरते रुपये, चाटुकारिता और मीडिया पर तीखा प्रहार किया।

‘बग्गे-बिल्ले की बात मत करो, आज माहौल कुछ और है’

मंच पर आते ही सिंगर काका का स्वागत तालियों से हुआ। इस दौरान भीड़ से उनके मशहूर गाने ‘बग्गे-बग्गे बिल्ले-बिल्ले…’ की फरमाइश होने लगी। इस पर काका ने उन्हें तुरंत रोकते हुए कहा, जाके कॉमेंट्स में बोल दो,वो आ जाएंगे। अरे बग्गे-बिल्ले की बात मत करो, आज माहौल कुछ और है। मैं ज्यादातर पंजाबी गाने लिखता हूं, तो कुछ लाइनें भाई ने रिक्वेस्ट करी हैं और मैं भी कुछ सोच के आया था कि इस माहौल पे क्या जमता है।

जंतर मंतर धरने पर पहुँची सिंगर काका

सिस्टम पर तंज- ‘ये बंदे बंदा खा जांदे, डकार नहीं लैंदे’

सिंगर काका ने अपनी दमदार आवाज़ में सत्ता और व्यवस्था पर तंज कसते हुए जो पंक्तियां गाईं, उसने वहां मौजूद युवाओं में जोश भर दिया। उन्होंने गाया-

रोज रुपये वांगु डॉलर अगे गिर जांदी,चापलूसीयां ना कहिये तां दस फिर की कहिये। तारीफ़ तेरी विच खबरां सारियां झूठियां लिखदा ए, ऐसे करके आपां कोई अखबार नहीं लैंदे। हाले मैं चिट्टे खाकी रंग तो बचके चल रिहा हां, एह बंदे बंदा खा जांदे डकार नहीं लैंदे।”

(हिंदी अर्थ: रोज रुपये की तरह डॉलर के आगे गिर जाती है, इसे चापलूसी न कहें तो और क्या कहें। तुम्हारी तारीफ में ये सारी खबरें झूठी लिखते हैं, इसी वजह से हम कोई अखबार नहीं लेते। फिलहाल मैं सफेद (नेता) और खाकी (पुलिस) रंग से बचकर चल रहा हूं, क्योंकि ये लोग पूरा का पूरा इंसान खा जाते हैं और डकार तक नहीं लेते। )

मजाकिया लहजे में बोले- ‘मेरी मंजी मत कुटवा देना’

सिस्टम और मीडिया पर यह तीखा तंज कसते हुए बीच में काका ने मजाकिया लहजे में आयोजकों और युवाओं से एक बात कही जिसने माहौल को हल्का कर दिया। काका ने हंसते हुए कहा- मेरी ना मंजी कुटवा दियो छेती छेती” (कहीं मेरी जल्दी से खटिया मत खड़ी करवा देना/पिटवा मत देना)। सिंगर की यह बात सुनकर वहां मौजूद पूरी भीड़ हंस पड़ी।

आंदोलनकारियों का जोश हुआ दोगुना

मंच संभाल रहे आंदोलन के अगुआ और युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरों को अपना समर्थन देते हुए काका ने प्रदर्शनकारियों की जमकर हौसलाअफजाई की। युवाओं की भारी भीड़ के बीच काका को देखकर आंदोलनकारियों का जोश दोगुना हो गया। काका ने मंच से युवाओं के संघर्ष और उनकी मांगों को पूरी तरह जायज ठहराया।

वहीं, धरने पर बैठे छात्रों ने भी साफ कर दिया है कि जब तक पेपर लीक माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और रोजगार को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक जंतर-मंतर से उनकी यह हुंकार शांत नहीं होगी। बड़े कलाकारों के जुड़ने से अब इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और भी ज्यादा सुर्खियां मिल रही हैं।



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