चन्नी-वड़िंग गुट में बरकरार रहेगा टकराव: पंजाब चुनाव में एक-दूसरे को कमजोर करने पर फोकस; समर्थकों से मीटिंग करेंगे पूर्व CM – Ludhiana News

चन्नी-वड़िंग गुट में बरकरार रहेगा टकराव:  पंजाब चुनाव में एक-दूसरे को कमजोर करने पर फोकस; समर्थकों से मीटिंग करेंगे पूर्व CM – Ludhiana News




कांग्रेस हाईकमान ने चरणजीत सिंह गुट को दिल्ली बुलाकर फटकार लगाई और हाईकमान के निर्देशों पर काम करने को कह दिया। हाईकमान की फटकार के बाद चन्नी ने ऑल इज वेल तो कह दिया लेकिन पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक होना संभव नहीं है। चन्नी गुट पहले ही राजा वड़िंग को प्रधान मानने के लिए तैयार नहीं है और सार्वजनिक तौर पर इसका ऐलान भी कर चुका है। अब अगर हाईकमान के कहने पर चन्नी चुप भी हो जाते हैं तो दोनों गुटों के नेताओं में टकराव जारी रहेगा। विधानसभा चुनाव में अपना गुट मजबूत करेंगे चन्नी पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि अगर हाईकमान के कहने पर चन्नी राजा वड़िंग की प्रधानगी को स्वीकार कर भी लेते हैं तो विधानसभा चुनाव में उनका फोकस अपना गुट मजबूत करने और राजा वड़िंग गुट को कमजोर करने पर रहेगा। इसी तरह राजा वड़िंग गुट भी चन्नी गुट को कमजोर करने व खुद को मजबूत करने पर फोकस करेगा, ताकि अपने ज्यादा से ज्यादा लोगों को टिकट दिला सकें और जब सीएम बनने की बारी आएगी तो उनका दावा मजबूत होगा। समर्थकों को विश्वास में लेना चन्नी के लिए मुश्किल चन्नी गुट में 92 हलका इंचार्ज, विधायक और सांसद हैं। ये सभी सरेआम यह कह चुके हैं कि उन्हें राजा वड़िंग की प्रधानगी मंजूर नहीं है। कुछ सदस्य तो यहां तक कह चुके हैं कि राजा वड़िंग की प्रधानगी में पार्टी चुनाव में गई तो वो घर बैठना पसंद करेंगे। अब ऐसी परिस्थितियों में चरणजीत सिंह चन्नी अपने गुट के नेताओं को कैसे विश्वास में लेंगे। चन्नी जल्दी ही अपने समर्थकों के साथ बैठक करके उन्हें हाईकमान के साथ हुई बैठक का ब्यौरा भी देंगे। चुनाव में एक-दूसरे को पटखनी देने पर रहेगा फोकस पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह गुटबाजी पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। दोनों गुटों का पूरा फोकस फिलहाल विपक्ष से लड़ने के बजाय पार्टी के भीतर ही अपना वर्चस्व स्थापित करने पर टिक गया है। टिकट वितरण से लेकर संगठन में अपने करीबियों को एडजस्ट कराने के लिए दोनों धड़े एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दौरान दोनों ही गुट एक-दूसरे के उम्मीदवारों को कमजोर करने और उनके टिकट कटवाने की रणनीति पर काम करेंगे, ताकि चुनाव के बाद जिसका पलड़ा भारी रहे, मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर उसी का हक हो। क्या कहते हैं पॉलिटिकल एक्सपर्ट … पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान एक तरफ जहां पंजाब में सत्ता में वापसी के सपने देख रहा है, वहीं चन्नी और वड़िंग के बीच की यह जंग उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। केसी वेणुगोपाल के साथ हुई बैठक में आलाकमान ने नेताओं को एकजुट रहने की नसीहत तो दी है, लेकिन पंजाब कांग्रेस के मौजूदा हालात को देखते हुए यह साफ है कि दोनों गुटों में शह और मात का यह खेल थमने वाला नहीं है। यदि समय रहते दिल्ली दरबार ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो चुनाव में कांग्रेस को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उनका कहना है कि चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग के खिलाफ इतना बोल दिया है कि अब उनके साथ काम करना उनके लिए मुश्किल है। ऐसे में चरणजीत चन्नी अपने समर्थकों के साथ मीटिंग करके अगली रणनीति पर काम कर सकते हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रोफेसर डॉ केके रत्तू का कहना है कि चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी ने अगर विशेष जिम्मेदारी नहीं दी तो उनका गुट टालरेट नहीं करेगा। उनका कहना है कि दोनों गुटों की लड़ाई काफी आगे बढ़ चुकी है। पार्टी वड़िंग के नेतृत्व में चुनाव में जाती है तो दोनों गुटों में टकराव बना रहेगा जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस को पता है कि चन्नी के साथ पंजाब की पूरी सीनियर लीडरशिप खड़ी है और दूसरी तरफ पंजाब में दलित वोट बैंक भी चन्नी के साथ जुड़ा है।



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