अमृतसर में अज्ञात शवों की याद में अरदास: खालड़ा के मामलों पर सरकार को घेरा, फर्जी मुठभेड़ों-लावारिस अंतिम संस्कारों का आरोप – Amritsar News

अमृतसर में अज्ञात शवों की याद में अरदास:  खालड़ा के मामलों पर सरकार को घेरा, फर्जी मुठभेड़ों-लावारिस अंतिम संस्कारों का आरोप – Amritsar News




शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) द्वारा अमृतसर के शहीदा साहिब श्मशान घाट पर उन अज्ञात लोगों की याद में अरदास (प्रार्थना सभा) आयोजित की गई, जिनका पार्टी के अनुसार 1980 और 90 के दशक में कथित तौर पर ‘लावारिस’ बताकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था। हर वर्ष की तरह इस बार भी आयोजित की गई इस अरदास के दौरान पार्टी नेताओं ने मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के योगदान को याद किया और इस मामले में न्याय की मांग दोहराई। इस अवसर पर शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के कार्यकारी अध्यक्ष इमान सिंह मान ने अपने संबोधन में कहा कि यह पूरा मामला कथित ‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग्स’ (गैर-न्यायिक हत्याओं) से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक केवल कुछ निचले स्तर के पुलिसकर्मियों के खिलाफ ही कार्रवाई की गई है, जबकि उन बड़े और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही अभी तक तय नहीं की गई है जो उस समय नीति-निर्माण और निर्णयों में शामिल थे।” मान ने अपने भाषण के दौरान केंद्र सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और कुछ पूर्व उच्च अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। लापता परिजनों के लिए आज भी न्याय का इंतजार पार्टी के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह बुल्लेर ने मीडिया को बताया कि उनकी पार्टी हर साल इस श्मशान घाट पर आकर उन लोगों को श्रद्धांजलि देती है, जिन्हें उस दौर में लावारिस घोषित कर दिया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने जो तथ्य और आंकड़े दुनिया के सामने रखे थे, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज भी कई पीड़ित परिवार अपने लापता परिजनों के लिए न्याय की आस में भटक रहे हैं। बुल्लेर ने यह दावा भी किया कि पार्टी इस अरदास का आयोजन श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर में करना चाहती थी, लेकिन उन्हें वहां इसकी अनुमति नहीं दी गई। पंथक एकता और मिरी-पीरी के सिद्धांतों पर दिया जोर अपने संबोधन के दौरान हरपाल सिंह बुल्लेर ने विभिन्न कानूनों, पंजाब के मौजूदा मुद्दों, विदेशों में सिखों से संबंधित हालिया घटनाओं और पंथक राजनीति पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने सभी पंथक संगठनों और गुटों से अपील की कि वे आपसी मतभेद भुलाकर सिखों के धार्मिक और राजनीतिक सिद्धांतों (मिरी-पीरी) के अनुरूप एक साझा मंच पर आएं और मिलकर काम करें।



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