अब शुक्रवार को भी दौड़ेगी कांगड़ा की ‘लाइफलाइन: अब कोई मेंटिनेंस-डे नहीं, MP डॉ. भारद्वाज के दखल पर रेलवे का ऐलान – Pathankot News
पंजाब से कांगड़ा घाटी के पहाड़ों और वादियों के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक अच्छी खबर है। पठानकोट से जोगिन्दर नगर के बीच चलने वाली ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी रेल सेवा अब सप्ताह के सातों दिन बिना किसी रुकावट के पटरियों पर दौड़ेगी। रेलवे प्रशासन ने शुक्रवार को ‘ट्रैक मेंटेनेंस’ के नाम पर होने वाले साप्ताहिक बंद को समाप्त करने का ऐलान किया है। बता दें, कांगड़ा के सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज के विशेष प्रयासों और रेलवे बोर्ड के साथ त्वरित बैठक के बाद यह जनहितैषी निर्णय लिया गया है। 43 महीने का लंबा इंतजार और ‘शुक्रवार’ का रोड़ा
याद दिला दें कि वर्ष 2023 में आई भीषण आपदा के दौरान चक्की रेलवे पुल के दो पिलर तेज बहाव में बह गए थे, जिससे यह रेल सेवा पूरी तरह ठप हो गई थी। करीब 43 महीने के लंबे इंतजार और नए रेलवे पुल के निर्माण के बाद, हाल ही में 2 जून 2026 से इस रेल सेवा को दोबारा बहाल किया गया था। हालांकि, बहाली के महज एक हफ्ते बाद ही रेलवे ने हर शुक्रवार को ट्रैक मेंटेनेंस के लिए ट्रेन संचालन बंद रखने का फैसला सुना दिया। इस ‘मेंटेनेंस डे’ के कारण सप्ताह के ठीक बीच ट्रेन बंद होने से लोगों को भारी असुविधा हो रही थी, जिसे अब सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज और मंडल रेल प्रबंधक विवेक कुमार की सफल वार्ता के बाद समाप्त कर दिया गया है। 2. व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को राहत
सस्ता माल परिवहन: इस रेल मार्ग के सातों दिन सक्रिय रहने से पठानकोट और कांगड़ा के बीच स्थानीय सामान और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आवाजाही आसान होगी। कारोबार में तेजी: शुक्रवार को पर्यटकों और स्थानीय खरीदारों की आवाजाही बढ़ने से रेलवे स्टेशनों के आसपास के होटलों, ढाबों, चाय-नाश्ते की दुकानों और हस्तशिल्प व्यापारियों के कारोबार में भारी उछाल आएगा। 3. नौकरीपेशा, छात्रों और दैनिक यात्रियों के समय व पैसे की बचत
सड़क के भारी ट्रैफिक से मुक्ति: पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम से दैनिक यात्रियों को मुक्ति मिलेगी। सस्ता सफर: निजी बसों और टैक्सियों की तुलना में टॉय ट्रेन का किराया न के बराबर है। दैनिक यात्रा करने वाले कर्मचारियों और कॉलेज के छात्रों के लिए शुक्रवार को भी ट्रेन चलना जेब का खर्च आधा कर देगा। 4. बुजुर्गों और मरीजों के लिए संजीवनी
कांगड़ा घाटी के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में बुजुर्ग और मरीज इलाज के लिए पठानकोट या टांडा मेडिकल कॉलेज (कांगड़ा) आते हैं। शुक्रवार को ट्रेन बंद होने से उन्हें ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों पर बस या एम्बुलेंस में सफर करना पड़ता था, जो अब बेहद आरामदायक हो जाएगा। किराया तुलना: बस बनाम ट्रेन
ट्रेन का किराया बसों की तुलना में बेहद किफायती है, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ कम होगा।
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