अबोहर में मलूकपुरा नहर में 60 फुट का कटाव: आंधी बारिश से पेड़ टूट कर गिरा, 50 एकड़ फसल जलमग्न, किसानों ने मांगा मुआवजा – Abohar News

अबोहर में मलूकपुरा नहर में 60 फुट का कटाव:  आंधी बारिश से पेड़ टूट कर गिरा, 50 एकड़ फसल जलमग्न, किसानों ने मांगा मुआवजा – Abohar News




अबोहर के बल्लूआना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात आई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने किसानों पर भारी आफत बरपा दी है। गांव किक्कर खेड़ा के समीप से गुजरने वाली मलूकपुरा नहर में लगभग 60 फुट का बड़ा कटाव (दरार) हो गया। नहर टूटने से पानी का तेज बहाव आसपास के खेतों में फैल गया और 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो गई। इस तबाही से परेशान किसानों ने प्रशासन से तुरंत विशेष गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजे की मांग की है। प्रभावित किसानों रिसपाल सिंह उर्फ पाल सिंह, राजा राम, गुरप्रीत सिंह, परमजीत सिंह और गुरसेवक सिंह ने बताया कि रात में तेज आंधी के कारण नहर के किनारे खड़ा एक भारी-भरकम पेड़ जड़ से उखड़कर सीधे नहर के बीचों-बीच गिर गया। पेड़ गिरने से पानी का प्रवाह बाधित हुआ और नहर का बांध टूट गया। इसके बाद पानी तेजी से खेतों की ओर बढ़ने लगा। कुछ ही घंटों में धान व अन्य फसलें पानी में पूरी तरह डूब गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। विशेष गिरदावरी और मुआवजे की गुहार पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल गुहार लगाई है कि प्रभावित क्षेत्र का तुरंत सर्वे (गिरदावरी) करवाया जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके। किसानों का कहना है कि उनकी हाड़-तोड़ मेहनत की फसल बर्बाद हो चुकी है, इसलिए सरकार उन्हें जल्द से जल्द मुआवजा जारी कर आर्थिक राहत प्रदान करे। नहरी विभाग ने शुरू किया मरम्मत का कार्य नहर विभाग के एसडीओ जसविंदर सिंह विर्क ने कहा कि खराब मौसम और तेज आंधी-तूफान के कारण मलूकपुरा नहर में यह कटाव हुआ है। सूचना मिलते ही विभाग के तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को मौके पर भेजा गया था। कटाव को पाटने और नहर की मरम्मत का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है, ताकि पानी के बहाव को जल्द से जल्द नियंत्रित कर आगे होने वाले नुकसान को पूरी तरह रोका जा सके। ग्रामीणों में आगे के नुकसान की चिंता वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते और मजबूती से नहर की मरम्मत नहीं की गई, तो मौसम के और बिगड़ने या लगातार बारिश होने की स्थिति में आसपास के अन्य खेतों को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है।



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