PM के दौरे से पहले बैकफुट पर रवनीत बिट्टू: सतलुज पर दिलजीत से कंट्रोवर्सी का दि-एंड; बोले-जंगल में आग न लगे, पानी डाल रहा हूं – Ludhiana News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे से पहले केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू सतलुज फिल्म के विरोध को लेकर बैकफुट पर आ गए हैं। रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाबी सिंगर व एक्टर दिलजीत दोसांझ के साथ चल रही कंट्रोवर्सी का दि-एंड कर दिया। बिट्टू ने दो ट्वीट किए और उनके जरिए इस विवाद को खत्म करने का मैसेज दिया है। रवनीत बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ की फोटो के साथ वीडियो मैसेज पोस्ट किया। उसमें उन्होंने कहा कि होला भी गोबिंद का है और होली भी गोबिंद की है। दोनों रंग गोबिंद के हैं। इसके बाद बिट्टू ने एक और वीडियो पोस्ट की और लिखा कि पंजाब और देश के प्रति मेरी कोशिशें जारी रहेंगी। मैंने कोशिश करूंगा कि जंगल में आग न लगे। मैं पानी की एक बूंद डालने की कोशिश कर रहा हूं। मैं उस पक्षी की तरह कोशिश कर रहा हूं जो जंगल में आग लगने पर अपनी चोंच में पानी की बूंद लाकर डालती है। बिट्टू के इन दो ट्वीट्स से साफ हो गया कि बिट्टू इस विवाद को अब आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। रवनीत बिट्टू ने 2 ट्वीट्स के जरिए क्या कहा जानिए… 1. दोनों रंग गोबिंद के: हिंदू-सिख एकता का दिया संदेश रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पंजाबी स्टार दिलजीत दोसांझ की तस्वीर के साथ एक वीडियो और लिखित पोस्ट साझा की। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में डैमेज कंट्रोल करते हुए लिखा कि होला आनंदपुर साहिब का है जहां खालसा की सृजना हुई और होली मथुरा की है जहां गोबिंद हैं। दोनों रंग गोबिंद के हैं। मानवता के लिए हम सब एक हैं। बिट्टू ने इस पोस्ट के जरिए संदेश दिया कि मानवता के लिए सभी एक समान हैं। दिलजीत की फोटो का इस्तेमाल कर और ‘गोबिंद के दो रंगों’ की बात कहकर उन्होंने सीधे तौर पर हिंदू और सिख भाईचारे व राष्ट्रीय एकता की वकालत की। 2. जंगल की आग बुझाने वाले पक्षी जैसा है मेरा प्रयास पहली पोस्ट के तुरंत बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने एक और वीडियो मैसेज पोस्ट किया। इसमें उन्होंने खुद को विवाद बढ़ाने वाले के बजाय एक ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने लिखा किपंजाब व देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी इसी तरह निभाता रहूंगा। मेरा प्रयास सिर्फ जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए पानी की बूंदें डालने जैसा है। मेरा प्रयास उस पक्षी की तरह है जो जंगल में आग लगने पर अपनी चोंच में पानी लेकर आती है और उस आग पर डालती है, ताकि इतिहास में उसका नाम आग लगाने वालों में नहीं, बल्कि आग बुझाने वालों में आए। इस बेहद भावुक और रणनीतिक बयान से स्पष्ट है कि बिट्टू अब ‘सतलुज’ फिल्म के विवादित मुद्दे से पूरी तरह से पीछे हट चुके हैं। वे पंजाब की जनता को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि उनका मकसद राज्य में किसी भी तरह के तनाव या कड़वाहट को बढ़ाना नहीं, बल्कि शांति और भाईचारा बनाए रखना है। बैकफुट पर क्यों आए रवनीत सिंह बिट़टू जानिए..
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