पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (PPSC) के चेयरमैन रिटायर्ड मेजर जनरल विनायक सैनी ने पंजाब सिविल सर्विस (PCS) मेन्स के रिजल्ट पर स्टूडेंट्स के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स ने आंकड़ों को गलत तरीके से पेश कर दिया।

वहीं, स्टूडेंट्स ने चेयरमैन के उत्तर पर पलटवार करते हुए कहा कि जो तथ्य वे बता रहे हैं, उनके आधिकारिक आंकड़े पेश करें। स्टूडेंट्स चेयरमैन के उत्तर से भी खफा हैं।

स्टूडेंट्स आज पटियाला जाएंगे और चेयरमैन को एक लिखित शिकायत व उनके तर्क का उत्तर भी देंगे। स्टूडेंट्स के साथ अलग-अलग विपक्षी दलों के नेता भी पटियाला पहुंचेंगे और चेयरमैन को घेरेंगे।

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उधर, स्टूडेंट्स आज इस प्रकरण में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करेंगे और रिजल्ट को निरस्त करने की डिमांड करेंगे।

पीसीएस मेन्स की परीक्षा देने वाली शिफाली शर्मा का कहना है कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने हेतु एडवोकेट से बात हो गई है और वे याचिका दायर करेंगे।

स्टूडेंट्स के आरोपों पर पीपीएससी के चेयरमैन के तर्क, जानिए...

  • आंकड़ों की गलत व्याख्या: चेयरमैन का कहना है कि अभ्यर्थियों द्वारा जो आंकड़े दिए जा रहे हैं, वे भले ही गिनती में सही हों, मगर उन्हें धांधली या अनियमिता का सबूत मान लेना गलत है। यह सामान्य स्टेटिकल आउटकम का ही हिस्सा है।
  • शॉर्ट लिस्ट स्टूडेंट्स की संख्या पर संदेह गलत: चेयरमैन का तर्क है कि प्रमुख परीक्षा का कार्यक्रम कुल 12 केंद्रों पर किया गया था। हर केंद्र पर परीक्षार्थियों की संख्या करीब 100 से 500 के बीच थी। उन्होंने एक ही केंद्र से 24% बच्चे पास हुए वाले दावे को खारिज किया और बताया कि कुल 751 शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों में उस केंद्र का हिस्सा मात्र 8.1% ही है।
  • इसे गड़बड़ी नहीं कहा जा सकता: गैर-हाजिर स्टूडेंट्स को छोड़कर समस्त 7 परीक्षाओं में बैठने वाले 3,960 उम्मीदवारों के आधार पर यदि गणना की जाए, तो प्रति केंद्र औसत कामयाबी दर लगभग 19.0% निकलती है। इस 19% के औसत के मुकाबले किसी एक केंद्र की कामयाबी दर 24% होना एक सामान्य आंकड़ा है। इसे गड़बड़ी नहीं बताया जा सकता।
  • एक रूम में पास होने वालों का अंतर: चेयरमैन का कहना है कि तीन अलग-अलग केंद्रों में एक-एक कमरे से 10 या 11 उम्मीदवारों के पास होने की बात सामने आई है। आयोग के अनुसार 19% की औसत पास दर को देखते हुए एक कमरे से 10 उम्मीदवारों का चयन होना पूरी प्रकार से रेंडम वेरिएशन की सीमा में है। साल 2020 की प्रमुख परीक्षा में सिर्फ 2 परीक्षा केंद्र थे और कुल 960 प्रत्याशी थे। उस समय भी कुछ रूम्स से एक साथ 8 से 9 उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए थे।
  • लगातार रोल नंबरों का तुलनात्मक आंकड़ा: चेयरमैन का कहना है कि 2018 में रोल नंबर वाले 7 ग्रुप थे, जबकि कुल 153 चयनित प्रत्याशी थे। 2020 में लगातार रोल नंबर वाले 7 ग्रुप थे और कुल 177 चयनित उम्मीदवार थे। 2025 में 26 ग्रुप हैं और यहां कुल 751 चयनित प्रत्याशी हैं। आयोग का तर्क है कि चूंकि इस बार चयनित उम्मीदवारों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में तकरीबन 5 गुना ज्यादा है, इस कारण 26 ग्रुप का आंकड़ा अनुपात के हिसाब से पिछले वर्षों की तुलना में वास्तव में कम है।

चेयरमैन के तर्कों पर स्टूडेंट्स का पॉइंट वाइज पलटवार…

  • पुराने रिकॉर्ड और आंकड़ों पर प्रश्न: स्टूडेंट्स का कहना है कि चेयरमैन का दावा है कि 2018 में 7, 2020 में 7 और 2025 में 26 ग्रुप लगातार रोल नंबर वाले पास हुए, जो अनुपात में कम है। उनका कहना है कि अभ्यर्थी केवल कुल समूहों की संख्या से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि आयोग 2018, 2020 और 2025 की परीक्षा का पूरा डेटा सार्वजनिक करे। आयोग यह साफ करे कि 3, 4, 5, 6 या उससे अधिक लगातार चुने गए उम्मीदवारों के कितने-कितने ग्रुप बने थे। साथ ही, इसका सेंटर-वार डेटा प्रस्तुत किया जाए।
  • कॉपी जांचने वालों की योग्यता पर सवाल: स्टूडेंट्स का कहना है कि चेयरमैन का दावा है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी प्रकार से पारदर्शी और विशेषज्ञ मानकों के तहत आयोजित की गई। अभ्यर्थियों ने प्रमुख परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों की योग्यता पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। छात्रों ने मांग की है कि कॉपियां जांचने वालों की शैक्षणिक योग्यता, पदनाम और वे किन प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े हैं, इसे उजागर किया जाए। स्टूडेंट्स ने प्रश्न किए हैं कि क्या कॉपियों की छानबीन मात्र विषय विशेषज्ञों द्वारा की गई थी? क्या इसमें रिसर्च स्कॉलर्स, पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स या नॉन फेकल्टी मेंबर्स को भी कॉपी जांचने के काम में लगाया गया था?
  • कॉपी पड़ताल की प्रक्रिया पर सवाल: स्टूडेंट्स का कहना है कि चेयरमैन का दावा है कि परीक्षा में पारदर्शिता और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। स्टूडेंट्स का कहना है कि परीक्षा केंद्र की सुरक्षा के साथ-साथ कॉपियों के मूल्यांकन की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। विद्यार्थियों ने पूछा है कि उत्तर पुस्तिकाओं के आवंटन का क्या तरीका अपनाया गया था? क्या अंकों में संतुलन बनाने हेतु मॉडरेशन या डबल इवैल्युएशन की प्रक्रिया अपनाई गई थी? मूल्यांकन की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु आयोग के पास क्या क्वालिटी कंट्रोल मैकेनिज्म था?
  • दावों के बजाय डेटा पेश करें: स्टूडेंट्स का कहना है कि चेयरमैन का दावा है कि नतीजे पूरी तरह स्टेटिक मानकों के अनुरूप हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग सिर्फ जुबानी बातें और प्रेस नोट जारी कर अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। चेयरमैन ने सार्वजनिक बयानों में जो दावे किए हैं और पिछले वर्षों के जिन आंकड़ों से तुलना की है, उन समस्त से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज, मूल्यांकन से संबंधित रिकॉर्ड और डेटा PPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं।

स्टूडेंट्स की आज के संघर्ष की प्लानिंग जानिए…

  • पंजाब तथा हरियाणा हाईकोर्ट का रुख: रिजल्ट से खफा परीक्षार्थियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की पूरी तैयारी कर ली है। अभ्यर्थी शिफाली शर्मा ने बताया कि वकीलों के माध्यम से याचिका का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। अदालत में प्रमुख परीक्षा के नतीजों को निरस्त करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के लिए आज याचिका दायर की जाएगी।
  • पटियाला में PPSC चेयरमैन से मिलेंगे: आज भारी संख्या में अभ्यर्थी पंजाब के पटियाला स्थित PPSC मुख्यालय पहुंच रहे हैं। अभ्यर्थी चेयरमैन को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें उनके तर्कों का लिखित उत्तर और चारों मुख्य मांगों पर स्पष्ट साक्ष्य मांगे जाएंगे।
  • विपक्षी दलों के नेता जुटेंगे: अभ्यर्थियों के इस आंदोलन को पंजाब के विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल गया है। विपक्षी नेता और कार्यकर्ता भी पटियाला पहुंच रहे हैं, जहां वे अभ्यर्थियों के साथ मिलकर आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, शिअद नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के अलावा अन्य नेता भी पटियाला पहुंचेंगे।

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पंजाब- PCS मेन्स रिजल्ट विवाद पर चेयरमैन की सफाई आई:कहा- परिणाम में अंतर सामान्य; 1-1 कमरे से 10-10 अभ्यर्थियों के चयन का दावा

पंजाब लोक सेवा आयोग (PPSC) की ओर से आयोजित पंजाब सिविल सर्विस (PCS) मेन्स के नतीजे घोषित होते ही विवादों में घिर गए हैं। बुधवार (4 नवंबर) देर रात रिजल्ट आया। जिसके पश्चात एग्जाम देने वाले अभ्यर्थियों ने इसमें अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाए हैं। पढ़ें पूरी खबर

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Source: Dianik Bhaskar