फरीदकोट जिले में हेरोइन तस्करी से जुड़े दो बड़े मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया और सबूत जुटाने के तरीकों पर अदालतों ने गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। वक्त पर पूरी चार्जशीट दाखिल न होने की वजह से एक प्रकरण में आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिल गई, तो वहीं दूसरे माम

मामलों के बारे मे जानिए

2.11 किग्रा हेरोइन केस में पुलिस की लापरवाही

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पहला मामला 2.11 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़ा है, जिसमें फरीदकोट की विशेष कोर्ट ने फिरोजपुर सिटी निवासी विशाल उर्फ घोघा को बीएनएसएस (BNSS) की धारा 187(3) के तहत वैधानिक (डिफॉल्ट) जमानत दे दी।

1 मई 2026 को थाना सदर कोटकपूरा पुलिस ने विशाल और उसके साथी रमन को मोटरसाइकिल पर जाते वक्त गिरफ्तार कर 2.11 किलो हेरोइन व 50 हजार रुपये की ड्रग मनी बरामद की थी। व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity) होने की वजह से पुलिस को 180 दिनों के भीतर पूर्ण छानबीन रिपोर्ट (चालान) पेश करनी थी। पुलिस ने 23 अक्टूबर को आंशिक चालान दाखिल किया, लेकिन एफएसएल (FSL) रिपोर्ट अधूरी होने की वजह से कोर्ट ने इसे वापस लौटा दिया। तय समयसीमा बीतने के बाद भी पूर्ण चालान पेश न होने पर कोर्ट ने अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

बिना ठोस सबूत नामजद करने पर हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

दूसरे मामले में 4.029 किलोग्राम हेरोइन बरामदगी के केस में पंजाब तथा हरियाणा हाईकोर्ट ने रमनदीप सिंह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की।

पुलिस ने 5 सितंबर को चार आरोपियों (संदीप सिंह, मनवीर सिंह, प्रवेश और वासु बिरला) को गिरफ्तार कर हेरोइन बरामद की थी। पूछताछ के बीच आरोपी संदीप के दिए वक्तव्य के आधार पर पुलिस ने रमनदीप को सप्लायर बताकर केस में नामजद किया था।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि रमनदीप से न तो कोई प्रत्यक्ष बरामदगी हुई है और न ही सह-आरोपियों के साथ उसका संपर्क साबित करने हेतु कोई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पेश किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस पुष्टिकारी साक्ष्य के केवल सह-आरोपी के खुलासे वाले वक्तव्य के आधार पर किसी को अग्रिम जमानत देने से इंकार नहीं किया जा सकता।

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